
आपको कुछ साल पहले आने वाला मारूति का एड याद है। इस एड में दिखने वाला व्यक्ति विजय माल्या की याद दिलाता था। जैसे विजय माल्या एक लग्जरी याट खरीदने से पहले याट की जांच पड़ताल कर रहे हों। वह व्यक्ति सेल्समैन से पूछता है कितना देती है। माल्या के लग्जरी याट के दिन खत्म हो चुके हैं लेकिन मारूति का एड अब भी काफी मजाकिया लगता है। यह एड उस बात के लिए भी काफी प्रासांगिक है जो बात आज मैं लिखना चाहता हूं।
आप डेट फंड में निवेश क्यों करते हैं ? क्या आप इस सवाल का सटीक जवाब दे सकते हैं। शायद नहीं, क्योंकि वास्तव में यह बहुत अच्छा सवाल नहीं है। मुझे दोबारा प्रयास करने दीजिए। डेट में निवेश करने के लिए और इक्विटी फंड में निवेश करने के लिए आपके गोल अलग कैसे हैं। इसके बारे में सोचना आसान होना चाहिए और उम्मीद करता हूं कि इसका जवाब देना भी आसान होगा।
वास्तव में अगर आप इस सवाल का संतोषजनक जवाब दे सकते हैं तो आप एक सफल म्युचुअल फंड निवेश्ाक बन सकते हैं। हालांकि इस जवाब के बाद आपको कुछ और कदम उठाने होंगे।
इस सवाल का सबसे सटीक जवाब यह होगा कि आप इक्विटी फंड में ऊंचे रिटर्न के लिए और डेट फंड में स्थिरता के लिए निवेश करते हैं। यहां स्थिरता से मतलब है कि अच्छे और बुरे समय में रिटर्न में बहुत अंतर न हो। यह जवाब सटीक असेट अलॉकेशन और असेट रीबैलेंसिंग की बात भी करता है। एक और सामान्य जवाब यह है कि इक्विटी फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए है और डेट फंड कम अवधि के निवेश के लिए। वास्तव में यह एक ही बात है जिसे अलग तरीके से कहा जा रहा है।
मैं इस बात पर शर्त लगा सकता हूं कि आपने किसी से भी यह बात नहीं सुनी होगी कि वे ऊंचा रिटर्न हासिल करने के लिए डेट फंड में निवेश कर रहे हैं। ऐसा कोई भी नहीं कहेगा। लेकिन साफ बात करें तो लोग ऐसा करते हैं। निवेशक ऐसा हमेशा करते हैं। वे ऐसा कहते भले ही न हों। वे खुद से भले ही यह बात स्वीकार न करें लेकिन वे ऐसा करते हैं। यह कुछ इस तरह से होता है। वे स्थिरता, सुरक्षा के लिए डेट फंड में निवेश करते हैं लेकिन जब वे वास्तविक फंड चुनने की बात आती है तो फंड के हाल के महीनों का रिटर्न देखना शुरू कर देते हैं।
अगर आप लग्जरी याट खरीद रहे हैं तो आपको निश्चित तौर पर लग्जरी पर फोकस करना चाहिए। आपके लिए कितना देती है कितना मायने रखता है। निश्चित तौर पर यह मायने नहीं रखता है कि आप क्या खरीद रहे हैं आपको उस खासियत के आधार पर चुनना चाहिए जो कि आपके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। तो जब आपने स्थिरता के लिए एक तय रकम डेट फंड में निवेश करने का फैसला कर लिया है तो आप फंड का चुनाव स्थिरता पर करें न कि कितना देती है।
पिछले कुछ सालों में हमने डेट फंड संकट देखा है। यह निवेशकों, फंड बेचने वालों और फंड मैनेजर की इसी सोच का नतीजा है। ज्यादातर लोग फंड का आंकलन सिर्फ रिटर्न के आधार पर करते हैं। इसका एक कारण यह है कि डेट फंड एक कमोडिटी की तरह दिखता है। बिक्री और मार्केटिंग के नजरिए से एक को दूसरे से अलग कर पाना तब तक संभव नहीं है जब तक कि आप इस पर गहराई से गौर न करें। एक दूसरा तरीका यह है कि आप जोखिम के स्तर और रिटर्न के साथ गेम खेलना शुरू कर दें।
मेरा मानना है कि अगर जोखिम वाले डेट फंड में निवेशकों की रकम अटक गई है तो यह उनकी ही गलती है। फंड बेचने का पूरा इकोसिस्टम ही ऐसा है जिसने इस तरह के हालात पैदा किए हैं। इसके अलावा सिर्फ रिटर्न के पीछे भागने की निवेशकों की मानसिकता ने भी इसमें मदद की है। स्मार्ट निवेशकों ने इस पूरे अनुभव से काफी कुछ सीखा है।


