फंड बेसिक

एसआईपी:कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना..........

निवेश शुरू करने वालों के लिए शुरूआती एक दो साल मुश्किल होते हैं खास कर कम रिटर्न मिलने पर भरोसा कमजोर होने लगता है

दोस्‍तों, उम्‍मीद है बाजार में निवेश को लेकर आपकी आशंकाएं और डर काफी हद तक खत्‍म हो गया होगा। अब आपका अगला कदम होगा कि आप बाजार में निवेश शुरू करें। आप जेसे नए निवेशक के लिए बाजार में निवेश शुरू करने का सबसे अच्‍छा तरीका सिस्‍टमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान यानी एसआईपी है।

निवेश शुरू करने के लिए एसआईपी है बेस्‍ट

एसआईपी में हर माह एक तय रकम नियमित तौर पर निवेश की जाती है। आप 1,000 या 2,000 रुपए जैसी छोटी रकम से एसआईपी के जरिए बाजार में निवेश शुरू कर सकते हैं। बाजार ऊपर या हो या नीचे आपको इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसकी चिंता एसआईपी अपने आप कर लेगी। एसआईपी के जरिए आप कभी भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

बाजार के उतार चढ़ाव से निपट लेगी एसआईपी

एसआईपी के जरिए म्‍युचुअल फंड में निवेश करने के कई फायदे हैं। पहला तो यही है कि आप इसमें छोटी रकम से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। 1,000, 2,000 या 5,000 जैसी छोटी रकम से। दूसरा फायदा यह है कि जब आप एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है। अब पूछेंगे कि औसत कैसे होती है। भई सीधी सी बात है। जब बाजार ऊपर जाता है तो बाजार महंगा हो जाता है और आपको एसआईपी की रकम से कम यूनिट मिलती है। वहीं बाजार जब नीचे जाता है तो बाजार सस्‍ता हो जाता है और आपको एसआईपी की उतनी ही रकम से ज्‍यादा यूनिट मिलती है। इस तरह से आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है।

जब आप एसआईपी के जरिए निवेश शुरू करेंगे तो आप जैसे नए निवेशक को दिमागी तौर पर कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वैसे वास्‍तव में यह चुनौती नहीं है बस नए निवेशक के लिए यह एक मानसिक चुनौती है।

रिटर्न चेक करने का उत्‍साह

मान लिया आपकी एसआईपी 1 साल की हो गई तो स्‍वाभाविक है कि आप अपना रिटर्न चेक करना चाहेंगे कि कितना रिटर्न मिला। कुछ नए निवेशक तो हर एक दो महीने पर ही रिटर्न चेक करते हैं। ऐसा होना स्‍वाभाविक भी है। मान लिया जब आपने रिटर्न चेक किया उस समय बाजार में गिरावट का दौर है तो स्‍वाभाविक है कि एसआईपी की यूनिट भी सस्‍ती रहेगी और आपका रिटर्न कम दिखेगा।

और अगर यह रिटर्न एफडी के रिटर्न से भी कम हुआ तो हो सकता है कि आपके दिमाग में यह बात आ जाए कि यहां तो एफडी से भी कम रिटर्न मिल रहा है। हो सकता है कि आपके साथ ऑफिस में काम करने वाले या दोस्‍त भी आपको देख कर मुस्‍कराएं कि बड़ा चला था एसआईपी में निवेश करने। अब देखो। जब भी आप कोई नया काम शुरू करेंगे तो ऐसा होगा। इसमें कोई नई बात नहीं है। आपने वह गाना तो सुना ही होगा कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना............

बनाए रखें धैर्य

लेकिन आपको यहीं पर धैर्य रखना होगा। आपको यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि एसआईपी में निवेश लंबी अवधि के लिए होता है। तभी आपको एसआईपी में निवेश का पूरा फायदा मिल पाएगा। निवेश के शुरूआती 1 दो साल में भी यह भी हो सकता है कि बाजार में तेजी का दौर हो और आपकी एसआईपी काफी अच्‍छा रिटर्न दे। स्‍वाभाविक है कि आपको अच्‍छा रिटर्न यानी 12 या 15 फीसदी सालाना रिटर्न देख कर अच्‍छा लगेगा। इसके बाद यह भी हो सकता है कि बाजार में अचानक गिरावट का दौर आ जाए और कुछ महीनों में ही एसआईपी का रिटर्न घट कर 8 या 9 फीसदी हो जाए। इस उतार चढ़ाव से आपको डरना नहीं है। आपको पहले ही बताया गया है कि बाजार का उतार चढ़ाव उसका स्‍वभाव है और बाजार के उतार चढ़ाव में ही आपकी एसआईपी मुनाफा कमाएगी।

हर हाल में जारी रखनी है एसआईपी

आपको अपनी मंथली एसआईपी हर हाल में जारी रखनी है। तब तक जारी रखनी है जब तक कि आपका लक्ष्‍य न पूरा हो जाए। यानी आप अपनी जरूरत पूरी करने के लायक रकम न जुटा लें। आपका लक्ष्‍य कुछ भी हो सकता है। जैसे आपको घर खरीदने के लिए डाउनपेमेंट की रकम का इंतजाम करना है। बच्‍चे की हायर एजुकेशन के लिए फंड बनाना है। या अपने रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए रकम जुटानी है। लंबी अवधि में एसआईपी आपके इन सभी जरूरतों को पूरा कर सकती है। अब अगली सीरिज में हम आपको बताएंगे कि समय समय पर एसआईपी में निवेश की रकम बढ़ाना क्‍यों जरूरी है और ऐसा न करने पर क्‍या नुकसान हो सकता है।

ये लेख पहली बार नवंबर 04, 2019 को पब्लिश हुआ.

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