फ़र्स्ट पेज

नाम में क्या रखा है!

जब एक लेबल सब बताए और कुछ न बताए

मल्टी-एसेट एलोकेशन फ़ंड्स असल में अपने नाम के जैसे क्यों नहीं होतेAnand Kumar

सारांश: म्यूचुअल फ़ंड की कैटेगरी का नाम एक भरोसेमंद शॉर्टकट माना जाता है. लेकिन मल्टी-एसेट अलोकेशन फ़ंड्स में यह 50 परसेंटेज पॉइंट की इक्विटी रेंज देता है. इतना अस्पष्ट शॉर्टकट कोई स्पष्टता नहीं है - बस उसका भ्रम है.

ज़्यादातर म्यूचुअल फ़ंड निवेशक एक मान्यता लेकर चलते हैं, बिना जाने भी - कि फ़ंड की कैटेगरी का नाम यह बता देता है कि फ़ंड करता क्या है. यह मान्यता ग़लत नहीं है. SEBI ने सालों की मेहनत से फ़ंड्स को दोबारा कैटेगराइज़ किया था, ताकि निवेशकों को यही स्पष्टता मिले. कैटेगरी का नाम एक भरोसेमंद शॉर्टकट होना चाहिए, जो एक नज़र में बता दे कि पोर्टफ़ोलियो किस तरह का है.

मल्टी-एसेट अलोकेशन फ़ंड (MAAF) की कैटेगरी इस मान्यता को ग़लत साबित करती है. इस कैटेगरी का फ़ंड अपनी नेट एसेट का 20 से 70 प्रतिशत तक नेट इक्विटी में रख सकता है. यह कोई संकरी रेंज नहीं है - यह इक्विटी रिस्क का आधा स्पेक्ट्रम है. SEBI की एक ही कैटेगरी में बैठे दो फ़ंड बिल्कुल अलग-अलग प्रोडक्ट की तरह व्यवहार कर सकते हैं. कंज़र्वेटिव हाइब्रिड जैसी एक कैटेगरी में 25 प्रतिशत इक्विटी हो सकती है. एग्रेसिव हाइब्रिड जैसी दूसरी कैटेगरी में 65 प्रतिशत इक्विटी. दोनों पर MAAF का एक ही लेबल है. यानी नाम से निवेशकों के पैसे मैनेज करने के तरीक़े के बारे में लगभग कुछ पता नहीं चलता.

यह कोई नई समस्या नहीं है. यह वही समस्या है जिसे SEBI ने सुलझाने की कोशिश की थी - और जो फिर से पैदा हो गई. 2017 की रीकैटेगराइज़ेशन से पहले बैलेंस्ड फ़ंड्स में भी यही अस्पष्टता थी. उस कैटेगरी में भी इक्विटी की बड़ी रेंज थी और निवेशकों को अक्सर बाद में पता चलता था कि जो फ़ंड उन्होंने ख़रीदा वह नाम के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा एग्रेसिव या कंज़र्वेटिव था. रीकैटेगराइज़ेशन इसी को ठीक करने के लिए आई थी. ज़्यादातर कैटेगरीज़ में हुई भी. लेकिन MAAF के लिए, वही उलझन बस एक नए लेबल पर चली गई.

असली समस्या यह है कि निवेशकों को समझने में मदद करने वाला ढांचा उस ढांचे के साथ क़दम नहीं मिला पाया जो उन्हें कुछ बेचता है. भारत का म्यूचुअल फ़ंड उद्योग बेहद तेज़ी से बढ़ा है. डिस्ट्रिब्यूशन हर जगह है. ऐप्स ने निवेश को आसान बना दिया है. SIP दो मिनट से भी कम में शुरू हो जाती है. हर महीने नए निवेशक बाज़ार में आते हैं - और कई सिर्फ़ कैटेगरी के नाम पर भरोसा करके फ़ैसला करते हैं. लेकिन जो टूल्स यह समझाते हैं कि फ़ंड के अंदर असल में है क्या - वे पीछे रह गए हैं. कैटेगरी के लेबल इसी कमी को पाटने के लिए थे. MAAF के मामले में, वे इसे पाट नहीं पाए.

Mutual Fund Insight के मई 2026 अंक की कवर स्टोरी वही काम करती है जो काम MAAF के लेबल को करना चाहिए था, पर नहीं कर पाया: यह फ़ंड्स को उनके असल काम के आधार पर बांटती है - कितनी इक्विटी है, बाज़ार की गिरावट में कैसे व्यवहार करते हैं, और कौन-सा बकेट किस निवेशक के लिए सही है. यह काम वही था जो SEBI की कैटेगराइज़ेशन को करना था. हमें ख़ुद करना पड़ा, क्योंकि अकेला कैटेगरी का नाम वह नहीं बताता जो निवेश से पहले जानना ज़रूरी है.

SEBI की 2017 का रीकैटेगराइज़ेशन एक अच्छा क़दम था, लेकिन आख़िरी नहीं. अगर कोई कैटेगरी 50 परसेंटेज प्वाइंट की इक्विटी रेंज देती है, तो वह काम की नहीं है. उद्योग यह जानता है. AMFI भी जानता है. हल मुश्किल नहीं है: सब-कैटेगरीज़ बनाएं, रिस्क लेबल अनिवार्य करें और फ़ंड हाउसेज़ को कैटेगरी टैग में इक्विटी रेंज बताना ज़रूरी करें. ये कोई बड़ी मांगें नहीं हैं - ये एक बेहतर निवेश की न्यूनतम शर्तें हैं. जब तक यह नहीं होता, निवेशक ऐसे लेबल पर भरोसा करते रहेंगे जो स्पष्टता का वादा करते हैं और भ्रम देते हैं.

फ़िलहाल, अगर आप किसी मल्टी-एसेट अलोकेशन फ़ंड पर नज़र डाल रहे हैं, तो निवेश से पहले कवर स्टोरी ज़रूर पढ़ें. लेबल आपको बचाएगा नहीं - लेकिन उसके पीछे की असलियत समझना ज़रूर काम आएगा.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


4 million + Issues sold
magazine-image
physical copy option Physical Copy
pdf reader option PDF Reader
web copy option Web Copy
mobile app option Mobile App

टॉप पिक

ठहराव, गिरावट और बढ़त: निवेश के लिए असरदार गाइड

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

यह मिड-कैप अपने पीक से 60% गिरा. फिर भी बिज़नेस सामान्य है

पढ़ने का समय 4 मिनटLekisha Katyal

यह दिग्ग़ज लार्ज एंड मिड-कैप फ़ंड पिछड़ क्यों रहा है?

पढ़ने का समय 4 मिनटअमेय सत्यवादी

10 साल में ₹1 करोड़ चाहिए? ये रहा आपका पूरा रोडमैप!

पढ़ने का समय 4 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

Sensex में 11.5% की गिरावट, फिर भी निवेशकों ने ₹40,450 करोड़ लगाए

पढ़ने का समय 3 मिनटचिराग मदिया

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

मार्च में जितने दिन नहीं, उससे ज़्यादा क्राइसिस आ गईं

मार्च में जितने दिन नहीं, उससे ज़्यादा क्राइसिस आ गईं

पूरी रक़म एक साथ निवेश करने की जल्दबाज़ी करने के बजाय एक बेहतर तरीक़ा अपनाइए

दूसरी कैटेगरी