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सारांशः RBI ने बैंकों द्वारा आपको वित्तीय उत्पाद बेचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 11 ख़ास तरीक़ों पर रोक लगा दी है. हर रोक को एक कबूलनामे की तरह पढ़ें, तो आम तौर पर होने वाली इन हरकतों की तस्वीर एकदम साफ़ और परेशान करने वाली लगने लगेगी.
कोई रेगुलेटर किसी चीज़ पर रोक तभी लगाता है, जब वह पहले से बड़े पैमाने पर हो रही हो. इसलिए जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अपने आधिकारिक निर्देश में "Confirm Shaming" जैसा शब्द इस्तेमाल करता है, तो समझ लीजिए कि यह चाल आम हो चुकी है.
इस हफ्ते RBI ने बैंकों के लिए वित्तीय उत्पादों के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री के तरीक़ों को लेकर नए नियम जारी किए हैं. नियमों के साथ एक लिस्ट भी दी गई है, जिसमें ग्राहकों को फंसाने के 11 तरीकों का ज़िक्र है. जैसे-ऐसा काउंटडाउन टाइमर जो सिर्फ़ आपको जल्दबाज़ी में फैसला लेने के लिए लगाया जाता है ताकि आप दूसरे विकल्प न देख सकें; ऐसा टिक बॉक्स जो आपके पेज खोलने से पहले ही चुना हुआ हो; या फिर कैंसिल करने का विकल्प इतना छिपा दिया जाए कि बाहर निकलना, अंदर आने से भी ज़्यादा मुश्किल हो जाए.
इन तरीकों को डार्क पैटर्न कहा जाता है. यह शब्द वेबसाइट डिज़ाइनरों ने उन डिज़ाइनों और शब्दों के लिए बनाया था, जिन्हें लोगों की मदद करने के बजाय उन्हें प्रभावित या गुमराह करने के लिए तैयार किया जाता है. इन्हें "डार्क" इसलिए कहा जाता है, क्योंकि धोखा डिज़ाइन के अंदर ही छिपा होता है. नतीजा यह होता है कि ग्राहक के सामने सबसे आसान रास्ता वही दिखता है, जिससे बेचने वाले को फायदा हो. और यह चाल समझदार और लापरवाह-दोनों तरह के लोगों पर काम कर जाती है.
लेकिन असली बात यह नहीं है. RBI के दस्तावेज़ में इन 11 चालों की लिस्ट सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं है.
असल दस्तावेज़ को दूसरी नज़र से पढ़ने की ज़रूरत है. इस बार हर रोक को एक कबूलनामे की तरह पढ़िए. हर नियम इस बात का संकेत है कि जिस गड़बड़ी पर रोक लगाई जा रही है, वह पहले से हो रही थी. अगर आप दस्तावेज़ को इस नज़र से पढ़ेंगे, तो पूरी तस्वीर साफ़ हो जाएगी.
RBI ने बैंकों के कर्मचारियों के लिए यह नियम बनाया है कि वे जिन बाहरी कंपनियों के उत्पाद बेचते हैं, उनसे कोई इंसेंटिव नहीं ले सकते. ऐसा नियम तभी बनाया जाता है, जब यह पहले से हो रहा हो. RBI ने एक उत्पाद के साथ दूसरा उत्पाद ज़बरदस्ती बेचने पर भी रोक लगाई है. यानी वह बीमा, जिसे आप मना नहीं कर पाए; या वह पॉलिसी, जिसे चुपचाप आपके लोन के साथ जोड़ दिया गया-यह सब शायद आम बात बन चुकी थी. RBI ने यह भी कहा है कि बैंक आपकी अनुमति के बिना, आपके नाम पर मंजूर किए गए लोन से कोई वित्तीय उत्पाद नहीं खरीद सकता. सबसे अहम बात यह है कि अब बैंक को किसी भी उत्पाद को बेचने से पहले यह जांचना होगा कि वह ग्राहक के लिए उपयुक्त है या नहीं. इसका सीधा मतलब है कि अब तक यह ज़िम्मेदारी कोई निभा ही नहीं रहा था.
इतना ही नहीं, RBI ने ग़लत तरीके से बेचे गए उत्पादों के मामलों में ग्राहकों को पैसा वापस करने और मुआवजा देने की व्यवस्था भी बनाने को कहा है. किसी बीमारी के लिए स्थायी इलाज तभी बनाया जाता है, जब वह बीमारी बार-बार सामने आती हो.
इन सभी बातों को एक साथ रखकर देखिए. जिस संस्था पर आपने अपनी बचत का भरोसा किया, वह कहीं न कहीं कमीशन के आधार पर चलने वाली दुकान की तरह काम कर रही थी. कर्मचारियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था कि वे वही उत्पाद बेचें जिससे उन्हें ज़्यादा कमीशन मिले, न कि वह जो ग्राहक के लिए बेहतर हो.
मैं बीमा कारोबार के बारे में वर्षों से यही बात कहता आया हूं. सुरक्षा के नाम पर एंडोमेंट प्लान बेचना या ऐसे लोगों को यूनिट-लिंक्ड पॉलिसी (ULIP) बेचना जिनके लिए वह उपयुक्त नहीं थी-इन सबसे ग्राहक का नहीं, बल्कि बेचने वाले का फायदा हुआ.
RBI ने अब साफ़ कर दिया है कि बैंक भी इससे अलग नहीं हैं.
लेकिन, इन नए नियमों को समस्या का अंतिम समाधान मत समझिए. हम पहले भी ऐसा देख चुके हैं. इंश्योरेंस रेगुलेटर और मार्केट रेगुलेटर भी ग़लत तरीक़े से उत्पाद बेचने पर कई बार सख्त निर्देश जारी कर चुके हैं. फिर भी यह चलन लगभग पहले जैसा ही बना रहा. नियम बदलने में समय लगता है, लेकिन कमीशन का लालच नहीं बदलता. यही पूरी व्यवस्था को चलाने वाला इंजन है और वह आसानी से बंद नहीं होगा.
इसलिए, इस दस्तावेज़ को अपने लिए एक मार्गदर्शिका की तरह पढ़िए. हर नए नियम को किसी पुरानी गड़बड़ी का कबूलनामा मानिए. ऐसा करेंगे तो अगली बार जब किसी मुस्कुराते हुए रिलेशनशिप मैनेजर के सामने बैठेंगे, तब आपको पहले से अंदाज़ा होगा कि किन बातों से सावधान रहना है.
गलत उत्पाद ख़रीदने से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा वही है जो हमेशा से था-जिस चीज़ की आपने मांग ही नहीं की, उसे ख़रीदने की जल्दी न करें. और, जो भी उत्पाद बिना पूछे आपको बेचा जा रहा हो, उसे हमेशा संदेह की नज़र से देखें.
RBI ने आपको बैंकों की अपनाई जाने वाली चालों की आधिकारिक लिस्ट दे दी है. अब उनसे बचना आपकी ज़िम्मेदारी है.
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