फ़र्स्ट पेज

क्या आपके पोर्टफ़ोलियो में और भी पेटीएम हैं?

आपके स्टॉक पोर्टफ़ोलियो में रिस्क और मज़बूती

more-paytms-in-your-portfolioAnand Kumar

back back back
6:05

मुझे नहीं पता कि पेटीएम की कहानी किस दिशा में जा रही है. मेरे पाठक अच्छी तरह से जानते हैं कि रेग्युलेटरी मुश्किलों से पहले भी, निवेश या बिज़नस के तौर पर, पेटीएम को लेकर मेरी राय कोई अच्छी नहीं थी. अब तो पेटीएम बैंक पर RBI के भारी दबाव के साथ, हालात काफ़ी ज़्यादा ख़राब हो गए हैं.

RBI की कार्रवाई के बाद पहले तीन दिनों में पेटीएम के शेयरों 43 फ़ीसदी की गिरावट आई. बड़े मार्केट कैपिटलाइज़ेशन वाले और बड़े पैमाने पर लिए गए एक स्टॉक के लिए - जो गिरावट से पहले ₹42,000 करोड़ का था - ये बहुत बड़ा सफ़ाया है. पेटीएम पर पहले से चले आ रहे संदेह के बावजूद, क़रीब 70 इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड और दूसरे कई तरह के संस्थागत निवेशकों का इसमें कुछ निवेश है. इसमें बहुत से इंडिविजुअल निवेशक भी शामिल हैं. तीन सेशन में 43 प्रतिशत की ऐसी गिरावट शायद इस तरह के स्टॉक के लिए काफ़ी दुर्लभ है और असल में, पूरे बाज़ार में होने वाली किसी बड़ी आम गिरावट के अलावा ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा.

इसके बावजूद, आज का ये लेख पेटीएम के बारे में बिल्कुल नहीं है. बल्कि इसका विषय ये है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए जब उनका कोई स्टॉक पेटीएम हो जाए. ये एक नया अर्थ है जिसमें 'पेटीएम' को एक क्रिया के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली नज़र में, ये विषय भी उसी उसी विषय का भ्रम पैदा करता है जिसके बारे में मैंने पिछले सप्ताह लिखा था, जो HDFC बैंक के शेयर प्राइस में (बहुत छोटी) गिरावट के बारे में था. जनवरी के मध्य में HDFC बैंक का स्टॉक कुल 15 प्रतिशत गिरा था और तब से ये अपने निचले स्तर पर आ गया है. बेशक, HDFC बैंक एक बड़ा बैंक है, इसलिए इसकी 15 प्रतिशत बाज़ार गिरावट ₹1.77 लाख करोड़ है, जो पेटीएम की पूरी मार्केट कैप से कहीं ज़्यादा है.

मगर ये दोनों घटनाएं मौलिक रूप से अलग हैं. HDFC बैंक के मामले में, मैंने कहा था कि स्थापित कंपनियां समय के साथ महत्वपूर्ण व्यावसायिक गति पैदा करती हैं. उनका साइज़ और सफलता कोई संयोग नहीं होता - वो गहरी ताक़त की उपज होती हैं जिसे ख़त्म होने में कई साल लग जाते हैं. 'मार्केट लीडर' मज़बूत होते हैं - कोई एक साइक्लिकल या चक्रीय गिरावट उनकी अंतर्निहित मज़बूती और वापसी करने की क्षमताओं को नहीं ख़त्म कर सकती.

क्या ये बात पेटीएम पर लागू होती है? ज़ाहिर है, ऐसा नहीं है. 'मार्केट लीडर' के अर्थ में ये शामिल नहीं होता जब किसी कंपनी ने कभी मुनाफ़ा ही नहीं कमाया हो और असल में, ऐसे व्यवसाय में हो जहां किसी ने कभी मुनाफ़ा नहीं कमाया हो. इसके अलावा, जब कोई रेग्युलेटर पैरों के नीचे से ज़मीन खिसका देता है, तो निवेशकों को अपने निवेश पर एक लंबी और कड़ी नज़र डालनी ही पड़ती है. तो, किसी स्टॉक को लगने वाले अचानक झटके का समाधान क्या है?

इसका जवाब पुराना और उबाऊ है - डाइवर्सिफ़िकेशन. निवेशकों को एक ही स्टॉक पर बहुत ज़्यादा दांव लगाने के बजाय सभी सेक्टर और कंपनियों में एक संतुलित पोर्टफ़ोलियो बनाना चाहिए. क्योंकि जब किसी एक कंपनी को परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उस परेशानी का असर पोर्टफ़ोलियो पर कम होता है. लेकिन बात ये नहीं है. डाइवर्सिफ़िकेशन का मतलब केवल अपने निवेश को अलग-अलग सेक्टर या एसेट क्लास में फैलाना ही नहीं होता. ये आपके पोर्टफ़ोलियो में हर एक निवेश के अंतर्निहित जोख़िमों और संभावनाओं को समझने की बात भी है. असल में, जब मैं पेटीएम होल्ड करने वाले 70 म्यूचुअल फ़ंड्स के एक्सपोज़र को देखता हूं, तो मुझे इसका एक लाइव डेमो दिखाई देता है. पेटीएम में उनकी औसत हिस्सेदारी 1 फ़ीसदी से कम है, जबकि केवल 8 फ़ंड हैं जिनकी हिस्सेदारी 2 फ़ीसदी से ज़्यादा है. यानी, आज जब पूरा बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, तब कोई गंभीर गिरावट भी हो जाए, तब भी बाक़ी का पोर्टफ़ोलियो अच्छी तरह से सुरक्षित रहेगा.

मेरे मुताबिक़ केवल व्यक्ति ही आकर्षक कहानियों से प्रभावित (प्रभावित?) होते हैं और सुरक्षित निवेश के अंतर्निहित सिद्धांतों को नज़रअंदाज करते हैं. मेरे पास जो उदाहरण मौजूद हैं, वे उनके हैं, जिनके पास 10-20 प्रतिशत हिस्सेदारी थी क्योंकि उनका मानना था कि एक बिज़नस के तौर पर पेटीएम अच्छी स्थिति में है और बड़ा मुनाफ़ा कमाने के लिए अच्छा है.

हालांकि, जैसा कि मैंने कहा, ये पेटीएम की बात बिल्कुल नहीं है. कोई भी कभी भी डाइवर्सिफ़िकेशन को नज़रअंदाज नहीं कर सकता है, और न ही एसेट एलोकेशन, री-बैलेंसिंग और कॉस्ट-एवरेज या लागत औसत जैसी दूसरी बुनियादी बातों को नज़रअंदाज़ कर सकता है. जब बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहे हों - ऐसा समय हमेशा ही सबसे ख़तरनाक होता है. ये वो समय होता है जब हमारे लापरवाह होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है. पेटीएम के साथ जो होगा, सो होगा. आप ये पक्का करें कि आपके निवेश में सभी बुनियादी बातें सही हों.

ये भी पढ़िए: इन्वेस्टिंग के मैकेनिकल रूल

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

साल भर में 252% रिटर्न, लेकिन नए निवेशक नहीं लगा सकते पैसा, क्यों?

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

क्या होगा अगर बाज़ार 10 साल तक कोई रिटर्न न दे?

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

IEX का शेयर अपने पीक से 65% गिरा, क्या सबसे बुरा दौर बीत गया है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

आपके पोर्टफ़ोलियो में 4.5% की समस्या

पढ़ने का समय 3 मिनटआशुतोष गुप्ता

स्मॉल कैप के लिए मुश्क़िल रहा साल, फिर कैसे इस फ़ंड ने दिया 20% का रिटर्न?

पढ़ने का समय 4 मिनटचिराग मदिया

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी