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एक आज़ाद इन्वेस्टर

आप अपने फ़ायदे का काम करने के लिए आज़ाद हैं या कोई और आपको कंट्रोल करता है?

एक आज़ाद इन्वेस्टर

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एक आज़ाद इंसान को कोई भी पसंद नहीं करता. सभी संस्थान (या किसी भी तरह के संगठन) चाहते हैं कि जिन लोगों से उनका लेना-देना है, वो उनकी गाइडेंस और उनके कंट्रोल में ही रहें. क्या ये बात किसी गुरु की कही हुई लगती है? अगर ऐसा है, तो अचरज की कोई बात नहीं, क्योंकि ओशो ने ये बातें कई बार कही हैं.

अब आपका सवाल होगा कि मैं इसके बारे में क्यों बात कर रहा हूं. इसका पर्सनल फ़ाइनांस से क्या लेना-देना है? काफ़ी है, और आप ख़ुद देखेंगे. मैं पहले कही गई बात अब दूसरी तरह से कहता हूं ताकि वो पर्सनल फ़ाइनांस पर ज़्यादा फ़िट बैठे. कोई भी बिज़नस, जिनके ज़रिए आप अपना निवेश करते हैं वो आज़ाद सोच वाले इंसानों को पसंद नहीं करते. वो सब के सब आपको अपनी गाइडेंस और कंट्रोल में रखना चाहते हैं. अगर आप आज़ादी से अपने निवेश और इंश्योरेंस के फ़ैसले लेने लगें, और आपके फ़ैसलों का आधार सिर्फ़ आपके हित हों, तो ये लोग आपसे उतने ही पैसे बना पाएंगे जितने सही होंगे. और फिर, अगर बहुत से लोग आपकी नकल करने लगेंगे, तो कई बिज़नस या तो ठप्प पड़ जाएंगे या उन्हें बिज़नस करने के अपने तरीक़े सिरे से बदलने पड़ जाएंगे.

अब देखते हैं कि ये आज़ाद व्यक्ति क्या-क्या करेगा? ये आज़ाद शख़्स, सुरक्षा के लिए टर्म प्लान के अलावा और कोई दूसरा इंश्योरेंस नहीं लेगा. निवेश के लिए, थोड़े से डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स को डायरेक्ट प्लान के ज़रिए ही चुनेगा, लगातार निवेश जारी रखेगा, और शायद ही उसमें कभी कुछ बदलेगा. वक़्त के साथ ये व्यक्ति, अपने साथ-साथ दूसरों के मुनाफ़े को ज़्यादा-से-ज़्यादा बढ़ा पाएगा, यानी उन लोगों के लिए भी जो उसे फ़ाइनेंशियल सर्विस देते हैं या इंटरमीडियेरी के तौर पर काम करते हैं.

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ऐसे व्यक्ति की निवेश के किसी नए तड़कते-भड़कते आइडिया में कोई दिलचस्पी नहीं होगी. वो इंटरमीडियेरी जो सलाह का ढोंग करते हैं, जैसे - ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचना जिनमें नाममात्र का इंश्योरेंस हो, और इसके अलावा नए-नए ख़तरनाक टाइप के मौसमी निवेशों से भी कोसों दूर रहेगा. एक आज़ाद व्यक्ति, मार्केट की उठा-पटक के शोर में पड़ने के बजाए चुपचाप और स्थिरता वाली ग्रोथ को ज़्यादा पसंद करेगा. उसकी स्ट्रैटजी का आधार होगा धीरज, अनुशासन, और सरलता—जिससे उसे चैन की नींद आ सके. वो ये बख़ूबी जानेगा कि उसका पैसा शांति से काम पर लगा हुआ है, और कंपाउंडिंग की ताक़त उसकी पूंजी बढ़ा रही है.

कुल मिला कर इस शांति का मतलब हुआ, निवेश की अच्छी समझ. ये कोई बच्चों की कहानी नहीं है. इसका एक मक़सद है: इस बात की अहमियत को बचतकर्ता और निवेशक समझें कि चीज़ों किस तरह काम करती हैं. बैंकिंग, इंश्योरेंस, स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फ़ंड हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए एक ब्लैक बॉक्स की तरह होते हैं. इसलिए, हमें ज़्यादातर लोगों के फ़ैसलों की वजह समझ में ही नहीं आती. किस तरह ये चीज़ें काम करती हैं इसका एक साइकोलॉजिकल मॉडल तैयार किए बग़ैर, आप इन मुश्किलों का सामना नहीं कर सकते. मैंने कहीं पढ़ा था कि जब इग्निशन में चाभी घुमाने पर कार शुरू नहीं होती तो ज़्यादातर ड्राइवर, उसे और ज़ोर से घुमाते हैं. उन्हें लगता है कि चाभी ज़ोर से घुमाने पर इंजन स्टार्ट हो जाएगा. जबकि चाभी एक इलेक्ट्रिकल स्विच है. ये उसी तरह है कि बिजली का स्विच ज़ोर से दबाया जाए ताकि बल्ब ज़्यादा तेज़ी से जलने लगे. अगर आपको कोई बात समझ में नहीं आती फिर भी आप उस काम को कर सकते हैं, मगर बगैर समझे हुए आप किसी मुश्किल को सुलझा नहीं सकते हैं.

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हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए पर्सनल फ़ाइनांस सर्विस को समझना एक मुश्किल पहेली सुलझाना है, उनके लिए ये कारों को समझने से कहीं ज़्यादा मुश्किल काम है. अगर हम ये समझ जाएं कि कोई सर्विस कैसे काम करती है, उसे देने वाला कौन है, कौन बेच रहा है, वो पैसे किस तरह से बनाते हैं और कैसे आगे भी हमसे पैसे बनाएंगे, और ख़ासतौर पर, हम उनकी स्कीम में कहां फ़िट होते हैं, उसके बाद ही हम बेहतर फ़ैसले ले सकते हैं. ये बात अच्छी तो नहीं है, पर सामने वाले व्यक्ति या संगठन को एक विरोधी की तरह ही देखना चाहिए.

अगर आप अपने हित में काम करने के लिए आज़ाद हैं और दूसरों के हितों में काम करने को लेकर बरगलाए जाने से भी आज़ाद हैं, तो आपको ये करना ही होगा. ये आज़ादी की क़ीमत है.

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