इंश्योरेंस

आमदनी का 10 गुना लाइफ़ कवर, क्या सही है यह फ़ॉर्मूला?

लाइफ़ कवर का चर्चित मल्टीपल फ़ॉर्मूला सिर्फ़ पीक को देखकर बना है, उसके आगे का उसे कुछ नहीं दिखता

लाइफ़ कवर का चर्चित मल्टीपल फ़ॉर्मूला सिर्फ़ पीक को देखकर बना है, उसके आगे का उसे कुछ नहीं दिखताUjjal Das/AI-Generated Image

सारांशः लाइफ़ इंश्योरेंस के लिए आमदनी का 10 गुना वाला नियम याद रखने में आसान है, लेकिन यह आपकी ज़िंदगी के बस कुछ ही सालों के लिए सही है. असल में जितने कवर की ज़रूरत होती है, वो तब सबसे ज़्यादा होती है जब क़र्ज़ सबसे ऊपर हो और बचत सबसे नीचे. और 55 साल की उम्र के आसपास आप काफ़ी हद तक अपने इंश्योरर ख़ुद ही बन जाते हैं.

आमदनी के 10 गुना या 15 गुना के हिसाब से लाइफ़ इंश्योरेंस ख़रीदना याद रखने में आसान है, बेचने में भी आसान, लेकिन यह आपकी ज़िंदगी के बस कुछ ही सालों के लिए सही बैठता है.

ज़रूरी कवर कभी एक जैसा नहीं रहता. 30 के दशक में यह बढ़ता है, जब क़र्ज़ सबसे ज़्यादा और बचत सबसे कम होती है तब पीक पर होता है, फिर जैसे-जैसे लोन घटता है और कॉर्पस बनता है, यह कम होने लगता है. 55-60 की उम्र तक, जब लोन चुक जाता है और बचत बढ़ जाती है, आप काफ़ी हद तक अपने इंश्योरर ख़ुद ही बन जाते हैं. जब सबसे ज़्यादा दांव पर हो, तब सबसे ज़्यादा कवर लें और जब ज़रूरत ख़त्म हो, तब कवर भी ख़त्म करें.

ज़रूरी कवर घटता-बढ़ता रहता है

एक परिवार का उदाहरण लेते हैं: 35 साल का अकेला कमाने वाला, ₹18 लाख सालाना आमदनी, दो छोटे बच्चे और 50 लाख का होम लोन.

इसी परिवार को 35 साल की उम्र में क़रीब ₹2.3 करोड़ के कवर की ज़रूरत है और 55 की उम्र तक आते-आते लगभग कुछ नहीं. फ्लैट 10 गुना के नियम से पूरे वक़्त सिर्फ़ 1.8 करोड़ का आंकड़ा सही रहता है.

उम्र बचा होम लोन तैयार कॉर्पस ज़रूरी कवर फ्लैट 10x नियम
35 ₹50 लाख ₹12 लाख क़रीब ₹2.3 करोड़ ₹1.8 करोड़
45 ₹36 लाख क़रीब ₹65 लाख क़रीब ₹85 लाख ₹1.8 करोड़
55 कुछ नहीं क़रीब ₹2 करोड़ लगभग कुछ नहीं ₹1.8 करोड़
अनुमानित. हर उम्र में कवर वो रक़म है जिसे अभी भी आमदनी की जगह लेनी है, साथ में बचा हुआ लोन और पढ़ाई का ख़र्च, घटाव में वो कॉर्पस जो बन चुका है. माना गया है: 9% पर 20 साल का लोन और क़रीब 2.5 लाख रुपये सालाना बचत जो 9% पर निवेश की जा रही है. आज के रुपयों में.
यह एक उदाहरण है. हर उम्र में कवर का मतलब है - वह इनकम जिसकी भरपाई अभी होनी है, साथ ही बकाया लोन और पढ़ाई का ख़र्च, जिसमें से पहले से जमा की गई रकम (कॉर्पस) को घटा दिया जाता है. इसमें 9% ब्याज दर पर 20 साल के लोन और 9% रिटर्न वाली स्कीम में हर साल लगभग ₹2.5 लाख की बचत को आधार माना गया है. ये आंकड़े आज की क़ीमतों के हिसाब से हैं.

यह मल्टीपल पीक से उतरते वक़्त, यानी 30 के अंत में सही नंबर पर बस एक बार पहुंचता है. पीक पर यह कम पड़ जाता है, यहां क़रीब ₹50 लाख कम. यह ख़रीदते वक़्त सही लगता है क्योंकि यह सही दायरे में होता है. 10 साल बाद, यह परिवार की ज़रूरत से क़रीब दोगुना बीमा करता है. 55 साल के आसपास, यह उस नुक़सान को कवर करता है जो अब हो ही नहीं सकता. यह एक स्नैपशॉट है जिसे नियम समझ लिया गया है. आप उम्र के किस पड़ाव पर हैं, इस हिसाब से अपना कवर तय करें और जब भी कुछ बड़ा बदलाव हो तो दोबारा जांचें. इन बदलावों में नया लोन, एक और बच्चा होना, लोन का चुकाया जाना शामिल है.

कितना कवर लें: गैप के हिसाब से तय करें

एक बार हिसाब लगा लें. देखें कि अगर आपकी आमदनी बंद हो जाए तो परिवार को क्या चाहिए होगा, जो क़र्ज़ चुकाना होगा और आगे के बड़े ख़र्च जैसे बच्चों की पढ़ाई. इसमें से घटाएं: अपनी बचत और कंपनी से मिला कोई कवर. जो बचे, वही ख़रीदना है. हमारे 35 साल के उदाहरण के लिए यह क़रीब ₹2.3 करोड़ है. 1 करोड़ का नंबर उन्हें आधे से भी कम कवर देगा.

कंपनी के कवर को हल्के में लें, या बिल्कुल न गिनें: नौकरी छोड़ते ही यह ग़ायब हो जाता है.

क़ीमत राहत देती है और अभी और बेहतर हुई है. 22 सितंबर 2025 से इंडिविजुअल लाइफ़ प्रीमियम पर GST नहीं लगता. एक स्वस्थ 35 साल के नॉन-स्मोकर के लिए 60 साल तक के ₹1 करोड़ का प्योर टर्म प्लान बड़ी बीमा कंपनियों में क़रीब ₹11,000 से ₹13,000 सालाना पड़ता है, यानी क़रीब ₹1,000 महीना. कवर करोड़ के हिसाब से सस्ता पड़ता है: 2 करोड़ करने पर प्रीमियम दोगुना नहीं, बल्कि 66 से 80 प्रतिशत हिस्सा ही बढ़ता है. दूसरा करोड़ सबसे सस्ता पड़ता है, इसलिए महीने के कुछ सौ रुपये बचाने के लिए कम कवर न लें.

कवर और टर्म सालाना प्रीमियम
30 साल की उम्र में ख़रीदा, 60 साल तक ₹1 करोड़ क़रीब ₹9,000 से ₹11,000
35 साल की उम्र में ख़रीदा, 60 साल तक ₹1 करोड़ क़रीब ₹11,000 से ₹13,000
40 साल की उम्र में ख़रीदा, 60 साल तक ₹1 करोड़ क़रीब ₹15,000 से ₹19,000
35 साल की उम्र में ख़रीदा, 60 साल तक ₹2 करोड़ क़रीब ₹18,000 से ₹24,000
35 साल की उम्र में ख़रीदा, 75 साल तक ₹1 करोड़ क़रीब ₹17,000 से ₹20,000
स्वस्थ पुरुष नॉन-स्मोकर के लिए तीन बड़ी प्राइवेट बीमा कंपनियों के जून 2026 के अनुमानित ऑनलाइन प्योर-टर्म कोट्स. 22 सितंबर 2025 से GST-फ़्री. आपका कोट सेहत, शहर और बीमा कंपनी के हिसाब से अलग हो सकता है.

कब तक: जब तक ज़रूरत हो

जब तक कोई आपकी आमदनी पर निर्भर हो, तब तक ख़ुद को कवर रखें, आमतौर पर 58 या 60 साल तक. तब तक लोन चुक जाता है, बच्चे कमाने लगते हैं और कॉर्पस सैलरी की जगह ले लेता है. बीमा कंपनियां 75 या 85 साल तक का कवर देंगी; ज़्यादातर ख़रीदारों के लिए इससे बचना ही ठीक है. 60 से 75 साल तक कवर बढ़ाने पर प्रीमियम क़रीब आधा और बढ़ जाता है, उन सालों के लिए जब आप पहले से ख़ुद के इंश्योरर हैं.

और बेहतर तरीक़ा है लेयर्स में ख़रीदना. एक 1 करोड़ की पॉलिसी 60 साल तक रखें और दूसरी क़रीब 50 साल पर ख़त्म होने वाली, जब लोन चुक जाए. ख़तरनाक दशक में 2 करोड़ का कवर रहेगा, उसके बाद 1 करोड़ और दूसरे करोड़ की ज़रूरत ख़त्म होते ही उसका प्रीमियम देना बंद. 50 साल पर ख़त्म होने वाली पॉलिसी 60 साल तक के कवर से सस्ती पड़ती है, तो लाइफ़टाइम प्रीमियम भी कवर के साथ घटता जाता है.

एक अपवाद: अगर कोई उम्रभर आप पर निर्भर रहेगा, जैसे कोई दिव्यांग बच्चा, तो आपका कवर उतने समय तक चलना चाहिए जितने समय तक आप इसे फ़ंड कर सकें.

जल्दी ख़रीदें, प्योर बीमा लें 

उम्र सिर्फ़ क़ीमत बढ़ाती है. जो 1 करोड़ का कवर 30 साल की उम्र में ₹9,000 से ₹11,000 सालाना पड़ता है, वही 40 साल में ₹15,000 से ₹19,000 सालाना हो जाता है और कवर के साल भी कम होते हैं. एक दशक इंतज़ार करने पर प्रीमियम में फिर से उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी हो जाती है.

वहीं, बीमे को निवेश से अलग रखें. प्योर टर्म प्लान ख़रीदें, कुछ भी नहीं जो पैसा वापस करे. डेथ बेनेफ़िट टैक्स-फ़्री होता है और डेथ पेआउट पर यह छूट चाहे जितना भी प्रीमियम भरा हो, तब भी लागू रहती है; यह क़ानून में एक छूट है, डिडक्शन नहीं, इसलिए नए टैक्स रिज़ीम में भी यह बनी रहती है. टर्म ख़रीदने के लिए टैक्स का कोई बहाना नहीं चाहिए. सुरक्षा ही मक़सद है.

कवर को कर्व के हिसाब से तय करें, ज़रूरत ख़त्म होने पर टर्म भी ख़त्म करें और आपका बीमा अपना एकमात्र काम करता रहेगा. दूसरा काम, वो कॉर्पस बनाना जो एक दिन कवर की ज़रूरत ही ख़त्म कर दे, आपके निवेश का है.

इस स्टोरी के दूसरे हिस्से में मदद के लिए Value Research Online पढ़ते रहें.

यह भी पढ़ेंः लाइफ़ इंश्योरेंस राइडर्स जो आपके लिए ज़रूरी हैं!

ये लेख पहली बार जून 25, 2026 को पब्लिश हुआ.

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