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आप भी तो नहीं फंस गए बीमा जाल में ?

जीवन बीमा एक व्‍यवस्‍था है जिसके तहत बीमा कंपनी एक तय प्रीमियम के बदले बीमाधरक की मौत होने पर परिजनों को मुआवजा देगी।

आप भी तो नहीं फंस गए बीमा जाल में ?

जब काई युवा कमाना शुरू करता है तो उसे सबसे पहले बीमा कवर खरीदना चाहिए। सही तरीके से बीमा खरीदने के लिए यह जानना जरूरी है कि बीमा क्‍या है और आपकी रकम का बीमा कवर लेना चाहिए।

क्‍या हे बीमा
पहले हम बात करते हैं बीमा की परिभाषा की। बीमा की परिभाषा कहती है कि बीमा एक व्‍यवस्‍था है जिसके तहत बीमा कंपनी या राज्‍य एक तय प्रीमियम के बदले में किसी नुकसान, बीमारी या मौत के लिए मुआवजे की गारंटी देता है। जीवन बीमा के लिए इस परिभाषा को और सरल किया जा सकता है। जीवन बीमा एक व्‍यवस्‍था है जिसके तहत बीमा कंपनी एक तय प्रीमियम के बदले बीमाधरक की मौत होने पर परिजनों को मुआवजा देगी। बीमा की यही अकेली परिभाषा है। अगर कोई बीमा उत्‍पाद या सेवा इस परिभाषा में नहीं फिट होती है तो यह बीमा नहीं है, भले ही इसे कोई बीमा कंपनी बेच रही हो। आपको ध्‍यान रखना चाहिए बीमा एजेंट जो उत्‍पाद बेच रहे हैं उनमे से ज्‍यादातर उत्‍पाद बीमा नहीं हैं।

कितना हो बीमा कवर
आपको कितनी रकम का बीमा कवर लेना चाहिए। इस सवाल का जवाब देने के कई तरीके हैं। लेकिन आपको अपनी 10 साल की आय के बराबर रकम का बीमा कवर लेना चाहिए। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि परिवार के दूसरे सदस्‍यों की आय कितनी है। परिवार के पास कितनी संपत्ति या घर है। लेकिन किसी व्‍यक्ति की 10 साल की आय से कम रकम का बीमा कवर पर्याप्‍त नहीं होगा। अगर आपको मेरी बात पर विश्‍वास नहीं हो रहा है तो आपको एक आंकलन कर लेना चाहिए कि अगर आपकी मौत हो जाती है तो परिवार का बजट क्‍या होना चाहिए। मेरा मानना है कि अगर आप पहले से अमीर नहीं है तो यह रकम मुश्किल से पर्याप्‍त होगी।

क्‍या आपकी जरूरतों को पूरा करता है बीमा कवर

ऐसे में सबसे अहम सवाल है कि क्‍या आपका बीमा कवर पर्याप्‍त है ? इसका जवाब है नहीं। मैं यह बात इतने विश्‍वास से कैसे कह सकता हूं ? मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्‍योंकि ज्‍यादातर भारतीयों के लिए यह सही जवाब है। मैं यह बात आंकड़ों के आधार पर कह रहा हूं। मैं अपने अनुभव से बता रहा हूं कि ज्‍यादातर लोग यह बात तो जानते हैं कि वे बीमा कंपनियों को हर साल कितना प्रीमियम दे रहे हैं लेकिन वे यह नहीं जानते हैं कि अगर अचानक उनकी मौत हो जाए तो उनके परिवार को क्‍या मिलेगा। यह अजीब इसलिए नहीं लगता है क्‍योंकि बीमा बिजनेस में सफलता इस बात से नहीं आंकी जाती है कि कंपनी ने ग्राहक को कितना बीमा कवर मुहैया कराया है बल्कि कंपनी की सफलता इस बात से आंकी जाती है कि ग्राहक ने उसको कितना पैसा दिया है। इसका नतीजा यह है कि बीमा कंपनियां ज्‍यादातर ऐसे उत्‍पाद बेच रहीं हैं जो बीमा उत्‍पाद नहीं हैं बल्कि ये महंगे निवेश उत्‍पाद हैं। इन उत्‍पादों में एक छोटा हिस्‍सा बीमा का होता है।
आपके साथ ट्रिक करती है बीमा कंपनियां
बीमा कंपनियों के लिए नियामकीय जरूरातों को पूरा करने के लिए ऐसा करना पड़ता है। यानी बीमा कंपनियां ग्राहकों के साथ यह ट्रिक नियमों के तहत करती हैं। यहां तक कि बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक प्राधिकरण यानी आईआरडीए भी इंडस्‍ट्री की ग्रोथ को इस बात से आंकती हैं कि इंडस्‍ट्री कितना पैसा ग्राहकों से ले रही है। बीमा नियामक यह नहीं देखता है कि इंडस्‍ट्री ने कितना बीमा कवर कितने लोगों को दिया है जबकि बीमा नियामक से ग्राहकों यानी आपके हितों की रक्षा करने की उम्‍मीद की जाती है।

बीमा नियामक नहीं करता ग्राहकों के हितों की रक्षा
आईआरडीए की सालाना रिपोर्ट या देश में कोई और प्रकाशित आंकड़ा यह नहीं बताता है कि वास्‍तव में लोगों को कितनी रकम के बीमा कवर की जरूरत है और उनको कितना बीमा मिला है। आईआरडीए यह जानने के लिए कि कितने लोगों को बीमा मिला है बीमा घनत्‍व का इस्‍तेमाल करता है। बीमा घनत्‍व प्रति ग्राहक वसूले गए प्रीमियम के साथ जीडीपी रेशियो के प्री‍मियम के आधार पर तय होती है। क्‍या मजाक है।

यह आंकड़े हमें यह नहीं बताते हैं कि लोगों को कितना बीमा कवर दिया गया। यह आंकड़े सिर्फ यह बताते हैं कि बीमा उद्योग ने लोगों से कितना पैसा लिया। अब एक जरूरी सवाल यह है कि जब एक ग्राहक की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को कितना पैसा मिलता है। कितने ग्राहक के पास कितनी रकम का जीवन बीमा कवर है। मुहैया कराए गए कवर के लिए वसूले गए कुल प्रीमियम का अनुपात क्‍या है। दुखद है कि यह जानकारी कहीं से नहीं मिलती है। या तो आईआरडीए को यह जानकारी जुटाने की चिंता नहीं है या ये जानकारी गोपनीय है।
बीमा एजेंट उठाते हैं फायदा

बीमा नियामक का रवैया साफ तौर पर उन लोगों के व्‍यवहार में दिखता है जो आपको बीमा बेचते हैं। हालांकि एजेंट आपको किस तरह से बीमा उत्‍पाद बेचते हैं यह एक लंबी कहानी है। आपको अपनी 10 साल की इनकम के बराबर रकम का बीमा कवर लेने पर फोकस करना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप सही बीमा उत्‍पाद खरीदेंगे, जो कि टर्म बीमा है। इसका कारण यह है कि दूसरे तरह के बीमा उत्‍पाद में अपनी 10 साल की आय के बराबर रकम का जीवन बीमा कवर खरीदने के लिए आपको अपनी पूरी आय प्रीमियम के तौर पर देनी होगी।

बीमा और निवेश रखें अलग-अलग

बीमा खरीदने का बेसिक सिद्धांत है कि आपको बीमा ओर निवेश अलग-अलग रखना चाहिए। आपको सिर्फ बीमा यानी टर्म बीमा खरीदना चाहिए। भारत में बीमा उत्‍पाद बेचने वालों ने निवेश के कल्‍चर को बढ़ावा दिया है। इसकी वजह से यहां लोग टर्म बीमा खरीदने से बचते हैं क्‍योंकि इसमें आपको कुछ भी वापस नहीं मिलता। बीमा उत्‍पाद बेचने वाले एजेंट ऐसा इसलिए करते हैं क्‍योंकि वे दूसरी तरह के उत्‍पाद बेच कर काफी ज्‍यादा कमीशन कमाते हैं। इस सिस्‍टम पर टिप्‍पणी करते हुए विनम्र बने रहना संभव नहीं है और मैं ऐसा करने का प्रयास भी नहीं करता हूं। यह सिस्‍टम इसलिए काम कर रहा है क्‍योंकि बीमा नियामक सोया हुआ है। एजेंट गलत जानकारी देकर उत्‍पाद बेचते हैं कस्‍टमर को जरूरी समझ नहीं है। यह सिस्‍टम जल्‍द नहीं बदलने वाला है। ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि बीमा खरीदने का सही तरीका क्‍या है, जिससे एजेंट आपको गुमराह न कर सकें।

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