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हारे नहीं तो जीतोगे ही

फ़ुटबॉल की तरह निवेश में अच्छा डिफ़ेंस उतने ही काम का है जितना निवेश के सही फ़ैसले लेना

हारे नहीं तो जीतोगे ही

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ये मौसम है फ़ुटबॉल का। चाहे यू-ट्यूब हो, व्हॉट्सएप हो, या फिर टेलिग्राम जैसा प्लेटफ़ॉर्म, हर जगह फ़ुटबॉल के पुराने वीडियो छाए हुए हैं। ये वीडियो गज़ब के हैं। इनमें ऐसे-ऐसे गोल हैं, जो कल्पना से परे लगते हैं। ज़ाहिर है, ये वो वीडियो हैं जिनमें फ़ुटबॉल इतिहास के एक-से-एक शानदार गोल होते हैं। और हां, एक छोटा सा नंबर उन वीडियो का भी है, जिनमें खिलाड़ियों ने गोल बचाए हैं। ये गोल बचाने वाले वीडियो भी उतने ही रोमांचक हैं। मगर, सोशल मीडिया पर गोल किए जाने वाले वीडियो के मुक़ाबले, गोल बचाने वाले वीडियो कहीं कम हैं। और ये बात समझ में भी आती है। आख़िर, फ़ुटबॉल का सबसे ज़्यादा मज़ा गोल होने वाले पल में है। गोल बचा लेना, इससे कहीं कम देखा जाता है। ऐसा ही एक वीडियो मैंने देखा, जो गोल बचाने के शानदार लम्हों का था। इसमें रक्षात्मक खिलाड़ियों ने गोल होने से ठीक पहले, अचंभे में डाल देने वाली कला से गोल बचाए थे। मेरी आंखों को (जो इसके लिए अभ्यस्त नहीं हैं) ये बचाव, गोलकीपरों के बचावों से कहीं ज़्यादा शानदार लगे, क्योंकि इनमें गोल रोकने के लिए हाथों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था और इसलिए मुझे ये ज़्यादा मुश्किल लगता है।
अपनी टीम को तयशुदा गोल से बचा लेना, फ़ुटबॉल में उतना ही मायने रखता है जितना एक गोल स्कोर कर लेना, और यही बात ज़्यादातर दूसरे खेलों के लिए भी है। क्रिकेट में तो कहावत है, 'एक रन बचाना एक रन बनाना है’। और हां, रन बनने से रोकने की सारी कोशिशें इतिहास के पन्नों में खो जाती हैं। ये किसी स्कोर-लाइन का हिस्सा नहीं होतीं, और न ही बाद में किसी को याद रहती हैं।
और जैसा कि मैं करता हूं, क्योंकि मैं हूं ही ऐसा, कि मुझे जीवन की हर बात में निवेश से कोई-न-कोई समानता दिखाई दे ही जाती है। तो आइए, अब बात करते हैं निवेश की। आप एक स्टॉक ख़रीदते हैं और बाद में उसे मुनाफ़े पर बेच देते हैं-ये आपके निवेश की कहानी का हिस्सा है। ये रिटर्न हमेशा के लिए आपके निवेश के ट्रैक-रिकॉर्ड का हिस्सा हो जाते हैं और आप इस पर फ़ख्र करते हैं। और आप इस पर तब भी गर्व करेंगे, जब आप अपना बनाया हुआ पैसा ख़र्चेंगे। ये एक शानदार गोल कहलाएगा।
तो निवेश में गोल बचाना क्या कहलाएगा? इसी की एक मिसाल कुछ इस तरह हो सकती है: आप स्टॉक ख़रीदते हैं और वो थोड़ा ऊपर जाता है, पर आपको पता चलता है कि असल में आपकी चुनी हुई कंपनी कोई अच्छा निवेश नहीं है। उसके बजाए अपना पैसा कहीं और लगाना आपके लिए बेहतर रहेगा। तो, आप अपने
शेयर बेच देते हैं। और इसके बाद स्टॉक फिर से गिरने लगते हैं, और काफ़ी गिर जाते हैं। अगर आपने पहले वाली सोच क़ायम रखी होती, तो आप अपनी काफ़ी पूंजी गंवा देते। हमारी फ़ुटबॉल की कहानी के लिहाज़ से, ये एक गोल बचाना हुआ। हालांकि, ये आपकी स्कोर-लाइन का हिस्सा तो नहीं है, मगर ये हमेशा रिकॉर्ड में रहेगा और आपका अपने इस बचाव पर गर्व करना बिल्कुल सही होगा।
अब मुझे रक्षात्मक बचाव के बारे में बात करने की इजाज़त दीजिए। कोई आपको एक स्टॉक पिच करता है, या उसका सुझाव देता है। आप इस स्टॉक को ख़रीदने की सोचते हैं, उस पर कुछ रिसर्च करते हैं, और आपको कुछ शक़ होता है। आप इस सुझाए गए स्टॉक का आइडिया छोड़ देते हैं। जल्द ही, स्टॉक क्रैश हो जाता है। बात बस इतनी सी है कि ये कभी निवेश था ही नहीं-बस आपके मन की एक चाहत थी। हालांकि, ख़ुद को उस निवेश से रोकने की असल क़ीमत उतनी ही है जितनी किसी अच्छे रिटर्न से पैसा बनाने की। अगर यही बात संक्षेप में कहें, तो इसे कुछ इस तरह कहा जाएगा: जो पैसा आपने नहीं गंवाया है, वो पैसा आपने कमाया है।
इसका आइडिया सरल है, और वो है, "नहीं हारने में जीत है।" इसका मतलब है कि बजाए गज़ब के फैसले लेने के, ग़लतियों से बचना कहीं ज़्यादा अहम है। और बहुत सारे निवेशक, निवेश के लिए स्टॉक चुनते हुए बिल्कुल टॉप परफ़ॉर्मेंस करने वाले शेयरों के दीवाने होते हैं, और हमेशा के लिए उन्हें रखे रहना चाहते हैं। बदक़िस्मती से, असल दुनिया में ऐसा होता नहीं है। उलटा ऐसे निवेशकों के साथ होता ये है कि वो निवेश के एक आइडिया से दूसरे आइडिया के बीच फ़ुटबॉल बन जाते हैं। आमतौर पर ये लोग पिछले प्रदर्शन का पीछा करते हैं और बीते हुए कल के विजेताओं को ख़रीदते रहते हैं। हमेशा इसी जुगत में लगे रहते हैं कि वो किसी तरह सबसे अच्छा विजेता चुन लें। कभी-कदार क़िस्मत से ये हो भी जाता है।
वैल्यू रिसर्च में, हमारी टीम कुछ सिद्धांतों का पालन बहुत क़रीब से करती है। स्टॉक्स के विश्लेषण की हमारी पूरी प्रक्रिया चाहे मैगज़ीन के लिए हो या हमारी वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र प्रीमियम सर्विस के लिए, ये बड़ी गहराई से स्टॉक्स को चुनने से ज़्यादा स्टॉक्स को छांटने का तरीक़ा है (elimination process)। जब हम स्टॉक चुन रहे होते हैं, तब पहले उन स्टॉक्स को निकाल देते हैं जिनमें कुछ भी ख़राब या नकारात्मक नज़र आता है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उसमें बाक़ी बातें कितनी अच्छी हैं। किसी भी स्टॉक को अपनी लिस्ट से बाहर रखने के हमारे मापदंड तय हैं, जिनका उल्लंघन नहीं किया जाता।
इससे निवेश के बाद की स्थिति बड़े आराम की हो जाती है। होता ये है कि अगर निवेश की थीसिस में कोई ग़लती हो भी जाए, तब भी कोई बड़ा नुक़सान नहीं होता। और अगर किसी वजह से चीज़ें ग़लत साबित होती हैं, या कोई बेहतर विकल्प नज़र आता है तो स्टॉक को बेचा ही जा सकता है।
निवेश में अहम बात है ख़तरे को भांपना, और समय रहते बचा ले जाना। ठीक वैसे ही जैसे फ़ुटबॉल में डिफ़ेंस का कोई खिलाड़ी किसी संभावित गोल को बचा ले जाता है।

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