
इस साल, एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स ने साबित कर दिया कि उनमें अभी भी दम बाकी है. पिछले कुछ सालों में, कई रेग्युलेटरी बदलावों की वज़ह से लार्ज-कैप सेक्टर के एक्टिव फ़ंड्स अच्छा रिटर्न देने में नाक़ाम रहे. हालांकि, इस साल की ब्रॉड-बेस्ड रैली ने न सिर्फ़ उनमें जान फूंक दी, बल्कि BSE 100 इंडेक्स से 170 बेसिस पॉइंट्स (1.7 फ़ीसदी) से आगे निकलने में भी उनकी मदद की है. भले ही, लार्ज-कैप फ़ंड्स का स्टैंडअलोन रिटर्न के मामले में इस साल प्रभावशाली प्रदर्शन रहा, लेकिन वे मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट से पीछे ही रहे, जिन्होंने उनसे दोगुना रिटर्न दिया है. फिर भी, कंज़रवेटिव इक्विटी निवेशकों या नए निवेशकों के लिए लार्ज कैप सेगमेंट अब भी अच्छा विकल्प है क्योंकि उनमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड्स की तुलना में कम उतार-चढ़ाव होता है. पैसिव फ़ंड्स में निवेशकों की ज़्यादा दिलचस्पी पिछले कुछ सालों में एक्टिव फ़ंड्स के कमज़ोर प्रदर्शन और स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के बेहतरीन प्रदर्शन की वज़ह से, पिछले छह महीनों में एक्टिव फ़ंड्स में अच्छा-ख़ासा ऑउटफ्लो देखा गया. यही वजह है कि इंडेक्स फ़ंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी और इनफ्लो बरक़रार है. पिछले छह महीनों में एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स में ऑउटफ्लो देखा गया अवधि एक्टिव फ़ंड्स का नेट फ्लो (करोड़ ₹) इंडेक्स फ़ंड्स का नेट फ्लो (करोड़ ₹) Jan'23 - May'23 289 6654 Jun'23 - Nov'23 -2777 7329 Dhanak (धनक) के एस्टिमेट्स के आधार पर अपने लार्ज-कैप निवेश के लिए पैसिव तरीक़ा चुनना गलत नहीं है, पर एक ब्रॉडर इंडेक्स के साथ बने रहें और फ़ैक्टर-बेस्ड पैसिव फ़ंड्स (जिन्हें स्मार्ट-बीटा फ़ंड्स नाम से भी जाना जाता है) से दूर रहें. इन फ़ंड्स का दायरा सीमित होता है, और ये उस सेगमेंट में निवेश करने जैसा है जो बेवज़ह अस्थिर हो सकता है. इसके अलावा, ये पता लगाना मुश्किल होता है कि किस साल कौन सा फ़ैक्टर सबसे बेहतर साबित होगा. एक हालिया इंटरव्यू में, मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के इक्विटी को-हेड गौरव मिश्रा ने भी यही बात कही. ये भी पढ़िए- एक्सिस ब्लूचिप के ख़राब प्रदर्शन की वजह? स्मार्ट-बीटा फ़ंड्स को लेकर गौरव मिश्रा की राय: सच कहूं तो, इसमें काफ़ी कुछ मैन्युफैक्चरर
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