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सारांशः SEBI म्यूचुअल फ़ंड को गिफ़्ट कार्ड की तरह गिफ़्ट करने योग्य बनाना चाहता है. शॉपिंग की जगह पाने वाला निवेश करे. एक छोटा-सा आइडिया जो इस बात पर बड़ा असर डाल सकता है कि कौन पहले निवेश की दुनिया से जुड़ता है.
हम में से ज़्यादातर ने कभी न कभी गिफ़्ट कार्ड दिया या लिया होगा, एक प्रीपेड कार्ड जिसमें पैसे भरे हों और किसी ख़ास स्टोर या प्लेटफ़ॉर्म पर ख़र्च किए जा सकें. भारत के मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अब कुछ ऐसा ही प्रस्ताव किया है: शॉपिंग की जगह पाने वाला इसे म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करे.
यह एक सीधा-सादा आइडिया है जिसके पीछे एक अहम मक़सद है: किसी फ़ाइनेंशियल एसेट को गिफ़्ट करना आसान बनाना और इस तरह ज़्यादा नए निवेशकों को म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया से जोड़ना.
यह काम कैसे करेगा
इस प्रस्ताव के तहत कोई भी ऑनलाइन या फ़िज़िकल कार्ड के रूप में म्यूचुअल फ़ंड गिफ़्ट कार्ड ख़रीद सकता है और उसे उस शख़्स को दे सकता है जिसे गिफ़्ट करना हो. पाने वाला फिर कार्ड की ओनरशिप लेता है और उसे अपनी पसंद की म्यूचुअल फ़ंड स्कीम में लगाता है, सीधे उस एसेट मैनेजमेंट कंपनी AMC की वेबसाइट के ज़रिए जो म्यूचुअल फ़ंड मैनेज करती है.
पहली बार के निवेशकों के लिए चीज़ें आसान रखने के लिए गिफ़्ट देने वाला एक स्कीम सुझा सकता है. लेकिन आख़िरी फ़ैसला पूरी तरह पाने वाले का होगा. वो चाहे तो ख़ुद निवेश कर सकता है या अगर गाइडेंस चाहिए तो म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर की मदद ले सकता है, यानी वो बीच का शख़्स जो निवेशकों को फ़ंड चुनने और मैनेज करने में मदद करता है.
एक बार निवेश हो जाने के बाद रिटर्न या रिडेम्शन की रक़म, यानी पाने वाले को अपनी म्यूचुअल फ़ंड यूनिट बेचने पर मिलने वाले पैसे, सिर्फ़ उनके अपने रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में जाएंगे.
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SEBI ने क्या सेफ़गार्ड बनाए हैं
SEBI ने एक साफ़ फ़्रेमवर्क बनाए रखने और ग़लत इस्तेमाल रोकने के लिए कई नियमों का प्रस्ताव किया है.
हर गिफ़्ट कार्ड की वैल्यू ₹10,000 से ज़्यादा नहीं हो सकती और कार्ड की पूरी रक़म निवेश करनी होगी. आंशिक रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकते यानी बाक़ी बैलेंस ऐसे ही पड़ा नहीं रहेगा. अगर कार्ड इस्तेमाल नहीं हुआ तो एक साल बाद रक़म ख़रीदने वाले को वापस हो जाएगी.
ये गिफ़्ट कार्ड उस ₹50,000 की सालाना लिमिट के अंदर आएंगे जो वॉलेट-बेस्ड म्यूचुअल फ़ंड निवेश पर पहले से लागू है, इसलिए इनका इस्तेमाल सामान्य निवेश चैनल के बाहर बड़ी रक़म लगाने में नहीं हो सकता.
पेमेंट के मामले में सिर्फ़ कैश, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से भरी रक़म ही इस्तेमाल हो सकती है. क्रेडिट कार्ड, कैशबैक रिवॉर्ड और प्रमोशनल क्रेडिट की इजाज़त नहीं है. यह उन मौजूदा नियमों के साथ मेल खाता है जो म्यूचुअल फ़ंड निवेश में थर्ड-पार्टी पेमेंट रोकते हैं, यानी फ़ंड में लगाई रक़म निवेशक के अपने वेरिफ़ाइड सोर्स से आनी चाहिए, किसी और के अकाउंट या प्रमोशनल बैलेंस से नहीं.
गिफ़्ट कार्ड जारी करने का ख़र्च AMC उठाएगी, न कि पाने वाला और देने वाला.
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आपके लिए इसका क्या मतलब है
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह किसी को, किसी युवा परिवार के सदस्य को, अभी-अभी शुरुआत कर रहे दोस्त को या पहली बार कमाने वाले को, निवेश की आदत से जोड़ने का एक सच में काम का तरीक़ा बन जाता है.
नक़द देने की जगह जो शायद बचे या न बचे, एक म्यूचुअल फ़ंड गिफ़्ट कार्ड पाने वाले को सीधे निवेश के इकोसिस्टम में धकेलता है. ₹10,000 की लिमिट इसे गिफ़्ट के लिए सही रखती है और अपनी स्कीम चुनने की आज़ादी का मतलब है कि पाने वाला किसी ऐसी चीज़ में नहीं फंसता जो उसने ख़ुद नहीं चुनी.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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