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किसको मूर्ख बना रहे हैं आप

पहला सिद्धांत है कि आपको खुद को मूर्ख नहीं बनाना और आप मूर्ख बनाने के लिए सबसे आसान व्‍यक्ति हैं

पहला सिद्धांत है कि आपको खुद को मूर्ख नहीं बनाना और आप मूर्ख बनाने के लिए सबसे आसान व्‍यक्ति हैं

महान भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फिनमिन ने 1974 में काल्‍टेच में एक भाषण में यह बात कही थी। उन्‍होंने यह बात विज्ञान और वैज्ञानिकों के बारे में कही थी लेकिन यह किसी भी क्षेत्र के लिए उतनी ही सच है। यहां तक किसी भी तरह की रिसर्च और एनॉलिसिस में भी यह बात दिखती है। निश्चित तौर पर यह बात निवेश के लिए की जाने वाली रिसर्च में भी सच है। चाहे रिसर्च पेशेवर तौर पर की जाए या खुद के लिए।

फिनमैन के इस बयान का मतलब क्‍या था ? उनका मतलब था कि जब हम कोई विचार या एक हाइपोथीसिस बनाते हैं तो हमारा दिमाग इससे सहमत हो जाता है और वह अपने आप इसको लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त हो जाता है। हम इसको इसको लेकर जागरूक हों या न हों, हम अपने विश्‍वास का समर्थन करने वाले साक्ष्‍य में भरोसा करने लगते हैं और इसके खिलाफ उपलब्‍ध सबूत को खारिज करने लगते हैं। हो सकता है कि हमारा भरोसा सही हो या हो सकता है कि यह सही न हो। लेकिन हमारे भरोसे की ताकत का इसकी सटीकता से कोई लेना देना नहीं है। ऐसी चीज के लिए भी पूरी तरह से सहमत होना संभव जो कि पूरी तरह से गलत हो। यह किसी भी तरह के विश्‍वास के साथ हो सकता है लेकिन खास तौर पर ऐसा होने की संभावना अधिक है जब हम खुद से कुछ सोचते हैं। हम यह भरोसा अपना लगता हे और हमें इसको लेकर सुरक्षा का अहसास होता है। हम खुद को ज्‍यादा आसानी से मूर्ख बना सकते हैं बजाए कि दूसरा हमें मूर्ख बना सके।

मैं एक इन्‍वेस्‍टमेंट एनॉलिस्‍ट के एपीसोड के जरिए इस बात को स्‍पष्‍ट करता हूं। यह एनॉलिस्‍ट ऐसा कुछ लेकर आया था जो दिलचस्‍प और मूल्‍यवान लगता था। यह निवेशकों को दिखाने के लिए एक सरल विचार था कि गिरावट वाले बाजार में अगर उनका चुना हुआ स्‍टॉक गिरता है तो उनको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले सभी स्‍टॉक्‍स में एक समय पर 50 फीसदी से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इस बात को साबित करने के लिए एनॉलिस्‍ट ने 10-15 साल के सुपरलेटिव रिटर्न के साथ स्‍टॉक्‍स चुने और उनकी हिस्‍ट्री पर गौर किया। निश्चित तौर पर यह बात सामने आई कि सभी स्‍टॉक्‍स में कभी न कभी बड़ी गिरावट आई थी। इसमें से कुछ गिरावट बाजार में गिरावट के दौर में आई थी लेकिन कुछ गिरावट स्‍वतंत्र और स्‍टॉक विशेष से संबंधित थी। ऐसे में अगर आपका स्‍टॉक ज्‍यादा भी गिरता है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि सभी अच्‍छे स्‍टॉक कभी न कभी तेजी से गिरते हैं। इससे एनॉनिस्‍ट की बात साबित होती है। ठीक है न ?

हो सकता है यह बात ठीक न हो। जिस व्‍यक्ति ने इस विचार को सोचा है वह निश्चित तौर पर इससे सहमत होगा। हालांकि चलो एक विचार के खिलाफ अनिवार्य तौर पर तर्क करने और इसके विपरीत को सच मान लेने के सिद्धांत को लागू करते हैं। ऊपर दिए गए तर्क का विपरीत क्‍या है ? यहां पर अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले स्‍टॉक्‍स की लिस्‍ट के साथ शुरू करने और यह देखने के बजाए कि बीते समय में ये स्‍टॉक्‍स कभी न कभी गिरावट के शिकाए हुए हैं अगर ऐसे स्‍टॉक्‍स को देखना शुरू किया जाए जो कभी न कभी 50 फीसदी से अधिक गिरे हैं और ये देखा जाए कि इनमें से किन स्‍टॉक्‍स ने 10-15 सालों में शानदार रिटर्न दिए हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो बहुत अलग निष्‍कर्ष पर पहुंचेंगे। इससे पता चलेगा कि ज्‍यादातर स्‍टॉक्‍स जो कभी तेजी से गिरे हैं वे इस गिरावट से उबर नहीं पाए। सफल स्‍टॉक्‍स की तुलना में ऐसे स्‍टॉक्‍स की संख्‍या बहुत अधिक है। स्‍टॉक मार्केट की हिस्‍ट्री ऐसे स्‍टॉक्‍स से भरी पड़ी है। अब जब आप मौलिक तर्क को देखते हैं तो कमियां साफ तौर पर दिखती हैं।

हालांकि मेरा मकसद इस विचार की आलोचना करना नहीं है बल्कि किसी की सोच में पूर्वाग्रह का उदाहरण दिखाना है। मैं आश्‍वस्‍त हूं कि आपने आलोचनात्‍मक सोच के बारे में सुना होगा। इसे आम तौर पर दूसरे व्‍यक्ति के विचार का आंकलन करना कहा जाता है। दूसरे की कमियों को देखने में काफी मजा आता है लेकिन सिर्फ ऐसी आलोचनात्‍मक सोच ही फायदेमंद है जिसे अपने विचारों पर लागू किया जाए। अगर कोई ऐसा अपने निवेश के विचार के साथ ऐसा कर पाता है तो वह इससे काफी अधिक रकम बना सकता है।

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