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पाठक का सवाल: अपने जीवनसाथी या बच्चों को शेयर गिफ़्ट के तौर पर कैसे दे सकते हैं ? - प्रेमकुमार कंबिसेरिल
आपकी बेटी अभी 18 साल की हुई है. या आपका जीवनसाथी निवेश करने की बात कर रहा है. या आप बस कोई ऐसा शेयर, जिस पर आपको भरोसा है, किसी अपने को देना चाहते हैं.
शेयर गिफ़्ट करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना ज़्यादातर लोग सोचते हैं. इसमें न के बराबर ख़र्च आता है और किसी वकील की भी ज़रूरत नहीं पड़ती. लेकिन पहले एक बात ठीक से समझ लीजिए, क्योंकि यही बात अक्सर सबको चौंका देती है.
पाने वाले को तैयार करना
कोई भी शेयर देने से पहले, जिसे आप दे रहे हैं उसके पास एक डीमैट अकाउंट होना ज़रूरी है. यह एक डिजिटल अकाउंट होता है, जो शेयरों को उसी तरह संभालकर रखता है जैसे बैंक अकाउंट आपके पैसे रखता है.
जीवनसाथी के लिए एक आम डीमैट अकाउंट काफ़ी है. 18 साल से छोटे बच्चे के लिए, आप बच्चे के नाम पर एक माइनर डीमैट अकाउंट खुलवाते हैं. बच्चे के 18 साल का होने तक इसे माता-पिता या अभिभावक चलाते हैं. उसके बाद यह बच्चे के अपने नाम का आम अकाउंट बन जाता है. अकाउंट बन जाने के बाद, शेयर दो तरीक़ों में से किसी एक से दिए जा सकते हैं.
तेज़ तरीक़ा और दूसरा रास्ता
अगर आपका ब्रोकर ऑनलाइन गिफ़्ट करने की सुविधा देता है, तो काम बहुत आसान है. आप लॉग-इन करते हैं, गिफ़्ट का विकल्प चुनते हैं, पाने वाले के डीमैट अकाउंट की जानकारी भरते हैं, शेयर और उनकी संख्या चुनते हैं और TPIN व OTP डालकर पुष्टि कर देते हैं. कुछ ब्रोकर पहले पाने वाले से गिफ़्ट स्वीकार करवाते हैं, फिर ट्रांसफ़र करते हैं. कुछ इसे सीधे कर देते हैं. दोनों ही हाल में, शेयर एक-दो दिन में पहुंच जाते हैं.
अगर आपका ब्रोकर यह सुविधा नहीं देता, तो आप ऑफ़-मार्केट ट्रांसफ़र का रास्ता अपनाते हैं. यह एक आम तरीक़ा है, जो भारत की दो डिपॉज़िटरी CDSL और NSDL, के नियमों से चलता है. ये दोनों देश के सभी शेयरों के मालिकाने का हिसाब रखती हैं. इसके लिए आप एक डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप यानी DIS भरते हैं, जो आपके ब्रोकर से मिलती है. अगर आप डिजिटल तरीक़ा चाहते हैं, तो CDSL का प्लेटफ़ॉर्म Easiest है और NSDL का SPEED-e.
DIS में चार चीज़ें भरनी होती हैं: पाने वाले की DP ID और Client ID, जो मिलकर उसके डीमैट अकाउंट की पहचान बताती हैं; हर शेयर का ISIN, यानी 12 अंकों का एक ख़ास कोड जो उस शेयर की पहचान है; शेयरों की संख्या; और देने की वजह, जहां "गिफ़्ट" लिखा जाना चाहिए. इसे ब्रोकर के पास जमा कीजिए, पुष्टि पूरी कीजिए और शेयर ट्रांसफ़र हो जाते हैं.
एक ख़र्च के लिए तैयार रहिए: ऑफ़-मार्केट ट्रांसफ़र पर एक फ़ीस लगती है, जो आमतौर पर हर ISIN पर अलग से लगती है. यानी हर अलग शेयर एक अलग ख़र्च गिना जाता है, और साथ में GST भी. यह रक़म हर ब्रोकर में अलग होती है, इसलिए शुरू करने से पहले एक बार जांच लेना ठीक रहता है.
टैक्स वाला हिस्सा
इनकम टैक्स का सेक्शन 56(2)(x) कहता है कि तय रिश्तेदारों के बीच गिफ़्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता. जीवनसाथी और बच्चे इसी में आते हैं. यानी न कोई गिफ़्ट टैक्स, और न ही देते वक़्त कोई कैपिटल गेन, चाहे शेयरों की क़ीमत कितनी भी हो.
लोगों को असली उलझन इसके बाद होती है.
अगर आप अपने जीवनसाथी को शेयर गिफ़्ट करते हैं, तो उन शेयरों से मिलने वाला कोई भी डिविडेंड या कैपिटल गेन सेक्शन 64 के तहत वापस आपकी ही आमदनी में जुड़ जाता है. इसे क्लबिंग का नियम कहते हैं. यह नियम इसीलिए बना है, ताकि लोग अपनी संपत्ति किसी कम टैक्स वाले परिवार के सदस्य के नाम करके अपनी आमदनी उस पर न डाल सकें. शेयर भले आपके अकाउंट से चले जाएं, लेकिन उनसे होने वाली आगे की कमाई पर टैक्स आप पर ही रहता है.
यही बात 18 साल से छोटे बच्चे पर भी लागू होती है. डिविडेंड और गेन उसी माता या पिता की आमदनी में जुड़ते हैं, जो दोनों में ज़्यादा कमाता है. हां, सेक्शन 10(32) एक छोटी राहत ज़रूर देता है: हर बच्चे के लिए साल में ₹1,500 तक छूट मिलती है. लेकिन इससे ऊपर की कमाई ज़्यादा कमाने वाले माता-पिता के टैक्स में जुड़ जाती है.
इसका एक अपवाद है, बालिग बच्चा. जैसे ही आपका बच्चा 18 साल या उससे बड़ा होता है, क्लबिंग का नियम लागू नहीं होता. गिफ़्ट किए गए शेयरों से आगे की पूरी कमाई और गेन उसी के हाथ में टैक्स होते हैं. बालिग बच्चे को दिया गिफ़्ट संपत्ति और उसके टैक्स, दोनों का एक साफ़-सुथरा ट्रांसफ़र होता है.
एक बात और, जो उस वक़्त काम आती है जब पाने वाला आगे चलकर ये शेयर बेचता है. उसे आपसे दो चीज़ें मिलती हैं: आपकी पहली ख़रीद क़ीमत और आपका होल्डिंग पीरियड. यानी अगर आपने शेयर ₹100 में ख़रीदे और गिफ़्ट करने से पहले दो साल रखे, तो पाने वाले के लिए भी ख़रीद क़ीमत ₹100 ही मानी जाएगी, और उसका होल्डिंग पीरियड वहीं से गिना जाएगा जब आपने पहली बार ख़रीदा था, न कि गिफ़्ट की तारीख़ से. यह इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि इसी से तय होता है कि बेचने पर गेन शॉर्ट-टर्म माना जाएगा या लॉन्ग-टर्म.
एक दस्तावेज़ ज़रूर रखें
गिफ़्ट डीड क़ानूनी तौर पर ज़रूरी नहीं है. लेकिन यह बाद में टैक्स विभाग के साथ एक लंबी बहस से बचा सकती है. इसमें देने वाले और पाने वाले, दोनों के नाम होने चाहिए, शेयरों का नाम और ISIN, शेयरों की संख्या, और एक लाइन जो बताए कि यह ट्रांसफ़र अपनी मर्ज़ी से और बिना किसी बदले में पैसे लिए किया गया है. अगर कभी कोई सवाल उठे, तो यह दस्तावेज़ उसका जवाब बन जाता है.
वैल्यू रिसर्च की राय
गिफ़्ट करने से पहले एक बात और सोच लीजिए: क्या यह वही शेयर है जो आप आज, किसी नई शुरुआत करने वाले के लिए ख़रीदेंगे? वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र कारोबारों की पड़ताल ठीक इसी तरह की लंबे समय की होल्डिंग के लिए करता है, ताकि आप जो शेयर आगे दें, वो रखने लायक़ हों, न कि सिर्फ़ वो जो इत्तेफ़ाक़ से आपके पास थे.
जानिए कौन से शेयर उस भरोसे के लायक़ हैं.
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ये लेख पहली बार जून 30, 2026 को पब्लिश हुआ.