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Electronic Gold Receipts क्या है और ETF से कैसे अलग है?

NSE की इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट: न चोरी का डर, न क्वालिटी की चिंता, न लॉकर का ख़र्च. और चाहें तो असली सोना भी घर आएगा.

electronic-gold-receipt-egr-nse-how-to-invest-vs-gold-etfVinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः शेयर की तरह ख़रीदो, सोने की तरह रखो. NSE की इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट ने सोने में निवेश का पुराना तरीक़ा बदल दिया है. न लॉकर, न जौहरी, न नक़ली होने का डर. इस आर्टिकल में जानिए, EGR क्या है और ये बदलाव आपके लिए कितना ख़ास हो सकता है.

भारत में दो चीज़ें कभी सवालों के घेरे में नहीं आतीं. एक मां की बात, दूसरी सोने की चमक़. शादी में सोना, बच्चे के जन्मदिन पर सोना, त्योहार पर सोना, बुरे वक़्त में सोना. लेकिन जैसे ही बात आती है सोना कहां रखें, तो पूरा घर एक हो जाता है, और वो भी लड़ने के लिए. घर में रखो तो नींद नहीं, बैंक लॉकर लो तो हर साल किराया, जौहरी के पास बेचने जाओ तो वो कहेगा "थोड़ा कम कैरेट है जी." और क्वालिटी साबित करने की कोशिश करो तो पूरा दिन बर्बाद. सोने के साथ यह झंझट सदियों पुरानी है.

NSE की इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट ने आपकी यह समस्या काफ़ी हद तक दूर कर दी है.

असल में, NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने 4 मई को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR लॉन्च की है. सीधे शब्दों में कहें तो अब आप सोना उसी तरह ख़रीद और बेच सकते हैं जैसे शेयर बाज़ार में कोई शेयर ख़रीदते हैं.

EGR क्या है: सोने की डिजिटल चाबी समझिए

समझिए इसे एक रसीद की तरह. आपने सोना ख़रीदा, वो असली सोना SEBI से मान्यता प्राप्त एक सुरक्षित तिजोरी यानी वॉल्ट में जमा हो गया और उसके बदले आपको मिली एक इलेक्ट्रॉनिक रसीद, जो आपके डीमैट अकाउंट में आ जाती है. यही है EGR. यह रसीद आप बाज़ार में किसी को भी बेच सकते हैं, किसी से भी ख़रीद सकते हैं, बिल्कुल शेयर की तरह.

NSE ने अपनी शुरुआत 1000 ग्राम की सोने की एक छड़ से की. उसे EGR में बदला और दिखाया कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है.

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जो सवाल सबसे पहले दिमाग़ में आता है: असली सोना मिलेगा या सिर्फ़ काग़ज़?

मिलेगा. यही EGR की सबसे बड़ी ख़ासियत है. जब चाहें EGR वापस करें और उसके बदले उतने ही वज़न और उतनी ही प्योर क्वालिटी का असली सोना ले लें. यह सुविधा गोल्ड ETF में नहीं मिलती. वहां आपको बस पैसे मिलते हैं, सोना नहीं.

5 फ़ायदे जो फ़िज़िकल गोल्ड को शर्मिंदा कर दें

  • पहला, चोरी का डर नहीं. सोना SEBI के नियमों के तहत काम करने वाली सुरक्षित तिजोरी में है. घर में रखने की ज़रूरत नहीं.
  • दूसरा, क्वालिटी की गारंटी. SEBI से मान्यता प्राप्त वॉल्ट मैनेजर इसे प्रमाणित करते हैं. LBMA (लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन) और BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों पर ख़रा सोना ही EGR में बदला जा सकता है. नक़ली या मिलावटी सोने का कोई सवाल नहीं.
  • तीसरा, बैंक लॉकर का ख़र्च नहीं. हर साल हज़ारों रुपये लॉकर पर ख़र्च होते हैं. EGR में वो ख़र्च नहीं है.
  • चौथा, छोटी रक़म में भी निवेश. असली सोने में अक्सर एक तोले से कम ख़रीदना मुश्क़िल होता है. EGR में आप बहुत छोटी मात्रा से भी शुरू कर सकते हैं. यह आम निवेशक के लिए बड़ी बात है.
  • पांचवां, ख़रीदना-बेचना आसान. शेयर बाज़ार में जैसे मिनटों में ख़रीद-बिक्री होती है, वैसे ही EGR भी. जौहरी के पास जाने की ज़रूरत नहीं, दाम पर बहस नहीं.

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सोने का पूरा बाज़ार बदलेगा

EGR का फ़ायदा सिर्फ़ आम निवेशक को नहीं, पूरी सोने की सप्लाई चेन को होगा. जौहरी जो थोक में सोना ख़रीदते हैं, रिफ़ाइनर जो सोना शुद्ध करते हैं, बड़े क़ारोबारी और संस्थागत निवेशक सब इससे फ़ायदा उठा सकते हैं. बाज़ार में सोने की क़ीमत पारदर्शी तरीक़े से तय होगी, जो पूरे सेक्टर के लिए अच्छा है.

EGR बनाम गोल्ड ETF: दोनों में सोना है, पर दोनों एक नहीं

यह सवाल ज़रूर आता है. दोनों में सोना है, लेकिन दोनों क्यों अलग हैं? EGR के पीछे असली सोना है, जो वॉल्ट में रखा है और जिसे आप मांग सकते हैं. गोल्ड ETF एक फ़ंड की यूनिट है जो सोने में निवेश करता है, लेकिन आम निवेशक को असली सोना नहीं मिलता. 

गोल्ड ETF पुराना और जाना-पहचाना है, उसका निवेशक आधार बड़ा है. EGR अभी नया है और धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा. दोनों के अपने-अपने फ़ायदे हैं, लेकिन जो असली सोने की गारंटी चाहते हैं उनके लिए EGR बेहतर विकल्प हो सकता है.

एक नज़र में: EGR क्यों है सोने में निवेश का नया तरीक़ा

सोने में निवेश के लिए EGR एक नया और बेहतर रास्ता है. फ़िज़िकल गोल्ड का झंझट नहीं, डिजिटल सुविधा है, क्वालिटी की गारंटी है और ज़रूरत पड़े तो असली सोना भी मिलेगा. यह सिर्फ़ बड़े निवेशकों के लिए नहीं, आम आदमी के लिए भी सोने का दरवाज़ा खोलती है.

वैल्यू रिसर्च की राय

सोना एक अच्छा साधन है लेकिन यह आपके पोर्टफ़ोलियो की धार नहीं बल्कि सुरक्षा कवच है. लंबे समय में इक्विटी ने सोने को पीछे छोड़ा है. वैल्यू रिसर्च की सलाह है कि सोने में निवेश कुल पोर्टफ़ोलियो के 10% तक सीमित रखें. EGR इस 10% को रखने का एक बेहतर और सुविधाजनक तरीक़ा ज़रूर है, लेकिन सोने को पोर्टफ़ोलियो की बुनियाद मत बनाइए.

सही पोर्टफ़ोलियो बनाने के लिए, यानी - गोल्ड, इक्विटी और डेट का सही मेल समझने के लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी मदद करता है.

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यह भी पढ़ें: SGB: नए गोल्ड बॉन्ड में फ़ायदा है या पुराना ख़रीदने में?

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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