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सारांशः डिजिटल लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म Kissht की पैरेंट कंपनी OnEMI Technology, 30 अप्रैल से 5 मई 2026 के बीच खुलने वाले IPO के ज़रिए ₹850 करोड़ जुटा रही है. निवेश का फ़ैसला लेने से पहले क़ारोबार की ताक़त, कमज़ोरी और जोख़िम जान लीजिए.
OnEMI Technology Solutions का IPO 30 अप्रैल 2026 को खुलेगा और 5 मई 2026 को बंद होगा. यहां इस फ़िनटेक कंपनी के क़ारोबार के तरीक़े, ताक़त, जोख़िम और वैल्यूएशन की समीक्षा की जा रही है, ताकि आप तय कर सकें कि यह ऑफ़र आपके पैसे के लायक़ है या नहीं.
कंपनी क्या करती है
OnEMI Technology Solutions, Kissht नाम का कंज़्यूमर लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म चलाती है. यह मुख्य रूप से बिना किसी गिरवी के दिए जाने वाले पर्सनल लोन में काम करती है, जो फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के पहले नौ महीनों में AUM का क़रीब 94% था. ये छोटे लोन होते हैं, आमतौर पर ₹5 लाख से कम, जो नौकरीपेशा और स्व-रोज़गार वाले लोगों को दिए जाते हैं. लेकिन असल में लोन का साइज़ काफ़ी छोटा है, जो फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के पहले नौ महीनों में औसत लोन ₹25,556 का था.
कंपनी ग्राहकों तक दो ऐप के ज़रिए पहुंचती है. Kissht पर क़र्ज़दार सीधे ऑनलाइन आवेदन करते हैं. PaywithRing ऑफ़लाइन काम करता है, जहां ग्राहक किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके तुरंत क्रेडिट पा सकते हैं.
बाकी क़ारोबार प्रॉपर्टी के बदले लोन से आता है, जो MSMEs और स्व-रोज़गार वालों को दिया जाता है. ये बड़े और लंबी अवधि के लोन हैं, जो एक छोटे ब्रांच नेटवर्क के ज़रिए दिए जाते हैं.
क्या अच्छा है
क़ारोबार आकर्षक है. OnEMI उन लोगों को लोन देकर ज़्यादा कमाती है जिन्हें औपचारिक क्रेडिट आसानी से नहीं मिलती. फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में इसने क़रीब 32% की औसत दर पर लोन दिया, जबकि पैसा उधार लेने की लागत क़रीब 14% थी. इस फ़र्क़ से मज़बूत मार्जिन बनता है.
ग्रोथ भी इसी मुनाफ़े के साथ क़दम मिलाकर चली है. AUM पिछले तीन सालों में हर साल 80% की ज़बरदस्त रफ़्तार से बढ़ा है, जो मांग और कंपनी की अपने मॉडल को बड़ा करने की क्षमता दोनों को दर्शाता है.
क्या अच्छा नहीं है
जो मॉडल ग्रोथ देता है वही कमज़ोरी भी लाता है. बिना गिरवी के दिए लोन में जब क़र्ज़दार चूकता है तो कोई वापसी नहीं होती. न कुछ ज़ब्त करने को होता है और क़र्ज़दारों की आमदनी में झटकों का असर ज़्यादा होता है. यह आंकड़ों में दिखता है. क्रेडिट कॉस्ट रेशियो, जो बताता है कि हर साल लोन बुक का कितना हिस्सा डिफ़ॉल्ट में जाता है, फ़ाइनेशियल ईयर 24 में 32% तक पहुंचने के बाद फ़ाइनेशियल ईयर 25 में 9.7% पर आया. कंपनी का Gross NPA भी फ़ाइनेशियल ईयर 23 में लगभग शून्य से बढ़कर फ़ाइनेशियल ईयर 25 में 2.9% हो गया.
OnEMI Technology Solutions IPO की जानकारी
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मार्केट कैप (करोड़ ₹)
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2,881 |
| नेट वर्थ (करोड़ ₹) | 2,104 |
| प्रमोटर हिस्सेदारी (%) | 24.8 |
| P/E रेशियो | 17.9 |
| P/B रेशियो | 1.4 |
IPO के बाद
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कुल IPO साइज़ (करोड़ ₹)
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926 |
| ऑफ़र फ़ॉर सेल (करोड़ ₹) | 76 |
| फ़्रेश इश्यू (करोड़ ₹) | 850 |
| प्राइस बैंड (₹) | 162-171 |
| सब्सक्रिप्शन तारीख़ें | 30 अप्रैल से 5 मई 2026 |
| इश्यू का मक़सद | सहायक कंपनी Si Creva में पूंजी डालना और सामान्य कामकाज |
फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री
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मुख्य फ़ाइनेंशियल आंकड़े
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2 साल की ग्रोथ (सालाना %) | 9M FY26 | FY25 | FY24 | FY23 |
|---|---|---|---|---|---|
| NII (करोड़ ₹) | 16.6 | 743 | 860 | 1158 | 632 |
| PAT (करोड़ ₹) | 140.9 | 199 | 161 | 197 | 28 |
| AUM (करोड़ ₹) | 79.5 | 5,956 | 4,087 | 2,604 | 1,268 |
| उधारी (करोड़ ₹) | 87.3 | 2093 | 1556 | 836 | 444 |
| नेट वर्थ (करोड़ ₹) | 33.3 | 1254 | 1006 | 805 | 566 |
| NII यानी नेट इंटरेस्ट इनकम = [लोन पर ब्याज - (डेट सिक्योरिटी और उधारी पर ब्याज)] AUM यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट | |||||
मुख्य रेशियो
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मुख्य रेशियो (%)
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3 साल का औसत (%) | 9M FY26 | FY25 | FY24 | FY23 |
|---|---|---|---|---|---|
| ROE | 17.1 | 17.6 | 17.7 | 28.8 | 4.9 |
| ROA | 7.4 | 6.4 | 7.1 | 12.8 | 2.2 |
| रिपोर्टेड NIM | 19.7 | 21.2 | 23.8 | 16.8 | 18.6 |
| GNPA | 1.2 | 2.9 | 2.9 | 0.8 | 0.1 |
| ROE यानी रिटर्न ऑन इक्विटी, ROA यानी रिटर्न ऑन एसेट्स, NIM यानी नेट इंटरेस्ट मार्जिन, यह आंकड़ा कंपनी ने ख़ुद बताया है और इसमें प्रोसेसिंग फ़ीस शामिल नहीं है GNPA यानी ग्रॉस नॉन-परफ़ॉर्मिंग एसेट्स | |||||
वैल्यूएशन एनालेसिस
IPO के बाद क़रीब 1.4 गुना बुक पर, वैल्यूएशन पहली नज़र में ठीक-ठाक लगती है. लेकिन यह एक ऐसा क़ारोबार है जहां जोख़िम और इनाम का संतुलन स्वाभाविक रूप से टेढ़ा है. कंपनी के अच्छे रिटर्न रेशियो उन लोगों को लोन देने से आते हैं जिन्हें परंपरागत बैंक नहीं देते. इसके साथ ज़्यादा डिफ़ॉल्ट, ऊंचा GNPA, अस्थिर क्रेडिट लागत और आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता आती है.
इसके उलट, Bajaj Finance या Cholamandalam जैसी स्थापित NBFC जो चार से छह गुना बुक पर प्रीमियम वैल्यूएशन पाते हैं, उन्होंने कई साइकिल में अपनी साख बनाई है, लगातार अच्छी एसेट क्वालिटी और सावधानी भरी लेंडिंग के साथ. बाज़ार इसी भरोसेमंद प्रदर्शन को इनाम देता है.
OnEMI की ग्रोथ प्रभावशाली है लेकिन इसके साथ साफ़ दिखने वाले समझौते हैं, जो वैल्यूएशन में छूट में दिखता है.
कंपनी की रिस्क रिपोर्ट
कंपनी और क़ारोबार
क्या कंपनी अपना क़ारोबार बढ़ा पाएगी? हां. डिजिटल मास-मार्केट लेंडिंग के FY30 तक हर साल 48% की रफ़्तार से बढ़ने का अनुमान है, जिससे कंपनी को बड़ा होने में मदद मिलेगी.
क्या कंपनी के पास पहचाने जाने वाले ब्रांड और ग्राहकों की वफ़ादारी है? NBFC के लिए यह पैमाना ख़ास मायने नहीं रखता. बार-बार लोन लेने वाले ग्राहक ब्रांड के प्रति वफ़ादारी नहीं, बल्कि जिस तरह के ग्राहक यह सेवा करती है उसका संकेत हैं.
क्या कंपनी के पास कोई मज़बूत बढ़त है जो टिकी रहे? नहीं. कंपनी बेहद मुकाबले वाले ऑनलाइन फ़िनटेक लेंडिंग सेक्टर में काम करती है. इसका मुकाबला KreditBee, Navi Finserv, Fibe और Moneyview जैसे कई नए डिजिटल खिलाड़ियों से है.
कंपनी के फ़ाइनेंशियल
क्या कंपनी का मौजूदा ROE 12% से ज़्यादा और ROA 1% से ज़्यादा है? हां. FY25 में ROE 17.7% और ROA 7.14% रहा. FY26 के पहले नौ महीनों में यह और बेहतर हुए, सालाना ROE 23.5% और ROA 8.5%.
क्या कंपनी ने पिछले तीन सालों में NII सालाना 20% से ज़्यादा बढ़ाई है? नहीं. FY23 से FY25 के बीच NII क़रीब 17% सालाना बढ़ी.
क्या कंपनी की NII लोन बुक ग्रोथ के साथ क़दम मिला रही है? नहीं. जहां कंपनी का AUM FY23 से FY25 के बीच सालाना 80% बढ़ा, वहीं NII FY24 के ₹1,158 करोड़ के शिखर से गिरकर FY25 में ₹860 करोड़ पर आ गई.
क्या कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 15% से ज़्यादा है? हां. कंपनी ने (अपनी लेंडिंग सहायक Si Creva के ज़रिए) FY25 में 25.2% का CRAR दिखाया, जो FY26 के पहले नौ महीनों में और मज़बूत होकर 26.7% हो गया.
क्या कंपनी का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो 50% से कम है? नहीं. FY25 में यह 54.3% था, जो FY26 के पहले नौ महीनों में थोड़ा बढ़कर 55.7% हो गया.
क्या कंपनी अगले तीन सालों में बिना बाहरी पूंजी के काम चला सकती है? नहीं. कंपनी का क़ारोबारी मॉडल लोन देने और नक़दी मैनेज करने के लिए समय पर और सस्ती बाहरी पूंजी पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. लोन पोर्टफ़ोलियो तेज़ी से बढ़ने की वजह से यह ऐतिहासिक रूप से नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ़्लो दिखाती रही है, जिसके लिए लगातार बाहरी क़र्ज़ चाहिए.
क्या कंपनी के तीन साल के औसत Gross NPA और Net NPA क्रमशः 1% और 0.5% से कम हैं? Gross NPA की सीमा पूरी नहीं होती, लेकिन Net NPA सीमा के अंदर है. तीन साल का औसत Gross NPA क़रीब 1.24% था. वहीं उसी दौरान Net NPA का औसत 0.08% रहा.
आख़िरी बात
IPO में किसी क़ारोबार को आंकना अक्सर सबसे मुश्किल होता है. लिस्टेड इतिहास सीमित होता है, कई बाज़ार साइकल में प्रदर्शन के सबूत कम होते हैं और कई मामलों में सबूत से ज़्यादा कहानी होती है. बेहतर तरीक़ा अक्सर यह होता है कि लंबे ट्रैक रिकॉर्ड, मज़बूत पारदर्शिता और ज़्यादा साफ़ बुनियादी बातों वाले स्थापित क़ारोबारों को देखें.
यही वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र में हम करते हैं. हमारी रिसर्च ऊपरी कहानियों से आगे जाकर क़ारोबारों को क्वालिटी, वैल्यूएशन, ग्रोथ और फ़ाइनेंशियल मज़बूती के बारीक़ नज़रिए से देखती है, ताकि लॉन्ग-टर्म में वेल्थ बनाने वाले क़ारोबार पहचाने जा सकें. सब्सक्राइब करने पर आपको मिलता है:
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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