
फ़रवरी 25, बर्कशायर हैथवे ने शेयरधारकों के लिए अपने चेयरमैन वॉरेन बफ़ेट की चिट्ठी जारी की. जैसा कि होता है, तुरंत ही दुनिया भर के बफ़ेट फ़ैन (जिसमें मैं भी हूं), इस चिट्ठी को डाउनलोड करने और पढ़ने में जुट गए. इस चिट्ठी का जारी होना हर सालाना जलसे जैसा है. बफ़ेट या बर्कशायर हैथवे को नहीं जानने वालों को ये बात अजीब लग सकती है. वैसे दुनिया की हर कंपनी ये परंपरा निभाती है कि कंपनियों के चैयरपर्सन अपने शेयरधारकों के लिए हर साल एक पत्र जारी करते हैं. ये पत्र ज़्यादातर उदासीन, बोरियत से भरे और बेजान होते हैं, और मुझे शक़ है कि जिनके लिए ये लिखे जाते हैं वो इन्हें कभी पढ़ते भी होंगे.
मगर, बफ़ेट की चिठ्ठियों की बात अलग है. 1977 के बाद से उनकी सभी चिट्ठियां बर्कशायर की वेबसाइट पर डाउनलोड के लिए मौजूद हैं. ये बफ़ेट के पूरे करियर का बड़ा ज़बर्दस्त रिकॉर्ड हैं. इनमें बिज़नस के मौजूदा परफ़ॉर्मेंस, आर्थिक मसलों की जानकारी होने के साथ-साथ, कामकाज पर उनका नज़रिया, उनके मज़ाकिया अंदाज़ में लिपटा होता है. इस सब में, बफ़ेट की स्नेह से भरी और इंसानियत पसंद शख़्सियत साफ़ उभरती है और ये इन चिट्ठियों को पढ़ने का अनुभव बड़ा सुखद बना देती है.
इस साल की चिट्ठी में उनका व्यक्तित्व और भी उभर कर सामने आया है. इस चिट्ठी के आख़िर में एक सेक्शन है, जिसका शीर्षक है, 'एक शानदार पार्टनर के होने से बढ़कर कुछ भी नहीं' (Nothing Beats Having a Great Partner). ये चार्ली मंगर पर लिखा उनका नोट है. इसमें समझदारी को हल्के-फुल्के मज़ाकिया अंदाज़ में एक छोटे से वाक्य में समेट देने वाले चार्ली के बारे में कई अर्थपूर्ण बातें लिखी हैं. इस सेक्शन में चार्ली की मज़ेदार बातें तो हैं ही, पर इसमें एक युग के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने का दुखद पहलू भी झलक रहा है. दरअसल, मंगर 99 साल और तीन महीने के हो गए हैं और ख़राब सेहत के दौर से गुज़र रहे हैं.
इसके अलावा भी इस चिट्ठी में पढ़ने की बहुत सी दिलचस्प बातें हैं. 'हम क्या करते हैं' (What We Do) नाम का सेक्शन, बफ़ेट और मंगर द्वारा बर्कशायर का बिज़नस चलाने के लिए चुने गए लोगों की बात करता है. बफ़ेट कहते हैं, "जिस बिज़नस को हम कंट्रोल करते हैं हम उसमें पैसे लगाते हैं, आमतौर पर इनमें से हरेक को 100% ख़रीद लिया गया है. बर्कशायर इन सब्सीडिरीज़ में कैपिटल का एलोकेशन तय करता है और सीईओ चुनता है जो रोज़मर्रा के फ़ैसले लेते हैं. जब ब़डे एंटरप्राइज़ मैनेज किए जाते हैं, तब भरोसा और नियम दोनों ज़रूरी हो जाते हैं. बर्कशायर में सबसे ज़्यादा - कुछ लोग इसे अति कहेंगे - दूसरे पहलू पर ज़ोर दिया जाता है. कई बार इसमें निराशा भी हाथ लगती है. पर हम बिज़नस में होने वाली ग़लतियां समझते हैं; पर व्यक्तिगत हेराफेरी सहन करने की हमारी क्षमता शून्य है."
हर इक्विटी निवेशक को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में गड़बड़ के लिए सहनशीलता शून्य होनी चाहिए. इस बात ने मेरी सोच को भी प्रभावित किया क्योंकि इक्विटी विश्लेषकों को लेकर मेरा अनुभव भी ऐसा ही रहा. बुनियादी तौर पर वैल्यू रिसर्च में, हमारी स्टॉक इन्वेस्टिंग मैगज़ीन 'वैल्थ इनसाइट' और स्टॉक रेकमेंडेशन सर्विस 'वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र' को लेकर हमारा नियम भी बफ़ेट जैसा ही है. मान लीजिए अगर कंपनी के प्रमोटरों या सीनियर मैनेजमेंट की व्यक्तिगत हेराफेरी के व्यवहार का कोई सबूत मिलता है, तो उसे निवेश के लिए कभी नहीं चुना जाना चाहिए. चाहे उसमें निवेश के कितने ही बड़े और लुभावने कारण नज़र आ रहे हों.
मैंने ये सीख अनुभव से हासिल की है. एक विचार के तौर पर तो मैंने हमेशा ही इसमें विश्वास किया था, मगर अपने शुरुआती दिनों में कई बार मैं इस मामले में ज़रा नर्म रवैया अपना लेता था. जब कोई बहुत ही अच्छा निवेश का मौक़ा नज़र आता, तो मैं कहता, "ये एक शानदार बिज़नस है, क्या हुआ अगर प्रमोटर शेयरधारकों से थोड़ा सा चुरा लेता है—कई लोग ऐसा करते हैं. इस बार हम नज़रअंदाज़ कर सकते हैं." हालांकि, ये कभी काम नहीं करता. जो अपने शेयरधारकों को धोखा दे सकता है, उसे ये पता ही नहीं होता कि रुकना कहां है. जब भी हमने ऐसा कोई समझौता किया, हमने खता खाई.
बरसों के अनुभव से परिपक्व हो कर, अब हमारा रवैया बिल्कुल उलट है. वैल्यू रिसर्च में इक्विटी रिसर्च के काम में हमने कुछ सीमाएं तय की हैं जिन्हें हम किसी हालत में नहीं लांघते—और इनमें बिज़नस मैनेजरों के व्यवहार में नैतिकता का स्टैंडर्ड सबसे ऊपर आता है. एक बार के लिए आप किसी बुनियादी बात पर समझौता कर भी सकते हैं, जैसे कि किसी स्टॉक का बेहद आकर्षक वैल्युएशन, मगर किसी व्यक्ति का ग़लत व्यवहार, कभी माफ़ नहीं किया जा सकता.
ये वो सिद्धांत है जिसे सभी इक्विटी निवेशकों को मानना ही चाहिए—अगर वो निराशा से दूर रहना चाहते हैं.






