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AI के डर से IT स्टॉक्स में 21% की गिरावट. क्या करें निवेशक?

नंदन नीलेकणि ने AI को ऐसा बड़ा बदलाव बताया, जो भारतीय IT सेक्टर को नया आकार दे सकता है

AI के डर से IT स्टॉक्स में 21% की गिरावट. आप क्या करें?Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः क्या AI भारतीय IT को हिला रहा है या उसे नए तरीके़ से काम करने पर मजबूर कर रहा है. BSE IT इंडेक्स 21 प्रतिशत गिर चुका है और कमाई की रफ़्तार भी धीमी है. बाज़ार को लग रहा है कि आउटसोर्सिंग मॉडल कमजोर पड़ रहा है. लेकिन क्या यह लंबी गिरावट की शुरुआत है या बदलाव का मुश्क़िल दौर. यह लेख समझाता है कि AI का असली असर क्या है और निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए.

कई सालों तक भारतीय IT सेक्टर को बाज़ार का भरोसेमंद कंपाउंडर माना जाता था. आज वही सेक्टर सवालों में है.

पिछले एक साल में BSE IT इंडेक्स 21 प्रतिशत गिर चुका है. पहले की बढ़त का बड़ा हिस्सा मिट गया है. तीन और पांच साल की अवधि में यह सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा है. 10 साल के आधार पर भी FMCG और टेलीकॉम के साथ बॉटम के आसपास हैं और ब्रॉडर इंडेक्स से भी पीछे.

कमाई के आंकड़े भी दबाव दिखाते हैं. हाल की तिमाही में लिस्टेड IT कंपनियों का टैक्स से पहले मुनाफ़ा 5.6 प्रतिशत घटा. पिछले 12 महीनों में मुनाफ़े की बढ़त साल-दर-साल सिर्फ़ 3.9 प्रतिशत रही, जो दो साल में सबसे कम है. ग्रोथ अनुमान घटाए गए हैं. Infosys एक साल में 26 प्रतिशत नीचे है. TCS 31 प्रतिशत गिर चुका है.

बाज़ार का सीधा संदेश है. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस भारतीय IT सर्विस मॉडल को बड़े स्तर पर बदल सकता है.

डर क्यों समझ में आता है

तीन दशकों तक भारतीय IT ने सर्विस आधारित आउटसोर्सिंग मॉडल पर तरक़्क़ी की. इसका आधार था बड़ा पैमाना, बेहतर काम और कम लागत. विदेशी क्लाइंट्स डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मेंटेनेंस और इंटीग्रेशन जैसे काम भारत को देते थे. कमाई सीधा काम के घंटों से जुड़ी रहती थी.

AI इस हिसाब को बदल देता है.

जेनरेटिव AI टूल्स कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और टेस्टिंग के कई हिस्से अपने-आप कर सकते हैं. क्लाइंट की अपनी टीमें ज़्यादा तेज़ी से काम कर रही हैं. छोटे प्रोजेक्ट, जो पहले बाहर दिए जाते थे, अब कंपनी के अंदर ही हो सकते हैं. डील पूरी होने में ज़्यादा समय लग रहा है और टेक ख़र्च धीमा हुआ है.

अगर AI इंसानों की ज़रूरत कम कर देता है, तो पुराना बिलिंग मॉडल दबाव में आता है. इसलिए चिंता सिर्फ़ कुछ महीनों की नहीं, बल्कि लंबे असर की है.

इसी माहौल में Infosys ने हाल ही में AI पर एक बड़ी बैठक की, जहां अपनी रणनीति समझाई.

यह सिर्फ़ प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की बात नहीं

Infosys के को-फ़ाउंडर और चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने AI को कंपनियों के काम करने के तरीके़ में “बुनियादी स्तर से बदलाव” बताया.

पहले की इंटरनेट और क्लाउड जैसी टेक लहरों से अलग AI पहले से बने स्ट्रक्चर पर काम करता है. कंपनियां पहले ही डिजिटल हैं, क्लाउड पर हैं और उनके पास बड़ा डेटा है. इसलिए AI अपनाने की रफ़्तार तेज़ हो सकती है.

तेज़ी से अपनाने का मतलब तेज़ बदलाव भी है. बढ़त जल्दी बन सकती है और जल्दी खत्म भी.

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कंपनियां तैयार हैं.

बड़ी कंपनियां पुराने सिस्टम, बिख़रे डेटा और पेचीदा नियमों पर चलती हैं. AI को सीधे जोड़ देना आसान नहीं है.

दरअसल AI मजबूर करता है कि डेटा साफ़ और एक जैसा हो. टेक स्ट्रक्चर सरल बने. काम की प्रक्रिया बदली जाए. पुराने सिस्टम नए सिरे से बनाए जाएं.

अगर ऐसा होता है, तो काम ख़त्म नहीं होता. उसका रूप बदलता है. कोडिंग से आगे बढ़कर इंटीग्रेशन, सिस्टम जोड़ने और पूरे कामकाज को बदलने की ज़रूरत बढ़ती है.

अंत नहीं, बदलाव का दौर

अगर AI सिर्फ़ कोडिंग को अपने-आप करने तक सीमित होता, तो डिमांड कम होती है. लेकिन ज़्यादातर कंपनियों को अपने पुराने सिस्टम में AI जोड़ना होगा. यह आसान नहीं है.

सिस्टम जोड़ने की समझ, सेक्टर का अनुभव और जोख़िम संभालने की क्षमता अब भी अहम है, जो बड़ी IT कंपनियों की ताक़त रही है. पुराने सिस्टम रिकॉर्ड का आधार बने रहेंगे और AI उनके ऊपर काम करेगा. इस स्ट्रक्चर को सही तरह बनाना आसान काम नहीं है.

काम का स्वरूप बदलेगा. कोडिंग रहेगी, लेकिन AI को संभालना, लागू करना, साइबर सुरक्षा और डेटा मैनेजमेंट की अहमियत बढ़ेगी. असली सवाल यह है कि क्या भारतीय IT कंपनियां अपने कर्मचारियों को नए कौशल सिखाकर तेज़ी से बदल सकती हैं.

सुरक्षा एक और मुद्दा है. AI से काम तेज़ होता है, लेकिन जोखिम भी बढ़ता है. कंपनियों को बेहतर निगरानी और कंट्रोल की ज़रूरत होगी.

दक्षता से कमाई घटेगी या नए काम से बढ़ेगी, यही आने वाले साल तय करेंगे.

निवेशक क्या देखें

कमाई की रफ़्तार धीमी है. बदलाव भी असली है.

AI भारतीय IT को बदलेगा. पुराना कम लागत वाला मॉडल दबाव में है. लेकिन AI इंटीग्रेशन, सिस्टम अपडेट, साइबर सुरक्षा और डेटा मैनेजमेंट जैसे नए मौके़ बढ़ सकते हैं.

तीन बातें अहम हैं.

  • पहली, कंपनियां AI वाले काम की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ती हैं.
  • दूसरी, वो कर्मचारियों को नए कौशल सिखाकर मार्जिन कैसे बचाती हैं.
  • तीसरी, क्लाइंट का ख़र्च कब बड़े स्तर पर शुरू होता है.

आज यह सेक्टर तक़नीक की ताक़त और कंपनियों की तैयारी के बीच खड़ा है. अगर बदलाव धीमा रहा, तो दिक्क़त बढ़ेगी. अगर सिस्टम जोड़ने की मांग बनी रही, तो नया मौका बन सकता है.

भारतीय IT का अगला दशक इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां AI के साथ खुद को कितना बदल पाती हैं.

जानना चाहते हैं कि AI के दौर में कौन-से IT शेयर आगे बढ़ सकते हैं?

वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र शोर से अलग हटकर मज़बूत कंपनियों की पहचान करने में मदद करता है और ऐसे शेयरों से दूर रखता है, जहां लंबी समस्या के संकेत दिख रहे हों.

सुर्ख़ियों के आधार पर नहीं, साफ़ समझ के साथ निवेश करें.

ये भी पढ़ें: लाखों बग्स का मुकाबला AI नहीं कर सकता

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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