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सारांशः अमेरिका-ईरान जंग शुरू होते ही सोना 22 प्रतिशत टूट गया, ठीक उस वक़्त जब निवेशकों को इससे सबसे ज़्यादा उम्मीद थी. तो क्या 'सेफ़ हेवन' का तमग़ा अब भी सही बैठता है?
29 जनवरी 2026 को सोने ने नई ऊंचाई छुई और सिर्फ़ छह महीनों में 79 प्रतिशत रिटर्न दिया. निवेशकों का जोश देखते ही बनता था: उस महीने गोल्ड ETF में इनफ़्लो ₹24,039 करोड़ के साथ अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, यहां तक कि इक्विटी इनफ़्लो को भी पीछे छोड़ दिया.
लेकिन यह खुशी ज़्यादा देर टिकी नहीं. अमेरिका-ईरान जंग छिड़ते ही सोना इक्विटी के साथ-साथ गिरने लगा. 23 मार्च तक यह अपने शिखर से क़रीब 22 प्रतिशत टूट चुका था, और यही बात सबसे ज़्यादा चुभने वाली थी. मार्च के पहले तीन हफ़्तों में निफ़्टी 50 क़रीब 10 प्रतिशत गिरा, जबकि उसी दौरान सोना 14 प्रतिशत नीचे आ गया. जिसे सेफ़ हेवन कहते थे, वो इक्विटी के साथ क़दम-से-क़दम मिलाकर गिर रहा था.
निवेशक भागे. मार्च 2026 में गोल्ड ETF में नेट इनफ़्लो 91 प्रतिशत गिरकर ₹2,265 करोड़ पर आ गई. लेकिन सोने को पूरी तरह खारिज करने से पहले एक ज़रूरी सवाल पूछना चाहिए: क्या इससे पहले भी ऐसा हुआ है, जब सोना और इक्विटी एक साथ गिरे हों?
इतिहास क्या कहता है
हमने 2006 से अब तक के हर उस दौर को खंगाला, जब निफ़्टी 50 TRI अपने शिखर से 15 प्रतिशत या उससे ज़्यादा गिरा. हर दौर में सोने का कुल रिटर्न और उस दौरान सबसे तेज़ गिरावट, दोनों देखे.
इक्विटी गिरावट के दौर में सोने का हाल
ज़्यादातर बार पॉज़िटिव रिटर्न दिया, लेकिन बीच-बीच में गिरावट भी आई
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इक्विटी गिरावट का दौर
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निफ़्टी 50 रिटर्न (%) | उस दौर में सोने का कुल रिटर्न (%) | उस दौर में सोने की सबसे बड़ी गिरावट (%) |
|---|---|---|---|
| मई '06 से जून '06 | -29.7 | -14.9 | -18.3 |
| फ़रवरी '07 से मार्च '07 | -15.2 | -0.2 | -2.9 |
| जनवरी '08 से अक्टूबर '08 | -59.5 | 5.2 | -18 |
| नवंबर '10 से दिसंबर '11 | -27.2 | 13.7 | -11.9 |
| मार्च '15 से फ़रवरी '16 | -21.7 | 9.9 | -11 |
| जनवरी '20 से मार्च '20 | -38.3 | 2.6 | -10.3 |
| अक्टूबर '21 से जून '22 | -16.4 | 8.1 | -6.1 |
| सितंबर '24 से मार्च '25 | -15.4 | 14.1 | -7.7 |
| जनवरी '26 से मार्च '26 | -15.1 | 8.9 | -22.5 |
| 2006 से अब तक के वो दौर जब निफ़्टी 50 TRI अपने शिखर से 15 प्रतिशत या उससे ज़्यादा गिरा. 'सोने की सबसे बड़ी गिरावट' का मतलब है उस दौर के अंदर सोने में आई सबसे तेज़ गिरावट, जो इक्विटी गिरावट की शुरुआत से नापी गई है. | |||
तस्वीर साफ़ है: सोना अक्सर इक्विटी गिरावट के पूरे दौर में पॉज़िटिव रिटर्न देकर निकला है, लेकिन रास्ता कभी सपाट नहीं रहा. 2008 के ग्लोबल फ़ाइनेंशियल क्राइसिस की मिसाल लीजिए. जब निफ़्टी 50 हुआ 60 प्रतिशत धड़ाम, सोने ने पूरे दौर में 5.2 प्रतिशत कमाया, लेकिन बीच में कहीं 18 प्रतिशत तक टूटा भी.
सबक़ यह है कि सोने की भूमिका को एक दिन के हिसाब से नहीं, पूरे गिरावट के दौर में आंकना चाहिए. कोटक म्यूचुअल फ़ंड के देवेंद्र सिंघल कहते हैं, "छोटी अवधि में एसेट्स का कोरिलेशन पॉज़िटिव हो सकता है और सब एक साथ गिर सकते हैं. असल बात यह है कि लंबी अवधि में यह कोरिलेशन कम या कभी-कभी निगेटिव रहता है. यहीं डाइवर्सिफ़िकेशन का फ़ायदा मिलता है."
अगर सोना इक्विटी गिरावट में अमूमन टिका रहता है, तो क्या इसे अल्टिमेट सेफ़ हेवन मान लेना चाहिए?
सोने की सेफ़ हेवन वाली साख: कितनी पक्की?
हमेशा नहीं.
इसे और गहराई से समझने के लिए हमने 2006 से अब तक के वो दौर देखे जब सोना अपने शिखर से 15 प्रतिशत या उससे ज़्यादा गिरा. ऐसे छह मौक़े मिले. हमने देखा कि उन्हीं दौरों में इक्विटी का क्या हाल रहा.
जब सोना लड़खड़ाया, इक्विटी डटी रही
ज़्यादातर मामलों में निफ़्टी 50 स्थिर रहा
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दौर
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सोना (%) | निफ़्टी 50 (%) |
|---|---|---|
| मई '06 से अगस्त '07 | -18.7 | 16.4 |
| मार्च '08 से अगस्त '08 | -18 | 1.6 |
| अक्टूबर '08 से नवंबर '08 | -17.1 | -11.8 |
| अगस्त '11 से अगस्त '15 | -32.6 | 81 |
| अगस्त '20 से मार्च '21 | -20.9 | 31.1 |
| जनवरी '26 से मार्च '26 | -22.5 | -9.6 |
| 2006 से अब तक के वो दौर जब सोना अपने शिखर से 15 प्रतिशत या उससे ज़्यादा गिरा. निफ़्टी 50 के रिटर्न टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) पर आधारित हैं. | ||
दो मामलों को छोड़ दें तो बाकी में जब सोना पिट रहा था, इक्विटी ने शानदार रिटर्न दिया. सबसे साफ़ मिसाल: अगस्त 2011 से अगस्त 2015 के बीच सोना 32.6 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ़्टी 50 ने 81 प्रतिशत का रिटर्न दिया.

पांच साल के रोलिंग रिटर्न में साफ़ दिखता है: गोल्ड और इक्विटी साथ नहीं चलते.
30% सालाना
🟡 गोल्ड 🔵 निफ़्टी 50
जनवरी 2011 अप्रैल 2026
पांच साल के रोलिंग रिटर्न, जनवरी 2011 से अप्रैल 2026 तक के मंथली डेटा के आधार पर लिए गए हैं. निफ़्टी 50 के रिटर्न टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) पर आधारित हैं.
दोनों टेबल मिलकर एक ही कहानी कहते हैं: जब एक एसेट तेज़ी से गिरता है, तो दूसरा पूरे दौर में आमतौर पर टिका रहता है. जनवरी 2011 से अब तक के 5-साल के रोलिंग रिटर्न इसे और साफ़ करते हैं: इक्विटी की तेज़ रफ़्तार के दौर में सोना अक्सर पीछे रहा है, और सोने के अच्छे दौर में इक्विटी कमज़ोर.
आख़िर में
सोने की हालिया गिरावट नाटकीय ज़रूर लगती है, लेकिन अनोखी नहीं है. जो उम्मीद ग़लत है वो यह है कि बाज़ार सुधार के पहले दिन से ही सोना चढ़ने लगे. यह इक्विटी गिरावट के दौरान गिर सकता है, कभी-कभी काफ़ी तेज़ी से. इसे अल्टिमेट सेफ़ हेवन कहना सच से आगे की बात है. इसके अपने लंबे मुश्किल दौर हैं जो कभी-कभी सालों तक चलते हैं.
यह रिश्ता ऊंच-नीच का नहीं, बराबरी का है. जब इक्विटी दबाव में थी, सोने ने पोर्टफ़ोलियो को संभाला. जब सोना संघर्ष में था, इक्विटी ने वही एहसान चुकाया. सोना संतुलित मात्रा में रखें, पोर्टफ़ोलियो का 10 से 20 प्रतिशत एक सही दायरा है. उम्मीदें ज़मीन पर रखें और गिरावट में घबराकर बेचने या तेज़ी के बाद ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीदने से बचें.
यह वीडिओ देखें: Gold में 20% गिरावट, क्या निवेश का बड़ा मौक़ा है?
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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