
इस साल एक सुस्त शुरुआत हुई जो उत्साह से भरी वापसी में बदल गई. हाल ही में भारतीय मार्केट ने ऑल-टाइम-हाई का आंकड़ा छू लिया, और निवेशकों के पोर्टफ़ोलियो ने भी रंग बदला और हरे-भरे हो गए. आइए अब विस्तार से देखते हैं कि इस साल 'ग्रोथ फ़ंड्स' ने क्या गुल खिलाए और वो कौन से ट्रेंड हैं जो इन पर अपना रंग छोड़ रहे हैं. पर आगे बढ़ने से पहले, आपको बता दें कि हम "ग्रोथ' फ़ंड्स को फ़्लेक्सी-कैप (जिनमें फ़ोकस्ड फ़ंड शामिल हैं), लार्ज और मिड-कैप और वैल्यू-ओरिएंटेड फ़ंड्स (जिनमें कॉन्ट्रा भी हैं) जैसी कैटेगरी से चुनते हैं. लंबे समय में ग्रोथ और वैल्थ खड़ी करने के लिए इनका इन्वेस्टिंग स्टाइल, इन्हें आपके पोर्टफ़ोलियो के मुख्य निवेश के लायक़ बनाता है. एक्टिव फ़ंड्स ने बाज़ी मारी इस वक़्त, एक्टिव फ़ंड के निवेशकों के पास ख़ुशियां मनाने के एक से ज़्यादा कारण हैं. कई कैटेगरी जो हमारे 'ग्रोथ' लिस्ट के कवरेज में शामिल हैं, उनमें से ज़्यादातर एक्टिव फ़ंड्स ने अब तक 2023 में इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है. उन्होंने 3-5 प्रतिशत का एवरेज एल्फ़ा दिया है. ये बेहतर प्रदर्शन, पैसिव इन्वेस्टिंग के ख़िलाफ़ एक मज़बूत तर्क खड़ा करता है. ये दिखाता है कि फ़ंड मैनेजर की महारत मायने रखती है. ग्रोथ स्टाइल की वापसी कोविड के बाद, वैल्यू स्टाइल वापस फ़ैशन में आ गया था और ग्रोथ स्टाइल के मुक़ाबले काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया था. हालांकि, इस साल, ग्रोथ-स्टाइल फ़ंड्स ने भी वापसी की. इसलिए, निवेशकों को फ़ायदा हुआ है, फिर चाहे इस कैटेगरी के किसी भी स्टाइल में उनका निवेश रहा हो. लॉन्ग-टर्म के आधार पर, दोनों स्टाइल ने एक जैसे नतीजे दिए हैं, मगर वो अपने सालाना प्रदर्शन में बड़े तौर पर सायक्लिकल रहे हैं. इसलिए, ये बेहतर होगा कि इन दोनों स्टाइल की इन्वेस्टिंग में से किसी एक में निवेश करने के बजाए आपके पोर्टफ़ोलियो में ग्रोथ/GARP और वैल्यू/कॉन्ट्रा स्टाइल के फ़ंड शामिल हों. इससे आपको किसी एक निवेश के स्टाइल में आने वाले उतार-चढ़ाव को बैलेंस करने में मदद मिलेगी. ये भी पढ़िए- ज़्यादा स्टॉक ख़रीदने वाले म्यूचुअल फ़ंड, अच्छे होते हैं या ख़राब? डाइवर्सिफ़ाइड और फ़ोकस्ड फ़ंड्स के बीच चुनाव करना एक और महत्वपूर्ण तरीक़े का स्टाइल डाइवर्सिफ़िकेशन है. फ़ोकस्ड फ़ंड अपने पोर्टफ़ोलि
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