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आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी पेड-अप हो जाने पर क्या होता है?

हम यहां बता रहे हैं कि पेड-अप पॉलिसी क्यों और कब फ़ायदेमंद हो सकती है

हम यहां बता रहे हैं कि पेड-अप पॉलिसी क्यों और कब फ़ायदेमंद हो सकती है

जब कोई पॉलिसी पेड-अप की स्थिति में होती है तो क्या होता है? - शौल हमीद

अगर आप अपनी बीमा पॉलिसी के लिए तय समय (जैसे कि दो या तीन साल) तक प्रीमियम भरते हैं, तो उसे 'पेड-अप' कहा जाता है.

अगर आप इस दौरान अवधि के समाप्त होने से पहले प्रीमियम देना बंद कर देते हैं, तो न सिर्फ़ आपकी पॉलिसी कैंसिल हो जाएगी , बल्कि आप सभी फ़ायदे भी खो देंगे. लेकिन, अगर आप तय समय के बाद प्रीमियम देना बंद कर देते हैं, तो पॉलिसी चलती रहेगी लेकिन कुछ फ़ायदे कम हो जाएंगे. साथ ही, इंश्योरेंस की रक़म भी कम हो जाएगी.

पेड-अप पॉलिसी कैसे काम करती है?

फ़र्ज़ करिए, रोहन ने एक लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है जिसकी रक़म ₹10 लाख है और उसे 20 साल तक सालाना प्रीमियम देना है. पहले 6 साल तक उसने प्रीमियम दिया लेकिन फिर पैसों की दिक्क़त के चलते उसने प्रीमियम देना बंद करना पड़ा.

हालांकि, रोहन ने वाजिब न्यूनतम अवधि से ज्यादा समय तक प्रीमियम दिया है, तो इसलिए उसकी पॉलिसी कैंसिल नहीं होगी और पेड-अप में तब्दील हो जाएगी.

सम-एश्योर्ड रक़म का क्या होगा?

अब रोहन के लिए इंश्योरेंस की रक़म कुछ इस तरह से कैलकुलेट की जाएगी:

(भुगतान किए गए प्रीमियम की संख्या (6) / कुल प्रीमियम (20)) सम-एश्योर्ड की रक़म (₹10 लाख) = पेड-अप की रक़म (₹3 लाख).

यानी,अगर रोहन की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को ₹10 लाख के बजाय सिर्फ़ ₹3 लाख ही मिलेंगे.

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क्या आपकी पेड-अप पॉलिसी में फ़ायदे कम हो जाएंगे?

जी हां, पेड-अप पॉलिसी में रक़म कम होने के साथ, आगे कोई बोनस नहीं मिलता. मगर पॉलिसी पेड-अप होने से पहले कोई बोनस मिला होता है, तो वो रक़म के साथ दिया जाएगा.

जब एंडोमेंट या मनी-बैक प्लान की मैच्योरिटी की रक़म की बात आती है, तो पॉलिसी होल्डर को मैच्योरिटी पर सिर्फ़ कम की गई इंश्योरेंस की रक़म ही मिलेगी. रोहन के मामले में, अगर वो पॉलिसी की मियाद पूरी होने तक जीवित रहता है, तो उसे मैच्योरिटी पर (यानी 20 साल बाद) ₹10 लाख के बजाय ₹3 लाख ही मिलेंगे.

क्या आप पेड-अप पॉलिसी को फिर से शुरू कर सकते हैं?

हां, बीमा कंपनियां आम तौर पर आपको एक तय समय के अंदर (अक्सर पिछले अदा न किए गए प्रीमियम से पांच साल तक) पॉलिसी को दोबारा शुरू करने की इजाज़त देती हैं. ऐसा करने के लिए, आपको पहले बक़ाया प्रीमियम और ब्याज का भुगतान करना होगा.

क्या आपको पेड-अप पॉलिसी रखनी चाहिए?

पेड-अप पॉलिसी की वैल्यू सरेंडर वैल्यू से ज़्यादा होती है, लेकिन फ़िक्स्ड रक़म का भुगतान सिर्फ़ मैच्योरिटी पर ही किया जाता है. दूसरी ओर, सरेंडर वैल्यू एक बार में ही डिस्ट्रिब्यूट की जाती है. इसलिए अगर आपके पास लंबा समय है, तो पॉलिसी सरेंडर करना और बेहतर विकल्प में निवेश करना ज़्यादा समझदारी भरा क़दम हो सकता है.

साथ ही, अगर आपके परिवार में कोई आप पर निर्भर है, तो पर्याप्त इंश्योरेंस कवर रखना ज़रूरी है. इसके लिए एक प्योर-टर्म इंश्योरेंस प्लान अक्सर बेहतर होता है.

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ये लेख पहली बार फ़रवरी 20, 2025 को पब्लिश हुआ.

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