फ़र्स्ट पेज

AI क्रांति जो वाक़ई काम की है

AI पर लगाए जा रहे खरबों रुपयों को भूल जाइए. असली क्रांति वह है जिसे आप अभी, मुफ़्त में, ख़ुद शुरू कर सकते हैं.

AI पर लगाए जा रहे खरबों रुपयों को भूल जाइए. असली क्रांति वह है जिसे आप अभी, मुफ़्त में, ख़ुद शुरू कर सकते हैं.Anand Kumar/AI-Generated Image

back back back
4:48

हर सुबह, एक भी अख़बार खोलने से पहले, मैं एक ऐसा बुलेटिन पढ़ता हूं जिसे न किसी संपादक ने तैयार कराया है और न जो कभी कहीं छपेगा. यह एक निजी निवेश बुलेटिन है जिसे मैंने ख़ुद एक AI टूल में बनाया है. मैंने हफ़्तों की मेहनत से उसे बताया कि क्या देखना है, क्या नज़रअंदाज़ करना है और मुझसे कैसे बात करनी है. सिर्फ़ एक पाठक के लिए तैयार यह बुलेटिन उससे कहीं ज़्यादा गहरा और उपयोगी साबित होता है, जो बिज़नेस प्रेस लाखों लोगों के लिए करती है. यह उन ख़बरों को कवर करता है जिन तक प्रेस हफ़्ते भर बाद पहुंचेगी, और दो पैराग्राफ़ में बता देता है कि सुबह की फ़ाइलिंग का उन पोर्टफ़ोलियो के लिए असल में क्या मतलब है जिनकी मुझे परवाह है.

मैं मान लेता हूं कि मैं कोई कोडिंग का शौक़ीन युवा नहीं हूं और यह टूल बनाने में मुझे जो मज़ा आया वो इसकी उपयोगिता से अलग है. अगर मेरी उम्र का कोई पाठक एक मशीन को अपने लिए हर सुबह बाज़ार पढ़ना सिखा सकता है, तो शायद आप भी अपना कुछ बनाने के बारे में सोचें.

मैं एक शौक़ से शुरू करता हूं क्योंकि AI की जो कहानी हमारी ज़िंदगी को सच में छूती है वह यही है. और यही लगभग एकमात्र हिस्सा है जिस पर कोई बहस नहीं है.

बहस पूरी तरह पैसे पर और उस पैमाने पर है, जिसे समझना मुश्किल है. इसी हफ़्ते Alphabet ने, जो अब तक बनी सबसे भरोसेमंद कैश मशीनों में से एक है, $80 अरब की नई इक्विटी जुटाने का ऐलान किया. एक ऐसी कंपनी जिसने पिछले साल $174 अरब का ऑपरेटिंग कैश जनरेट किया, अब रफ़्तार बनाए रखने के लिए अपने शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम कर रही है. इस प्लेसमेंट का एक हिस्सा Berkshire Hathaway के पास गया, जिसकी Google होल्डिंग अब Apple होल्डिंग से आगे निकल चुकी है.

कुछ लोग इसे आने वाले सुनहरे दौर का संकेत मानते हैं, जबकि कुछ इसे बाज़ार में बुलबुले का साफ़ संकेत बताते हैं. अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किसकी बात मानते हैं.

IBM के CEO अरविंद कृष्णा ने यह हिसाब लगाया है. उसके मुताबिक़, AI डेटा सेंटर पर जो रक़म लगाई जा रही है वो खरबों में है; हार्डवेयर कुछ सालों में पुराना पड़ जाता है और बदलना पड़ता है; और इस ख़र्च की भरपाई के लिए जो मुनाफ़ा चाहिए वो पूरी इंडस्ट्री की कमाई से ज़्यादा है. लेकिन वो याद दिलाते हैं कि 1990 के दशक के आखिर में फ़ाइबर-ऑप्टिक केबल की ज़रूरत से ज़्यादा बिछाने से वो कंपनियां बर्बाद हो गईं जिन्होंने इसे बिछाया था. जबकि बाद में उसी नेटवर्क पर अपना ट्रैफ़िक चलाने वाली Amazon और Netflix जैसी कंपनियां मालामाल हो गईं. बनाने वाले हार गए. जो उनके छोड़े हुए पर चले, वो जीते.

उतने ही यकीन के साथ एक दूसरा खेमा उल्टी बात कहता है. वो कहते हैं कि सस्ते और काफ़ी अच्छे AI मॉडल, जिन्हें ग्राहक अपने परिसर पर चला सकें, नीचे से महंगे और अत्याधुनिक मॉडलों को खा जाएंगे. जो दिग्गज अभी $80 अरब लगा रहे हैं, वो ऐसी सड़कें बना रहे हैं जिन पर जल्द ही दूसरे उन्हें पीछे छोड़ देंगे.

मुझे नहीं पता कौन सा खेमा सही है. और मुझे लगता है कि शायद उन्हें भी नहीं पता. मुझे बस यह दिखता है कि दोनों तरफ़ किसी को अपने ऊपर शक नहीं है. जब DeepSeek ने पिछले साल की शुरुआत में एक ही सत्र में NVIDIA की मार्केट वैल्यू से 16 प्रतिशत उड़ा दिए, तो बाज़ार ने पल भर के लिए मान लिया कि AI बूम खत्म हो गया. लेकिन वो मूड उस घबराहट से ज़्यादा नहीं टिका जिसने उसे जन्म दिया था.

मासिक SIP वाले और दशकों के नज़रिए वाले एक आम भारतीय निवेशक के लिए सबक़ यह नहीं है कि छोटे AI पर बड़े AI के मुक़ाबले दांव लगाएं, न यह कि जो सबसे ज़्यादा ख़र्च कर रहा है उसमें पैसा लगाएं, और न यह कि किसी पॉडकास्ट पर किसी ने IT सेक्टर को बर्बाद घोषित कर दिया तो अपने IT शेयर बेच डालें. हमें नहीं पता कौन जीतेगा. और जो $80 अरब के जवाब पर दांव लगा रहे हैं, उन्हें भी नहीं पता.

इस क्रांति का जो हिस्सा मेरे हाथ में है, वह इसका इस्तेमाल है. मैं चाहता हूं कि आप अपनी ऊर्जा वहां लगाएं. पोर्टफ़ोलियो पर नहीं, वो पहले की तरह उबाऊ और डाइवर्सिफ़ाइड रहे, बल्कि टूल पर ध्यान दें. ये टूल मुफ़्त या लगभग मुफ़्त हैं और हफ़्ते-दर-हफ़्ते बेहतर होते जा रहे हैं.

छोटी समस्याओं से शुरू करें. एक टूल एक मिनट में फ़ंड फ़ैक्टशीट का सारांश दे सकता है, SEBI के जटिल डिस्क्लोज़र को आम भाषा में समझा सकता है, या वो सवाल तैयार कर सकता है जो आप किसी रजिस्टर्ड एडवाइज़र से पूछना चाहते हैं. ये टूल आपको चौंकाएंगे और यह जानना अपने आप में एक छोटी खुशी की बात है कि ये क्या कर सकते हैं.

जिस क्रांति की सच में जरूरत है, वह सिलिकन वैली की स्प्रेडशीट्स में चल रही बहस वाली क्रांति नहीं है.

वो छोटी, निजी और सच में उपयोग में आने वाली क्रांति है जिसे आप किसी भी उम्र में अपने लिए रच सकते हैं.

यह भी पढ़ेंः SEBI का नया नियम ग़लत लोगों की मदद करता है

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

वो घरेलू म्यूचुअल फ़ंड जो विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Manipal Hospitals IPO: साइज़ में सबसे बड़ी, पर रिटर्न में पीछे

पढ़ने का समय 9 मिनटLekisha Katyal

HUL एक बेहतरीन बिज़नेस तो है, लेकिन क्या यह एक बेहतरीन स्टॉक भी है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

HDFC Bank vs ICICI Bank: 10 साल में कैसे बदली लीडरशिप?

पढ़ने का समय 4 मिनटअभिनव गोयल

Zepto का IPO टला, आपके म्यूचुअल फ़ंड ने आपके लिए किया यह काम

पढ़ने का समय 9 मिनटविकास वर्धन

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

ज़्यादातर दिखावा, कभी-कभार टैक्स

नए टैक्स रिज़ीम ने मार्च में टैक्स बचाने की पुरानी भागदौड़ ख़त्म कर दी; लेकिन इसके पीछे की सोच बस अब ज़्यादा वेल्थ वाले लोगों के बीच पहुंच गई है

अन्य एपिसोड

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी