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आपका पहला इक्विटी इन्‍वेस्‍टमेंट

आप अपना पहला इक्विटी इन्वेस्टमेंट कैसे शुरू करें, ये सवाल बेहद अहम है. पर इससे पहले आपके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि हम हर इन्वेस्टर के इक्विटी में निवेश करने पर ज़ोर क्यों देते हैं?

आप अपना पहला इक्विटी इन्वेस्टमेंट कैसे शुरू करें, ये सवाल बेहद अहम है. पर इससे पहले आपके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि हम हर इन्वेस्टर के इक्विटी में निवेश करने पर ज़ोर क्यों देते हैं?

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अगर आप इन्वेस्टमेंट प्‍लान (Investment plan) कर रहे हैं, और चाहते हैं कि आपका पैसा तेज़ी से बढ़े, तो इक्विटी (Equity) सबसे अच्छा विकल्प है. पर हां, इक्विटी में काफ़ी ज़्यादा उठा-पटक होती है. कभी-कभी तो सांसे थम जाती है क्योंकि मार्केट की गिरावट ही इतनी तेज़ होती है. लेकिन ये आधी ही तस्वीर है. अगर आप पुराने डेटा पर ग़ौर करेंगे, तो पाएंगे कि इक्विटी निवेश ही लंबे समय में महंगाई को मात देने में क़ामयाब रहा है. यहां लंबे समय का मतलब है 5 से 7 साल. आम तौर पर 5 से 7 साल में मार्केट एक साइकल पूरा हो जाता है. साइकल मतलब मार्केट इस दौरान गिरावट से भी गुजरता है और वापसी करके फिर से बढ़त पर आ जाता है.
असल में, सिर्फ़ इक्विटी ही इकलौती एसेट क्‍लास (Asset Class) है, जो महंगाई दर (Inflation Rate) से 2-3 फ़ीसदी ज़्यादा रिटर्न दे सकती है. ये सबसे बड़ी वजह है जिसके लिए आपको इक्विटी में निवेश करना चाहिए. अगर आप महंगाई दर से ज़्यादा रिटर्न हासिल करने की अहमियत समझना चाहते हैं, तो आपको ये ज़रूर पढ़ना चाहिए.

अहम सवाल ये है कि इक्विटी में निवेश कैसे शुरू करें?
ऑप्‍शन
#1: स्‍टॉक्‍स (Stocks)
ये बात सही है कि ट्रेडिंग (Trading), बीएसई (BSE), बुल (Bull) और सेंसेक्‍स (Sensex) जैसे शब्‍द काफ़ी आकर्षक लग सकते हैं. लेकिन किसी भी नए इन्वेस्टर के लिए इस तरह की इन्‍वेस्टिंग से बचना ही बेहतर होगा. अगर आप निवेश के लिए नए हैं, तो सीधे स्‍टॉक्‍स में निवेश आपके लिए काफ़ी भारी-भरकम चीज़ हो सकती है. इसके लिए आपको समझना होगा कि कौन से स्‍टॉक्‍स ख़रीदें, कब ख़रीदें और कब बेचें. यानी, शुरुआत में ही आपको काफ़ी चीज़ें सीखनी होंगी.

ऑप्‍शन# 2: म्‍यूचुअल फ़ंड (Mutual Funds)
अब सवाल है कि म्‍यूचुअल फंड क्‍या है बहुत सारे निवेशक एक जगह पैसा लगाते हैं यही म्‍यूचुअल फंड है। इन सभी निवेशकों के निवेश का मकसद साझा होता है। और म्‍यूचुअल फंड अपने मैन्‍डेट के हिसाब से निवेशकों का पैसा मैनेज करता है।
म्यूचुअल फ़ंड, इक्विटी में निवेश का काम काफ़ी आसान कर देते हैं. क्‍यों? क्‍योंकि ये आपके पोर्टफ़ोलियो को डायवर्सीफ़ाई करके रिस्‍क कम कर देते हैं. दूसरी बात, हर म्‍यूचुअल फ़ंड के पास ऐसे एक्‍सपर्ट होते हैं, जो आपका पैसा मैनेज करते हैं, और ये पक्का करते हैं कि आपको बेहतर रिटर्न मिल सकें. इसीलिए ये समझदारी भरा क़दम होगा कि आप अपना इक्विटी इन्‍वेस्‍टमेंट म्‍यूचुअल फ़ंड के साथ शुरू करें.

कैसे शुरू करें म्‍यूचुअल फ़ंड इन्‍वेस्‍टमेंट?
पहली बार निवेश कर रहे निवेशक को कम जोख़िम वाली स्‍कीमों को चुनना चाहिए, ऐसी स्कीमें जो अच्‍छा रिटर्न दे सकें. एक बार म्‍यूचुअल फ़ंड में निवेश का स्‍वाद चख लेने के बाद ही आपको दूसरे निवेश में सभावनाएं तलाशनी चाहिए. ये थोड़ा बोरिंग भले ही लगे, लेकिन दौड़ने से पहले पैदल चल लेना हमेशा ही बेहतर होता है.

यहां तो खास तरह के म्‍यूचुअल फ़ंड हैं, जो नए निवेशक के लिए काफी फ़ायदेमंद हैं.

# अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड
ये फ़ंड लगभग 65% इक्विटी में, और बाक़ी 35% डेट इन्‍स्‍ट्रूमेंट (Debt Instrument) या बॉन्‍ड्स (Bonds) में करते हैं, जिनको सरकार या कंपनियां जारी करती हैं. ये फिक्‍स्ड इनकम (Fixed Income) कमाते हैं, और स्‍टॉक मार्केट (Stock Market) के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करते.

इसीलिए अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड (Aggressive Hybrid Funds) इक्विटी के तेज़ उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाते हैं, और लगातार अच्‍छा रिटर्न देने के लिहाज़ से प्‍योर इक्विटी फंड (Pure Equity Funds) की तुलना में बेहतर होते हैं.

सवाल है कि ये आपके लिए अच्‍छे क्‍यों हैं? इसकी वजह है रिस्‍क-फैक्‍टर. नए निवेशक के लिए रिस्‍क कम होना ज़रूरी है, ताकि वो निवेश जारी रखें और गिरावट से डर कर, निवेश बेच कर मार्केट से बाहर न निकल जाएं.


# 2 टैक्‍स सेविंग फंड
टैक्‍स सेविंग फ़ंड को इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम (Equity Linked Savings Scheme) के नाम से भी जानते हैं. भारत में इस तरह के फ़ंड, दूसरों के मुक़ाबले ज़्यादा सुरक्षित लार्ज-कैप स्‍टॉक्‍स (Large-Cap Stocks) में निवेश करते हैं.

आपके लिए ये फ़ंड क्‍यों अच्‍छे हैं?
ये फ़ंड टैक्‍स बचाने में आपकी मदद करते हैं. इनकम टैक्‍स एक्‍ट सेक्‍शन-80C के तहत, आप एक वित्त-वर्ष (Financial Year) में ₹1.5 लाख तक की टैक्‍स छूट ले सकते हैं.

इस स्‍कीम के साथ एक शर्त है. इस स्‍कीम का लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period) तीन साल का है. इसका मतलब हुए कि एक बार निवेश करने के बाद आप अपना पैसा तीन साल के बाद ही निकाल सकते हैं. हालांकि, इस लॉक-इन से नए निवेशक को फ़ायदा होता है. ये नए निवेशक को इक्विटी के कम अवधि के तेज़ उतार-चढ़ाव का सामना करने में मदद करता है, और लंबे समय का नज़रिया अपनाने के लिए भी प्रोत्‍साहित करता है. ये इक्विटी निवेश में काफ़ी अहमियत रखता है.

म्‍यूचुअल फ़ंड कैसे काम करते हैं, इसके बारे में और विस्‍तार से जानने के लिए आप हमारे शुरू करें पेज पर जाएं. ये पेज, एक नए निवेशक के लिए ही है.

ये लेख पहली बार जनवरी 27, 2023 को पब्लिश हुआ.

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