Anand Kumar
सारांशः कोई भी किसी अच्छी कंपनी को एक बार के सब्र के साथ 20 साल तक होल्ड नहीं करता. वो ख़ूबसूरत लंबे समय वाला चार्ट, जिसे आप पीछे मुड़कर सराहते हैं, जब वो जिया जा रहा था, तब कहीं कम चमकदार था. यह एक सोच है कि लंबा समय असल में बनता किन चीज़ों से है, और उसके पीछे की मेहनत करता कौन है.
2006 में हमने Wealth Insight की शुरुआत बड़े सीधे-से नज़रिये के साथ की थी: बिज़नेस को समझाना, पाठकों को अच्छे बिज़नेस की ओर ले जाना, ख़राब बिज़नेस से दूर रखना, महीने दर महीने, जब तक कि एक मालिक की तरह सोचना उनकी आदत न बन जाए. पहले ही एडीशन से हमने शेयर रेकमेंड किए. छपी हुई एक "buy" की रेकमेंडेशन, बहुत से पाठकों के लिए, सबसे भरोसेमंद राय हुआ करती थी.
लेकिन एक बात मुझे तब भी अंदर तक खटकती थी, कि छपा हुआ पन्ना, स्याही सूखते ही, कितना बेबस हो जाता है.
छपी हुई रेकमेंडेशन एक तस्वीर की तरह होती है, जो कंपनी की स्थिति दिखाती है. लेकिन कंपनी कोई तस्वीर नहीं होती. वो तो सांस लेती है, चलती रहती है, बढ़ती रहती है. वो नतीजे देती है, क़र्ज़ उठाती है, उसका नेतृत्व बदलता है, कभी वो अपनी राह भटक जाती है तो कभी फिर से सही रास्ते पर आ जाती है. पन्ना आपको ख़रीदने की सलाह तो दे सकता था. पर वो छह महीने बाद लौटकर यह नहीं कह सकता था कि अब बेच देना ही समझदारी है.
यही वो कमी थी जो मुझे चैन से बैठने नहीं देती थी, और यहीं से स्टॉक एडवाइज़र का जन्म हुआ. 2017 में जब हमने इसे शुरू किया, तो लोगों को यह एक नया प्रोडक्ट लगा. पर सच कहूं तो यह नया था नहीं. हम एक दशक से भी ज़्यादा की मेहनत के साथ शेयरों को रेकमेंड कर रहे थे. पर जो चीज़ हम आख़िरकार दे पाए, वो वही थी जो छपाई हमें कभी नहीं दे सकी: निरंतरता यानी एक ऐसा साथ, जो कभी नहीं छूटता.
समीर अरोड़ा ने एक बार बड़े पते की बात कही थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी शेयर को 20 साल तक होल्ड नहीं किया, बल्कि उसे 80 तिमाहियों तक रखा. इस एक बात में वो सच छिपा है जो ज़्यादातर निवेशक कभी समझ ही नहीं पाते. कोई भी किसी अच्छी कंपनी को दो दशक तक किसी एक बड़े साहसी फ़ैसले के दम पर नहीं रखता. वो तो 80 बार, हर बार नए सिरे से तय करता है कि उसे अभी और रखना है. और साथ ही वो हर उस पल दूसरा फ़ैसला लेने को भी तैयार रहता है, जिस पल कहानी बिखरती दिखे.
मैं यही कहना चाहता हूं. लंबा समय कई छोटे-छोटे पलों से मिलकर बनता है. वो ख़ूबसूरत 20 साल वाला चार्ट, जिसे आप पीछे मुड़कर सराहते हैं, जब वो जिया जा रहा था, तब वो टिके रहने या छूट जाने के कई फीके, बेरंग फ़ैसलों की एक लंबी कड़ी थी. मुश्किल हिस्सा सब्र रखना नहीं था. मुश्किल तो उसके पीछे छिपी वो 80 बार की चौकसी थी.
आप कहेंगे कि मैं तो सालों से इन्हीं पन्नों पर आपसे कहता आ रहा हूं कि लंबे समय का नज़रिया रखिए और छोटे समय को भूल जाइए. शोर से दूर रहिए, उतार-चढ़ाव को सह जाइए, अपनी अच्छी कंपनियों को चुपचाप बढ़ने दीजिए. मैं आज भी अपने एक-एक शब्द पर क़ायम हूं. ये दोनों बातें एक-दूसरे के उलट लगती हैं. वो 80 फ़ैसले सच हैं, पर ज़रूरी नहीं कि वो आपके हों. किसी न किसी को छोटे समय का ध्यान रखना पड़ता है, ताकि आप लंबे समय का मज़ा ले सकें. एक लाइन में कहूं, तो यही काम वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र करता है.
यहीं हमारे तीन तैयार पोर्टफ़ोलियो काम आते हैं. 'लॉन्ग-टर्म ग्रोथ' उन कंपनियों के लिए जो लंबे समय तक टिककर बढ़ती हैं. 'एग्रेसिव ग्रोथ' उन कारोबारों के लिए जिनमें दम ज़्यादा है, पर सफ़र थोड़ा ऊबड़-खाबड़ रहता है. और 'डिविडेंड ग्रोथ' उन कंपनियों के लिए जो कैश कमाती हैं और इंतज़ार के दौरान भी आपको पैसा देती रहती हैं. आप बस वो चुनिए जो आपके लक्ष्य से मेल खाए, और नियम से निवेश करते रहिए.
और उसके बाद जो होता है, वो कोई मैगज़ीन कभी नहीं दे सकती थी. हर महीने हमारी रिसर्च टीम हर पोर्टफ़ोलियो को, एक-एक कंपनी करके, बारीकी से जांचती है. और हम शुरुआत ही इस नीयत से करते हैं कि कंपनियों को बाहर निकालें, न कि उन्हें बनाए रखने के बहाने खोजें. जो भी हमारी गवर्नेंस, क़र्ज़ या कारोबार की क्वालिटी की हमारी कसौटी पर खरी नहीं उतरती, उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, चाहे वो बाज़ार में कितनी ही चर्चा में क्यों न हो. और जब कोई शेयर अपनी जगह के लायक़ नहीं रह जाता, तो हम आपको साफ़-साफ़ बताते हैं कि उसे क्यों बेच देना चाहिए.
मुझे तो यह उस चीज़ के लिए बेहद सस्ती लगती है, जो असल में एक पूरी रिसर्च डेस्क है, जो दिन-रात आपके पोर्टफ़ोलियो पर नज़र रखती है. पर ज़ाहिर है, मैं तो ऐसा कहूंगा ही, इसलिए फ़ैसला आप ख़ुद कीजिए.
Wealth Insight के 20 साल. 240 महीने, वही गिने-चुने काम, पूरी लगन से बार-बार करते हुए. मैगज़ीन उस एक पल को क़ैद कर सकती थी. पर स्टॉक एडवाइज़र तो उन पलों के बीच की कड़ी बनने के लिए बना था, जो कभी टूटती नहीं. और यही वो कड़ी है जो छोटे-छोटे पलों की एक लंबी लिस्ट को एक लंबे, फ़ायदेमंद सफ़र में बदल देती है.
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