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सारांशः फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को पूरे मार्केट में कहीं भी निवेश करने की आज़ादी होती है. लेकिन जब बात मल्टीबैगर खोजने की आती है, तो इन्हें बहुत बड़ी क़ामयाबी नहीं मिली है. लेकिन क्या किसी फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो में मल्टीबैगर स्टॉक्स की संख्या उसके रिटर्न पर असर डालती है? चलिए पता करते हैं.
रोजर फे़डरर को दुनिया के सबसे महान टेनिस खिलाड़ियों में गिना जाता है. लेकिन उनके खेले गए हर शॉट से पॉइंट नहीं बनता था. कुछ शॉट खुद की ग़लती से चूक जाते थे. कुछ बस थोड़े से बाहर निकल जाते थे या लाइन से थोड़ा आगे गिरते थे. असल में, सबसे बेहतरीन खिलाड़ी भी खेल में कई ग़लतियां करते हैं.
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड भी कुछ इसी तरह काम करते हैं. इन्हें बाज़ार के हर हिस्से में निवेश करने की आज़ादी होती है. लेकिन इस आज़ादी का मतलब यह नहीं कि हर शेयर सही साब़ित हो या मल्टीबैगर बन जाए. कुछ दांव बहुत अच्छा काम करते हैं, कुछ नहीं करते. यह बहुत ही सामान्य सी बात है. जो चीज़ असल में मायने रखती है वह परफे़क्शन नहीं है, बल्कि यह है कि वो फै़सले एक साथ कैसे काम करते हैं और क्या वो लॉन्ग-टर्म में अच्छे रिटर्न में बदलते हैं.
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मल्टीबैगर खोजना कोई आसान काम नहीं है
नीचे दी गई टेबल पर ग़ौर करते ही एक बात साफ़ हो जाती है कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड द्वारा चुने गए हर स्टॉक मल्टीबैगर नहीं बनते. इस कैटेगरी के सबसे बड़े और सबसे अनुभवी फ़ंड भी कभी-कभार ही बड़े विनर खोज पाते हैं.
उदाहरण के तौर पर, एडलवाइस फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को ही लें. बीते तीन साल में इस फ़ंड ने क़रीब 201 शेयरों में निवेश किया. इनमें से सिर्फ़ 21 शेयर ही मल्टीबैगर बन पाए.
हर शेयर विनर नहीं बनता
बड़े साइज़ के बावजूद, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो में कुछ ही मल्टीबैगर होते हैं
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फ़ंड का नाम
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मल्टीबैगर शेयरों की संख्या | कुल होल्डिंग |
|---|---|---|
| Edelweiss Flexi Cap | 21 | 201 |
| Union Flexi Cap | 21 | 248 |
| Aditya Birla Sun Life Flexi Cap | 20 | 173 |
| HDFC Flexi Cap | 19 | 123 |
| Navi Flexi Cap | 19 | 253 |
| Canara Robeco Flexi Cap | 18 | 149 |
| DSP Flexi Cap | 17 | 133 |
| Kotak Flexicap | 14 | 96 |
| WhiteOak Capital Flexi Cap | 14 | 257 |
| Bandhan Flexi Cap | 13 | 247 |
| Bank of India Flexi Cap | 13 | 219 |
| Franklin India Flexi Cap | 13 | 143 |
| HSBC Flexi Cap | 13 | 237 |
| Parag Parikh Flexi Cap | 12 | 130 |
| SBI Flexicap | 12 | 205 |
| Shriram Flexi Cap | 12 | 404 |
| UTI Flexi Cap | 11 | 85 |
| ITI Flexi Cap | 10 | 189 |
| Tata Flexi Cap | 10 | 174 |
| यहां सिर्फ़ उन्हीं शेयरों को शामिल किया गया है जिनकी क़ीमत पिछले 6 साल में कम से कम तीन गुना बढ़ी है. रिटर्न स्टॉक XIRR से तय किए गए. ये डेटा दिसंबर 2020 से नवंबर 2025 तक के डायरेक्ट प्लान का है. | ||
यूनियन और आदित्य बिड़ला के फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड भी इसी तरह रहे. यूनियन फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को अपनी 248 होल्डिंग में से 21 मल्टीबैगर मिले, वहीं आदित्य बिड़ला फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में 173 में से 20 शेयर तीन गुना से ज़्यादा बढ़े. दिलचस्प बात यह है कि निवेश का तरीक़ा अलग होने के बावजूद, इन फ़ंड्स में मल्टीबैगर मिलने की संख्या में बहुत ज़्यादा फ़र्क नहीं है.
क्या ज़्यादा मल्टीबैगर होने का मतलब बेहतर रिटर्न होता है
हर शेयर का तीन गुना या उससे ज़्यादा बढ़ना ज़रूरी नहीं है और इसका फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के प्रदर्शन पर बड़ा असर भी नहीं पड़ता. उदाहरण के लिए, पराग पारिख़ फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड ने पिछले छह साल में 130 से ज़्यादा शेयरों में निवेश किया. इनमें से सिर्फ़ 12 शेयर मल्टीबैगर बने. इसके बावजूद, यह फ़ंड लगातार इस कैटेगरी के बेहतर फ़ंड्स में बना रहा.
इसकी एक बड़ी वजह पोर्टफ़ोलियो में निवेश का एलोकेशन है. आमतौर पर, फ़ंड अपने सबसे तेजी से बढ़ने वाले शेयरों में शुरुआत में बहुत छोटा हिस्सा लगाते हैं. इससे कुल रिटर्न पर इनका असर सीमित रहता है. यानी अगर कोई शेयर पांच गुना भी बढ़ जाए, लेकिन उसमें औसतन निवेश सिर्फ़ 0.4 या 0.5 प्रतिशत हो, तो कुल रिटर्न पर उसका असर ज़्यादा नहीं होगा.
एक और वजह यह है कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड कई ऐसे शेयर भी रखते हैं जो न बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं और न ही बहुत तेज़ी से गिरते हैं. इससे पोर्टफ़ोलियो में स्थिरता आती है, लेकिन मल्टीबैगर का असर भी थोड़ा कम हो जाता है. आख़िर में यहां भी संख्या से ज़्यादा असर मायने रखता है. सही वेट के साथ पकड़ा गया एक बड़ा विनर कई एवरेज मल्टीबैगर पर भारी पड़ सकता है.
इसीलिए फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में असली सवाल यह नहीं है कि कितने मल्टीबैगर मिले, बल्कि यह है कि वो कब मिले, कितने वेटेज के साथ रखे गए और फ़ंड मैनेजर ने उन्हें कितने समय तक होल्ड रखा.
तो किस फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में निवेश करें
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चुनते समय सिर्फ़ मल्टीबैगर की संख्या को आधार नहीं बनाना चाहिए. निवेश से पहले आपको अपनी रिस्क लेने की क्षमता, अपना गोल और निवेश की समय-सीमा को देखना चाहिए.
यहीं पर वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी मदद करता है. यह सिर्फ़ रिटर्न नहीं देखता, बल्कि यह भी समझाता है कि फ़ंड मुश्क़िल समय में कैसा बर्ताव करता है, निवेश का एलोकेशन कैसे बदलता है, पोर्टफ़ोलियो की क्वालिटी कैसी है और लंबे समय में कंसिस्टेंसी कितनी रही है. इसके साथ ही, यहां आपको आपकी ज़रूरत और निवेश के तरीके़ से मेल खाने वाले चुने हुए फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की लिस्ट भी मिलती है.
आख़िरकार, फ़्लेक्सी-कैप निवेश में जीत उसी की होती है जो ऐसे फ़ंड चुनता है जो हर मार्केट साइकल में टिक सकें, न कि सिर्फ़ सबसे मशहूर नाम.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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