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क़रीब-क़रीब अच्छे स्टॉक की समस्या से कैसे निपटें

क्या होनी चाहिए आपके स्टॉक सलेक्शन की स्ट्रैटजी

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सीमित ओवरों का मैच जीतने के लिए खेलने वाली क्रिकेट टीम की तरह, कई निवेशकों को लगता है कि स्टॉक चुनने में आक्रामक होना एक महान गुण है. हालांकि, हम सभी ने विश्व कप देखते समय महसूस किया ही होगा, असरदार आक्रामकता के नतीजे मिलते हैं, पर हर चीज़ को हिट करने की कोशिश से नहीं बल्कि ये तय करने से कि क्या हिट करना है और क्या नहीं. स्टॉक भी ऐसे ही होते हैं. 'वेल्थ इनसाइट' के दिसंबर 2023 अंक की हमारी कवर स्टोरी में, हमने एक दिलचस्प विचार तलाशा है जो सभी इक्विटी निवेशकों के लिए आकर्षक होना चाहिए. और ये विचार है - जो इन्वेस्टमेंट के लिए सेफ़्टी-फ़र्स्ट की अप्रोच लगती है, वो असल में प्रॉफ़िट-फ़र्स्ट की अप्रोच है.

अच्छे स्टॉक हैं, और बुरे स्टॉक भी हैं. इनमें से कोई भी समस्या नहीं है. अच्छे स्टॉक निवेशकों के लिए पैसा बनाते हैं; ख़राब शेयरों को पहचानना आसान होता है, और इस तरह से, समझदार निवेशक उनसे आसानी से बचने में क़ामयाब हो जाते हैं. समस्या 'लगभग अच्छे' शेयरों के मामले में होती है.

जब हम निवेश शुरू करते हैं - चाहे वो किसी भी तरह का हो - तो सबसे पहली बात होती है कि उन्हें दो कैटेगरी में रख लें, बुरे और बाक़ी, और दोबारा मुड़ कर बुरे वाले की तरफ़ न देखें. यहां तक तो सब ठीक है. हर कोई ऐसा करता है. मगर नहीं, ये सच नहीं. हर कोई ऐसा नहीं करता. निवेश में पारंपरिक ज्ञान सबसे अच्छे मौक़े खोजने पर ध्यान केंद्रित करना है - स्टॉक, फ़ंड, या एसेट जिनमें बेहतर प्रदर्शन करने की संभावनाएं होती हैं. क़िताबों और वेबसाइटों जैसे रिसोर्स में निवेश ज़्यादातर विजेताओं को चुनने के लिए किया जाता है. सतही तौर पर, ये बात समझ में आती है - अच्छे निवेश रिटर्न पैदा करते हैं, इसलिए उन्हें पहचानना प्राथमिकता होनी चाहिए.

हालांकि, सबसे कुशल निवेशक एक अलग नज़रिया अपनाते हैं. अच्छे शेयरों की खोज से शुरुआत करने के बजाय, वे पहले बाक़ी शेयरों से बचने पर ध्यान केंद्रित करते हैं. उनकी बड़ी चिंता, उन निवेशों को छांटने और खत्म करने की होती है जिनसे पैसा गंवाया जा सकता है, जो अच्छे होने का आभास तो देते हैं लेकिन कुछ चेतावनी के साथ. ये रक्षात्मक रुख़ किसी भी निवेश के लिए अहम है. अच्छे विकल्पों की तलाश करने से पहले ख़राब विकल्पों को ख़त्म करने का ये सिद्धांत सिर्फ़ निवेश ही नहीं जीवन की के हर पहलू पर लागू होता है.

निवेश के मास्टर माने जाने वाले लोग इसी तरह का नेगेटिव ओरिएंटेशन रखते हैं. असाधारण मौक़ों की तलाश करने से पहले, वो चेतावनी के संकेत और लाल झंडों को दिखाने वाली स्क्रीन डवलप करने पर ध्यान देते हैं. सबसे पहले, वो चुनाव के प्रोसेस को आसान बनाते हैं और ऑबजेक्टिव तरीक़े से रिस्की या ओवर-वैल्यू इन्वेस्टमेंट्स को हटा कर अपना कैपिटल सुरक्षित करते हैं. ये अनुशासन और धीरज उन्हें तब फ़ायदा देता है जब क्वालिटी वाले सौदे सामने आते हैं. संक्षेप में कहें, तो एक अच्छी आक्रामकता और उससे ज़्यादा क़ारगर बचाव से शुरू होती है. सबसे अच्छे निवेशक इसे बख़ूबी समझते हैं, और ये बात उनको मिलने वाले नतीजों में झलकती है, ठीक वैसे ही जैसे बेस्ट क्रिकेटरों के साथ होता है.

कुछ समय पहले, मैंने समीर अरोड़ा का इंटरव्यू लिया था, जिन्होंने भारतीय म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री में अपनी दूसरी पारी में हेलिओस म्यूचुअल फ़ंड लॉन्च किया है. 1990 के दशक में, भारत के उदारीकरण के बाद हुई म्यूचुअल फ़ंड सेक्टर की शुरुआत में, अरोड़ा भारत में एलायंस म्यूचुअल फ़ंड में सीआईओ थे.

अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ साल में उन्होंने आठ फ़ैक्टर्स की पहचान की है, जो किसी स्टॉक के इवैल्युएशन के शुरुआती प्वाइंट हैं. ये मैनेजमेंट क्वालिटी, प्रॉफ़िट देने की क्षमता, ग्रोथ, वैल्युएश जैसे काफ़ी स्पष्ट क़िस्म के फ़ैक्टर हैं. हालांकि, महत्वपूर्ण ये है कि इन्हें शुरुआती इंडिकेटर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता, कि किसी स्टॉक में निवेश करना है या नहीं, बल्कि ये जानने के लिए किया जाता है कि किस स्टॉक में निवेश से बचना है. ये दोनों बातें समान नहीं है. ये फ़ैक्टर, आगे बढ़ें या नहीं बताने के इंडीकेटर हैं. अरोड़ा के काम करने के तरीक़े को लेकर महत्वपूर्ण ये है कि अगर कोई कंपनी इनमें से किसी एक फ़ैक्टर में पिछड़ती है, तो उसका स्टॉक लिस्ट से बाहर हो जाता है, भले ही दूसरे पहलू कितने भी शानदार क्यों न हों. इसका स्पष्ट उदाहरण देखने के लिए, वैल्युएशन को लेते हैं. बहुत सारी महान कंपनियां हैं जिन्हें हर तरह से गज़ब का निवेश कहा जाएगा, सिवाय इसके कि उनके शेयरों की क़ीमत बहुत ज़्यादा है, यानी वैल्युएशन बहुत ज़्यादा है. इसका मतलब है कि उन्हें छुआ नहीं जा सकता.

ऐसी अनुशासित रणनीति तय कर देती है कि निवेशक नुक़सान से बच जाएं, फिर चाहे शुरुआत में ऐसे निवेश कितने ही आकर्षक क्यों न लगें. 'वेल्थ इनसाइट' दिसंबर 2023 अंक की हमारी कवर स्टोरी इसी पर केंद्रित है जो निवेशकों द्वारा की जाने वाली इस तरह की कुछ ख़ास ग़लतियों के बारे में बात करती है. आप उनके बारे में सब कुछ जानें और उनसे बचें रहें.

ये भी पढ़िए: एक ही सिक्के के दो पहलू

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