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एक भावनाहीन सिस्टम

इक्विटी निवेशकों के लिए एक तरीक़ा जिससे वो बाहरी शोर और अपनी भावनाओं को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं

an-emotionless-systemAnand Kumar

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दुनिया में लगभग अनंत जानकारियां हैं, और इनमें से ज़्यादातर असल में जानकारी नहीं है. इसमें काफ़ी कुछ केवल झूठ है, मगर जहां तक निवेश से जुड़ी जानकारियों की बात है, उसमें ये कोई समस्या नहीं है. असली ख़तरा उस जानकारी से होता है जो सच हो, मगर बेकार की हो या नुक़सान देने वाली हो. चौंक गए? आप सोच रहे हैं कि सही और सच्ची जानकारी बेकार या नुक़सान पहुंचाने वाली और ख़तरनाक कैसे हो सकती है?

यहां एक उदाहरण है जो मुझे सही लगता है: उन शेयरों की लिस्ट जो पिछले एक दिन या एक महीने में सबसे ज़्यादा बढ़े हैं, या, आसान शब्दों में कहें तो, जिन शेयरों में गति रही है. सरसरी तौर पर ऐसी लिस्ट बड़े काम की लगती है - आख़िर, इन शेयरों ने हाल ही में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, तो क्या उन्हें भविष्य के लिए अच्छा निवेश नहीं होना चाहिए? ऐसा ज़रूरी नहीं है. मिसाल के तौर पर, जिन शेयरों में हाल ही में तेज़ी आई है, उनमें अटकलों, अफ़वाहों और साथ ही पंप-एंड-डंप के कारण शॉर्ट-टर्म में प्राइस बढ़ सकते हैं. प्राइस ज़्यादा हो सकता है - और अक्सर होता भी है - जब प्राइस के बढ़ने के साथ वैल्यू बढ़ती है. मगर ये मुनाफ़ा अक्सर तेज़ी से पलट जाता है, जिसमें बड़े-बड़े निवेशक फंस जाते हैं. इसलिए भले ही वैल्यू का इतिहास तथ्यात्मक तौर पर सही है, मगर उससे इस बात की कोई जानकारी नहीं मिलती कि आगे भी फ़ायदे की संभावना है या नहीं. बड़ा ख़तरा ये है कि आकर्षक-सी लगने वाली लेकिन बेकार की जानकारी निवेशक की मदद करने के बजाय समय और ध्यान दोनों को बर्बाद करती है.

बेशक़, ये केवल एक मिसाल है. इक्विटी निवेशक को जिस शोर का सामना करना पड़ता है वो तो अंतहीन है. दोस्तों से स्टॉक टिप्स, सनसनीखेज़ हेडलाइन, ताज़ा गर्मा-गर्म रुझान - हर किसी के पास और हर बात में अगले महान निवेश की राय होती है. फिर भी इस जानकारी में से ज़्यादातर में किसी कड़ाई या सार, या विधि का अभाव है. यही मुद्दे सोशल मीडिया पंडितों और राय बेचने वालों पर भी लागू होते हैं. सबसे आक्रामक आवाज़ें सनसनीखेज़ और एकतरफ़ा तरीक़े से ध्यान खींचा करती हैं. असल में, ये कुछ नहीं देतीं सिवाए उसे जिसे मैं 'डिसइन्फ़ोटेनमेंट' (disinfotainment) कहूंगा. कई सालों के दौरान (असल में कई दशक) उस शोर को देखते हुए जो मायने रखने वाली जानकारियों को दबा देता है, उन्हें लेकर मैंने कुछ आम बातें नोटिस की हैं. ज़्यादातर सतही फ़ाइनेंशियल जानकारियों का मक़सद हमारी - रुझानों का पीछा करने करने की आदत का फ़ायदा उठाना, डेटा की पुष्टि को लेकर हावी होना, या किसी घटना के बाद प्राइस के घटने-बढ़ने को तर्कसंगत बनाने के लिए नैरेटिव गढ़ने के हमारे स्वभाव के साथ खेलना है.

ये भी पढ़िए- एक नई शुरुआत

असल में निवेशकों को भावनाओं में बह कर प्रतिक्रियाओं के आधार पर नहीं बल्कि तथ्य के आधार पर निवेश के ढांचे के साथ शुरुआत करने की ज़रूरत है, जो शुरुआती प्वाइंट के तौर पर हर एक स्टॉक के लिए तेज़ी से क्वालिटी की जांच कर सके. बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित रेटिंग सिस्टम इस भूमिका में आदर्श होगा, बशर्ते इसमें किसी इंसान की राय की कोई भूमिका न हो. ये पूरी तरह से नंबरों पर आधारित हो. ऐसा सिस्टम एक उद्देश्य, नियम आधारित मॉडल के ज़रिये क्वालिटी और उससे भी ज़्यादा अहम, क्वालिटी की कमी को उजागर करने के लिए बड़ी संख्या में स्टॉक के पूरे यूनिवर्स को फ़िल्टर कर सकता हो. महत्वपूर्ण मेट्रिक्स को छान कर, निवेशक फ़ाइनेंशियल ताक़त को एक नज़र में समझ सकता हो. बड़ी बात ये है कि मानदंडों का एक स्टैंडर्ड सेट होना चाहिए जो भावनाओं के बिना लागू किया जाए. बहुत सारे डेटा को एक ढांचे में प्रोसेस करने में मानवीय फ़ैसले स्वाभाविक रूप से ख़राब हैं.

बेशक, रेटिंग सिस्टम सिर्फ़ एक शुरुआती प्वाइंट है - हज़ारों शेयरों को जल्दी से लिस्ट करने का एक तरीक़ा है. उसके बाद नंबरों में खो जाने के बजाय ज्ञान और सामान्य ज्ञान के साथ उन संकेतों की रचनात्मक व्याख्या करना आएगा.

तो, क्या ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद है, कम से कम भारतीय शेयरों के लिए? ख़ैर, अब ये हो सकता है!

तीन दशक पहले, हमने वैल्यू रिसर्च में इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर अपनी म्यूचुअल फंड रेटिंग लॉन्च की थी. इन दशकों के दौरान, लाखों भारतीय निवेशकों ने निवेश के उद्देश्य से अच्छे फ़ंड चुनने के लिए हमारे रेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया है और, उतने ही महत्वपूर्ण रूप से, उन ख़राब फ़ंड्स से बचने के लिए भी, जिनसे उन्हें लुभाया गया था. अब, हम अपने नए स्टॉक रेटिंग सिस्टम में वही सिद्धांत और नज़रिया लाए हैं: हम हर स्टॉक को रेट करते हैं; जो रेटिंग फ़्री में उपलब्ध है और पूरी तरह से ऑब्जेक्टिव या वस्तुनिष्ठ है. इसमें राय और भावनाएं कोई भूमिका नहीं निभातीं. हमने लंबे समय के दौरान इसके काम करने के तरीक़े पर रिसर्च, डिज़ाइन और विकास किया है, और वो इस तेज़ फ़र्स्ट-लेवल क्वालिटी की जांच के लिए बनाया गया है. साथ ही, ये सिस्टम पारदर्शी है और हर किसी के लिए पढ़ने के लिए उपलब्ध है.

मैं ये नहीं कहूंगा कि स्टॉक के इवैलुएशन का ये अंतिम वाक्य है, बल्कि सिर्फ़ ये कि इसे आपके स्टॉक निवेश का आख़िरी होने के लिए नहीं, बल्कि पहला शब्द होने के लिए डिज़ाइन किया गया है. आने वाले हफ़्तों में हम इसपर और विस्तार से चर्चा करेंगे.

ये भी पढ़िए- आपको वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग क्यों चुननी चाहिए

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कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


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