
अभी क्रेडिट रिस्क और गिल्ट फंड कितने सुरक्षित हैं ? क्या इनको फिक्स्ड डिपॉजिट पर प्राथमिकता दी जा सकती है ?
राजन
नहीं। क्रेडिट रिस्क फंड ज्यादा जोखिम लेने वाले फंड होते हैं। ये फंड लो रेटिंग वाले बॉण्ड में निवेश करते हैं। यानी ऐसे बॉण्ड जिनमें डिफॉल्ट का खतरा होता है। क्रेडिट रिक्क फंड हो या गिल्ट फंड इनमें से किसी की तुलना फिक्स्ड डिपॉजिट से नहीं की जा सकती है। गिल्ट फंड सरकारी बॉण्ड में निवेश करते हैं। इन सबके अपने अपने रिस्क हैं और उसी हिसाब से रिटर्न देते हैं।
उदाहरण के लिए गिल्ट फंड में क्रेडिट रिस्क नहीं होता लेकिन इंटरेस्ट रेट का रिस्क होता है। जब इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो गिल्ट फंड में काफी में तेज गिरावट आएगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि लंबी अवधि वाले गिल्ट फंड भी उपलब्ध हैं। हमारे पास 10, 15 यहां तक 20 साल की अवधि वाले गवर्नमेंट ऑफ इंडिया बॉण्ड उपलब्ध हैं। अगर इंटरेस्ट रेट 1 फीसदी बढ़ता है तो ये फंड 10 से 20 फीसदी तक गिर जाते हैं।
तो बात साफ है कि कुछ भी जोखिम से मुक्त नहीं है। आपके लिए यह समझना जरूरी है कि आप कैसे खुद को जोखिम उठाने के लिए तैयार कर सकते हैं। अगर आप वास्तव में एफडी से तुलना करना चाहते हैं तो आप खुद को अल्ट्रा शार्ट ड्यूरेशन या लिक्विड फंड तक सीमित रख सकते हैं। ये फंड आपको फिक्स्ड डिपॉजिट जैसा रिटर्न दे सकते हैं। और इस बात की बहुत कम संभावना है कि आपको पूंजी का नुकसान उठाना पड़े। इसके अलावा, ये फंड टैक्स बेनेफिट के लिहाज से भी बेहतर है और ज्यादा लिक्विडिटी मुहैया कराते हैं।
वहीं लोग क्रेडिट रिस्क फंड के नाम का यह मतलब नहीं निकालते हैं कि इसमें जोखिम ज्यादा और चिंतित हो जाते हैं। लेकिन क्रेडिट रिस्क आपका रिटर्न बढ़ाने के लिए कंपनियों को पैसा उधार देते हैं और फंड मैनेजर आपका जोखिम कम करने का काम करता है जिससे फंड कम से कम जोखिम में रहे। हालांकि यह विश्लेषण हमेशा सही नहीं हो सकता है।
लेकिन म्युचुअल फंड के फायदे यहां भी अहम भूमिका निभाते हैं। मान लेते हैं कि आपने अपना सारा पैसा कंपनी डिपॉजिट में लगा दिया और कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो गई तो आपका पैसा फंस जाएगा। लेकिन अगर आप म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपकी रकम का एक छोटा हिस्सा ही जाएगा और बाद में यह आपको मिल भी सकता है। और हो सकता है कि बाद में यह पैसा आपको बड़े रिटर्न के साथ मिले।
ये लेख पहली बार अक्तूबर 16, 2019 को पब्लिश हुआ.