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निफ़्टी से पिछड़ रहा है जूनियर निफ़्टी

पर हमारे रेकमेंड किए पैसिव फ़ंड मज़बूती की राह पर बने हुए हैं

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भारत के लार्ज-कैप स्टॉक्स की दुनिया की टॉप-100 कंपनियों में से निफ़्टी 50 के बाद की कंपनियां, निफ़्टी नेक्स्ट 50 TRI कंपनियां होती हैं. जहां निफ़्टी नेक्स्ट 50 TRI लंबे समय तक होल्ड करने के दौरान निफ़्टी 50 से बेहतर प्रदर्शन करता है, वहीं नोट करने वाली बात है कि इसमें उतार-चढ़ाव भी ज़्यादा आते हैं. निफ़्टी नेक्स्ट 50, 2018 के बाद से, निफ्टी 50 से कमज़ोर प्रदर्शन कर रहा है. जो 2020 के पांच साल के रोलिंग रिटर्न से स्पष्ट होता है. पिछले एक साल में, निफ़्टी नेक्स्ट 50 TRI उम्मीद के विपरीत, सीनियर इंडेक्स, निफ़्टी 50 से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया. यहां तक कि ये अपने जैसे औसत एक्टिव लार्ज-कैप से बेहतर प्रदर्शन भी नहीं कर पाया. हालांकि, इस सुस्त प्रदर्शन के लिए आप अडानी-हिंडनबर्ग मामले को ज़िम्मेदार मान सकते हैं. अडानी-हिंडनबर्ग मामला निफ़्टी 50 इंडेक्स का नेचर पैसिव होने के कारण ही पिछले साल इसके प्रदर्शन पर असर पड़ा. प्राइस में आयी बड़ी गिरावट की वजह से, अडानी ग्रुप के छह स्टॉक, जो दिसंबर 2022 के अंत तक जूनियर निफ़्टी का क़रीब 10.8 फ़ीसदी हुआ करते थे, अगले कुछ महीनों में गिर कर 3.7 फ़ीसदी रह गए. दरअसल, निफ़्टी की तुलना में इंडेक्स की कंपनियों का वेटेज बराबरी से बैलेंस है, इसलिए किसी भी एक कंपनी के प्राइस में बहुत बड़ा बदलाव आने पर पूरे इंडेक्स के प्रदर्शन पर इसका असर होता है. इससे इंडेक्स में उतार-चढ़ाव भी ज़्यादा होता है. इसकी कंपनियों और टॉप और बॉटम परफ़ॉर्म करने वालों में बदलाव मार्च 2023 में एंट्री एग्ज़िट बंधन बैंक ABB इंडिया बायोकॉन अडानी विल्मर ग्लैंड फ़ार्मा केनरा बैंक एमफ़ेसिस पेज इंडस्ट्रीज़ वन 97 कम्यूनिकेशन्स वरुण बेवरेजेज़

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