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'बढ़ती महंगाई से NBFC को होगा फ़ायदा'

इनवेस्को म्यूचुअल फ़ंड के फ़ंड मैनेजर अमित निगम से ख़ास बातचीत

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अमित निगम ने 2001 में एक विश्लेषक के तौर पर काम करते हुए अपने निवेश प्रबंधन करियर की शुरुआत की. वो 2018 में इनवेस्को में शामिल हुए और अभी इनवेस्को इंडिया ELSS टैक्स सेवर फ़ंड सहित कई म्यूचुअल फ़ंड्स का सह-प्रबंधन करते हैं, जो हमारी रेकमंडेशन लिस्ट में है. हाल ही में, हमने यह समझने के लिए उनसे बात की कि उन्होंने 2023 में इस फ़ंड के प्रदर्शन को कैसे आगे बढ़ाया और पोर्टफ़ोलियो में कुछ बदलावों के लिए उनके तर्क क्या हैं. आप इंटरव्यू के कुछ अहम हिस्से यहां पढ़ सकते हैं. आपने कई फ़ंड हाउस में काम किया है और 5-6 साल से इनवेस्को से जुड़े हुए हैं, हमें अपनी किसी ख़ास सीख के बारे में बताएं. अपने काम के अनुभव के दौरान मुझे कई तरह की सीख मिली हैं. इनवेस्टमेंट की प्रक्रिया में सिर्फ़ "क्या करना है" ज़रूरी नहीं होता, बल्कि "क्या नहीं करना है" भी ज़रूरी होता है. जहां तक दूसरी वाली बात है, मैने महसूस किया किया तीन बड़ी ग़लतियां हैं जिन्हें इनवेस्टर को छोड़ देना चाहिए: ग़लत बिज़नस चुनना - एक इनवेस्टर के नज़रिए से सही बिज़नस तो चुन लेना पर ग़लत बिज़नस वाले लोगों का चुनाव करना. ऐसे लोग जिनके पास बिज़नस को तेज़ी से आगे ले जाने की अकांक्षा ही न हो, उनमें ग्रोथ को लेकर भूख ही न हो. ऐसे बिज़नस में निवेश करना जिसके मैनेजमेंट या प्रमोटर को छोटे शेयर धारकों के हितों का ख़यान ही न हो. एक और ग़लती है जिस पर मैं बात करना चाहूंगा - एक अच्छे बिज़नस के लिए बहुत ज़्यादा वैल्युएशन का भुगतान करना - क्योंकि कम समय में इससे निराशा हो सकती है या फिर फ़ायदा बहुत समय बाद मिल सकता है. हालांकि, इस ग़लती को होल्डिंग का समय बढ़ाकर ठीक किया जा सकता है. तो कहा जा सकता है कि किसी को कंपनियों को समझदारी से चुनना चाहिए और फिर उन्हें लंबे वक़्त तक बनाए रखना चाहिए (बशर्ते निवेश में रह

ये लेख पहली बार जनवरी 23, 2024 को पब्लिश हुआ.

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