
हाल के एक सर्कुलर में, SEBI ने घोषणा की है कि म्यूचुअल फ़ंड हाउस अब, ESG यानी इनवायरमेंट, सोशल और गवर्नेंस वाली कैटेगरी के फ़ंड्स में एक से ज़्यादा इक्विटी स्कीम लॉन्च कर सकेंगे.
हालांकि, सभी ऐसे फ़ंड हाउस को इन स्कीमों को एक-दूसरे से अलग रखने के लिए कहा गया है. उनके लिए निवेश स्ट्रैटेजी और एसेट एलोकेशन के लिए ज़्यादा बेहतर डिसक्लोज़र भी ज़रूरी है.
नई सब-कैटेगरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं. ये ऐलान SEBI द्वारा मार्च, 2023 में जारी कंसल्टेशन पेपर का फ़ॉलो-अप है.
इसका क्या मतलब है?
- फ़ंड हाउस अब और ज़्यादा फ़ंड लॉन्च कर सकेंगे. हालांकि, निवेशकों के लिए फ़ंड्स की पहले से ही लंबी लिस्ट में से फ़ंड चुनना अब और ज़्यादा कंफ्यूजन वाला हो जाएगा.
- वैल्यू रिसर्च में, हमारी हमेशा ही ये सलाह है कि आमतौर पर थीमेटिक और सेक्टोरल फ़ंड्स से बचना चाहिए.
- अगर आप अभी भी इन फ़ंड्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो लॉन्च होने वाली किसी भी नई स्कीम में निवेश करने से पहले थोड़ा इंतज़ार करें और फिर निवेश करें.
चलिए, इस नई ख़बर पर वापस आते हैं. नई ESG स्क़ीमें छह अलग-अलग स्ट्रैटेजी के आधार पर लॉन्च की जाएंगी.
ये भी पढ़िए- Mutual Funds जिन्हें अभी भी मिल रहा है इंडेक्सेशन बेनेफ़िट
ये हैं 6 स्ट्रैटजी
- ESG से जुड़ी कुछ एक्टिविटी, बिज़नस प्रैक्टिस या बिज़नस सेग्मेंट के बेस पर सिक्योरिटी को छोड़ना या अलग करना. स्ट्रैटेजी में एक्सक्लूज़न के टाइप, इसकी शर्तें या सीमा, और एक्सक्लूज़न का क्राइटेरिया तैयार करने या वैलुएशन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोई भी क़ानून, रेगुलेशन या फ़्रेमवर्क साफ़ होना चाहिए.
- निवेश के रिस्क और रिटर्न के लिहाज से अहम ESG संबंधी फ़ैक्टर्स पर आधारित सिक्योरिटीज को पारम्परिक फ़ाइनेंशियल फ़ैक्टर्स के साथ जोड़ना.
- ESG से जुड़े एक या ज़्यादा परफ़ॉर्मेंस मेट्रिक्स पर बाकियों के मुक़ाबले बेहतर परफ़ॉर्म करने वाली कंपनियों और इश्युअर्स की बेस्ट-इन-क्लास और पॉज़िटिव स्क्रीनिंग. इन मेट्रिक्स की डिटेल और ख़ासियतों का खुलासा किया जाना चाहिए.
- नॉन-फ़ाइनेंशियल (रियल वर्ल्ड) इम्पैक्ट की तलाश के लिए निवेश को प्रभावित करें और आकलन करें कि क्या इस प्रभाव को मापा और मॉनिटर किया जा रहा है.
- सेक्टर्स, इंडस्ट्रीज़ या कंपनियों में निवेश करने के पक्के इरादे जो लॉन्ग टर्म मैक्रो या स्ट्रक्चरल ESG से जुड़े ट्रेंड से फ़ायदा उठा सकते हैं
- कंपनियों और इश्युअर्स में ट्रांज़िशन या ट्रांजिशन से जुड़े निवेश जिनका लक्ष्य पॉजिटिव और मापे जाने योग्य सामाजिक और पर्यावरण संबंधी बदलाव लाना है.
इसके अलावा, AUM का न्यूनतम 80 फ़ीसदी इक्विटी और इक्विटी से संबंधित विकल्पों में निवेश किया जाएगा. बाक़ी 20 फ़ीसदी विकल्पों में निवेश किया जा सकता है, जब तक कि निवेश स्कीम की स्ट्रैटजी के विपरीत न हो.
ESG स्क़ीम के लिए अपने AUM का कम से कम 65 फ़ीसदी लिस्टिड कंपनियों में निवेश करना ज़रूरी है जो BRSR कोर डिस्क्लोज़र का भरोसा देता है. ये शर्त 1 अक्टूबर, 2024 से लागू होगी.
जो ESG स्कीम्स 1 अक्टूबर, 2024 तक इन शर्तों या मानकों को पूरा नहीं करती हैं, उन्हें 30 सितंबर, 2025 तक इन्हें पूरा करना होगा. इस दौरान, ये स्कीम केवल BRSR कोर वाली कंपनियों में नया निवेश कर सकती हैं.
ये भी पढ़िए- Debt Fund: आपके लिए कौन सा डेट फ़ंड बेहतर है?
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]
