
नीलेश सुराना मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर (CIO) हैं. वो मिराए एसेट ELSS टैक्स सेवर की देखरेख करते हैं और मिराए एसेट लार्ज मिड कैप फ़ंड के को-मैनेजर हैं, जिनका टोटल एसेट क़रीब ₹54,250 करोड़ है.
इस इंटरव्यू में उन्होंने फ़ाइनेंस की दुनिया में अपनी शुरुआत, निवेश की फ़िलॉसफ़ी और अपने तहत फ़ंड्स के परफ़ॉर्मेंस पर चर्चा की. यहां पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश.
आपने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से शुरुआत की और बाद में फ़ाइनेंस में एमबीए किया. इस बदलाव की वजह क्या है? आपने फ़ाइनेंशियल की दुनिाय में अपनी यात्रा कैसे शुरू की?
इंजीनियरिंग की डिग्री होने के बावजूद, मार्केट में मेरी रुचि मेरे कॉलेज के दिनों के दौरान शुरू हुई, और ये शुरुआत इनिशियल पब्लिक ऑफ़रिंग (IPOs) में भागीदारी के ज़रिए हुई जो प्रसिद्ध हर्षद मेहता के बुल रन से मेल खाती थी. उस समय कुछ यूरेका मोमेंट्स थे, और मेरे अंदर इक्विटी मार्केट के प्रति दिलचस्पी पैदा हो गई. विस्तार में जाए बिना, ऐसे दो उदाहरण रहे, जहां मुझे कुछ ही महीनों में अविश्वसनीय 10x और 20x रिटर्न मिला.
इसके बाद मैंने अपनी पसंद से फ़ाइनेंशियल मार्केट में उतरा और अपना एमबीए पूरा किया. उसके बाद मैं मुंबई आ गया और सेल-साइड रिसर्च करना शुरू कर दिया. सेल साइड में, लगभग सात साल के बाद मैं पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) की भूमिका में बाय-साइड में चला गया, और फिर आख़िर में, मैं मिराए एसेट में चला गया.
आस्क इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में भरत शाह के साथ काम करना ख़ूब अनुभव देने वाला समय रहा होगा. क्या आप हमें बता सकते हैं कि उनके साथ काम करना कैसा था और इसका आपके करियर पर क्या असर पड़ा?
ये उनके (भरत शाह) साथ सीखने का एक शानदार अनुभव था, और मैंने रिसर्च के प्रति उनकी मेहनत और ग्रोथ ओरिएंटेड बिज़नस को देखने की उनकी क़ाबिलियत का आनंद लिया. और वैसे, वह उन कुछ इन्वेस्टर्स में से हैं जो असाधारण रूप से अच्छी तरह से बोलते हैं, और यह अभिव्यक्ति शायद इन्वेस्टमेंट का सही रास्ता दिखाती है. इससे सीखने के मामले में गलतियों को कम करने में मदद मिली.
आप अपनी इन्वेस्टमेंट फ़िलॉसफ़ी को कैसे परिभाषित करेंगे? क्या कोई ख़ास तरह के स्टॉक या मार्केट की स्थितियां हैं जो आपका ध्यान खींचती हैं?
इन्वेस्टमेंट फ़िलॉसफ़ी दो भागों में बांटी जाती है: स्टॉक का चुनाव और पोर्टफ़ोलियो बनाना. इसका आख़िरी लक्ष्य बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करना है. सबसे पहले, मैं कहूंगा कि हम अच्छी क्वालिटी वाले बिज़नस को चुनने और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने में विश्वास करते हैं.
ऐसे कुछ सब-कॉम्पोनेंट हैं, जिनको एनेलाइज़ या फ़िल्टर करने की ज़रूरत है, जो बिज़नस को एनालाइज़ करने और मैनेजमेंट को एनालाइज़ करने से जुड़े हैं. और अंत में, ये वो क़ीमत है जो आप चुका रहे हैं. इसलिए, बिज़नस के मोर्चे पर, यह अनिवार्य रूप से इक्विटी ग्रोथ के बारे में है, जिसमें हमारे पास कुछ बेसिक फ़िल्टर हैं जो बिज़नस में होने चाहिए. उदाहरण के लिए दोहरे अंकों (earnings) की ग्रोथ - जितनी ज़्यादा होगी, उतना ही बेहतर होगा. इसके अतिरिक्त मूल्य-अभिवृद्धि वृद्धि (value-accretive growth) को लगभग 14-15 परसेंट के आंतरिक बेंचमार्क के साथ, लगाई गई पूंजी पर रिटर्न के अनुरूप होना चाहिए.
मैनेजमेंट अनालेसिस के संदर्भ में बेसिक हाइजीन वाला पार्ट और फ़ोरेंसिक अनालिसिस, दोनों के संदर्भ में ज़ोर दिया गया है. लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मुझे लगता है कि हम नेतृत्व के पहलुओं पर बहुत अधिक ज़ोर देते हैं, जिसमें कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कैपिटल एलोकेशन शामिल हैं.
अंत में, स्टॉक के चुनाव के संदर्भ में, हमारे पास बहुत अच्छी तरह से परिभाषित मॉडल हैं, और हम लॉन्ग-टर्म डिस्काउंट कैश-फ़्लो (DCF) के आधार पर एक मूल्य तय करते हैं, इसलिए डिस्काउंट पर ख़रीदारी करने का विचार है. प्राइस वैल्यू गैप का अंतर होना ही चाहिए, और यह एक लंबा जवाब है. हालांकि, स्टॉक चयन और पोर्टफ़ोलियो निर्माण में डायवर्सिफ़िकेशन महत्वपूर्ण है. और जैसा कि मैंने बताया था, मैनडेट बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने का है. इसलिए, किसी भी सेक्टर, स्टॉक या स्टाइल को बेंचमार्क के तय कारकों से बड़े तौर पर दूर नहीं होना चाहिए. यह सब एक साथ रखने पर, मैं कहूंगा कि विचार हमारे स्टॉक चयन पर ध्यान केंद्रित करना है - सस्ती कंपनियों को ख़रीदने के लिए नहीं, बल्कि सही मूल्य पर अच्छी कंपनियों को ख़रीदने और लॉन्ग-टर्म में रिस्क एडस्टेड पोर्टफ़ोलियो बनाने के लिए.
डिफ़रेंशियल के लिए नहीं, लेकिन जब अच्छे बिज़नस बुरे दौर से गुज़रते हैं, तो हम कुछ विपरीत अवसरों (Contrarian Opportunities) का लाभ उठाने से नहीं कतराते हैं. एक बुरा दौर तब होता है जब नियर-टर्म प्रॉस्पेक्ट की संभावनाएं धुंधली होती हैं, लेकिन लॉग-टर्म संभावनाएं बरक़रार रहती हैं. उदाहरण के लिए, 2009 में एक ऑटो प्रमुख कठिन समय से गुज़र रहा था, जब हड़तालें हुईं. कमाई गिर गई, क़ीमतें कम हो गईं और मूल्यांकन आकर्षक हो गया. 2014-15 में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में और पांच या छह साल पहले पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में कुछ अवसर थे. फिर भी, कुछ स्टॉक हमेशा ख़राब दौर से गुज़रेंगे, जिससे हमें लॉगर-टर्म व्यू अपनाने और सेफ़्टी का हायर मार्जिन पाने में मदद मिलती है. इसलिए मुझे लगता है कि यह न केवल मुझे बल्कि, वास्तव में, मेरी टीम के अधिकांश सदस्यों को उत्साहित करता है, और हम उन अवसरों का लाभ उठाने से नहीं कतराते हैं.
संभावित निवेश का वैल्यूएशन करते समय एक स्टॉक को 'अवश्य ख़रीदने योग्य' के रूप में क्यों खड़ा किया जाता है? उदाहरण के लिए, अपने हालिया ख़राब प्रदर्शन के बावजूद, प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंकों में से एक बैंक टॉप पर बना हुआ है. ऐसे निर्णयों के पीछे क्या तर्क है?
केवल पोर्टफ़ोलियो की टॉप कुछ होल्डिंग्स को देखने से आपको स्पष्ट तस्वीर नहीं मिलती है. यदि आप बैंकिंग एक्सपोज़र को देखें, तो ऐसे कुछ नाम हैं, जिन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, जिनमें पब्लिक सेक्टर का सबसे बड़ा बैंक भी शामिल है. लेकिन किसी ख़ास नाम पर जाए बिना, आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए, मैं कहूंगा कि यह संभवतः उस उत्तर से मेल खाता है, जिसका मैंने पहले उल्लेख किया था. कि ये अच्छे, सस्टेनेबल फ्रैंचाइज़ी बिज़नस हैं, जिनकी लॉन्ग-टर्म में बने रहने की संभावना बरक़रार है. हालांकि, इस मामले में, किसी कंपनी के विलय से संबंधित कुछ मुद्दों के कारण निकट अवधि की चुनौतियां हैं. लेकिन हमारी राय में, यह ग्रोथ या इक्विटी पर रिटर्न (ROE) के संबंध में तीन-पांच साल का नज़रिया नहीं है. प्रबंधन बरक़रार है और वैल्युएशन सस्ता हो गया है क्योंकि इसका प्रदर्शन कमज़ोर रहा है. जैसा कि कहा गया है, यह शायद उन मामलों में से एक है जहां यह अभी भी उस विरोधाभासी दायरे में आता है - लॉन्ग-टर्म बरक़रार है, लेकिन नियर-टर्म चुनौती भरा है, और हम लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं.
मस्ट-बाय पर आपके सवाल का जवाब देने के लिए, हमारे लिए, स्टॉक में आउटलेयर में हाई बिज़नस ग्रोथ, 20-25 प्रतिशत से अधिक ROCEs , एक्सेप्शनल मैनेजमेंट और बहुत सस्ते वैल्यूएशन जैसी बातें होनी चाहिए. आम तौर पर, आपको हर समय सभी कॉम्बिनेशन नहीं मिलते हैं. किसी को कभी-कभी अवसर मिलता है, जैसा कि हमने मार्च 2020 के दौरान देखा. जब आपको प्राइस वैल्यू गैप के संदर्भ में पक्ष में वैल्यूएशन मिलता है, तो उस समय के दौरान किसी को इन्वेस्टमेंट फ़्रेमवर्क को पूरा करने के मामले में वह बॉक्स टिक कर देता है.
पिछले कुछ साल मिराए लार्ज एंड मिडकैप और मिराए ELSS टैक्स सेवर के लिए कठिन रहे हैं. मुख्य बाधाएं क्या थीं और आप कैसे बदलाव लाने की योजना बना रहे हैं?
अगर हम शुरुआत से लेकर अब तक फ़ंड्स के रिटर्न और पांच साल के रिटर्न को देखें, तो वे काफी अच्छे हैं. लेकिन पिछले कुछ साल में परफ़ॉर्मेंस सॉफ़्ट रहा है, ख़ासकर पिछले 18 महीनों में. निवेश में हमेशा चूक-कमी की गलतियां होती रहती हैं. इसलिए, मैं कहूंगा कि इसका संबंध चूक की ग़लतियों से ज़्यादा है, जहां हम शायद इंडस्ट्रियल और कैपेक्स जैसे सेक्टर में कंज़रवेटिव रहे हैं, जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐसा नहीं है कि हमने उन नामों पर निवेश नहीं किया, लेकिन वेट कम था. साथ ही, ऑटो को छोड़कर कुछ सेक्टर जो हमारे स्वामित्व में हैं - जैसे उपभोक्ता विवेकाधीन - ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है.
अब, प्रश्न के दूसरे भाग का उत्तर देने के लिए - हमारा दृढ़ विश्वास है कि फ़ंड का प्रदर्शन एक अंतिम परिणाम है; पिछला एंड (स्टॉक चयन और पोर्टफोलियो निर्माण) वही रहता है. सबक यह है कि हम बेंचमार्क की तुलना में इंडस्टियल सेक्टर में अंडरवेट वाले थे. अब, हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कुछ नामों पर ग़ौर करने का अवसर है और साथ ही, कुछ पोज़ीशन को डबल करने का अवसर है जो समय पर सही हो गए हैं और रिस्क एडजस्टमेंट तरीक़े से कुछ अर्थ निकाल सकते हैं. इसलिए, मैं कहूंगा कि चूक और कमीशन के एरर का एक संयोजन हमारे माहौल में एक साथ आया है, जहां वैल्यू (सेगमेंट) काफ़ी अधिक बढ़ गया है. तो, यह सीखने के सफ़र का एक हिस्सा है.
नए ज़माने की टेक कंपनियों में मिराए म्यूचुअल फ़ंड के इन्वेस्टमेंट ने निश्चित रूप से चिंताएं बढ़ा दी हैं, ख़ासकर उनकी मौजूदा करंट फ़ाइनेंशियल स्थिति और चुनौतियों को देखते हुए. आप अपने निवेशकों के लिए इन निवेशों को कैसे सही ठहराते हैं, और इन कंपनियों पर आपका लॉन्ग-टर्म नज़रिया क्या है?
सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि उन सभी में हमारा रिस्क 4-5 प्रतिशत है, और यह एक बहुत ही नपा-तुला रिस्क है. दूसरी बात, हम किसी भी कंपनी को नई या पुरानी नहीं मानते. इनमें से कई कंपनियों पर कुछ प्लेयर्स और सेक्टरों का वर्चस्व है, जिससे एक अल्पाधिकार बाज़ार संरचना (Oligopolistic Market Structure) बनती है, जो लॉन्जविटी या ग्रोथ के संबंध में बॉक्स को टिक करती है. लगभग डेढ़ साल पहले, प्राइवेट इक्विटी प्लेयर्स (PEs) के बाहर निकलने के कारण इन शेयरों में काफ़ी बिकवाली हुई थी और क़ीमतों में भारी गिरावट आई थी. हां, 2021 में वैल्यूएशन चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जैसा कि कहा गया है, लगभग 18 महीने पहले, जब क़ीमतें सही की गईं, तो हमने कुछ नाम चुने.
आप सबसे आगे रहे हैं - चाहे वह कोई भी बड़ा अवसर, रुझान या परिदृश्य हो. आपके अनुसार अगली बड़ी चीज़ क्या है?
आज के मार्केट में, मुझे ऐसा कोई मायना रखने वाला ट्रेंड नहीं दिखता, जिसकी क़ीमत पूरी तरह से कम हो या जिसे अभी खोजा जाना बाक़ी हो. यह एक ऐसा बाज़ार है जहां किसी को लॉगर टर्म सेक्युलर ग्रोथ अप्रोच अपनाना चाहिए. नियर टर्म में बड़े पैमाने पर मार्केट कंज़प्शन सेक्टर की तरह रुझान हो सकते हैं, जिसने पिछले दो से तीन साल में अब तक अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. प्राइवेट सेक्टर के कुछ बहुत बड़े बैंकों की कमाई में औसत उलटफेर हो सकता है. लेकिन फिर भी, ये बाज़ार में 50 सेंट के लिए 1 डॉलर जैसे अवसर नहीं हैं. बाज़ारों में क़ीमतें सही हैं.
यह भी पढ़ें: डीएसपी म्यूचुअल फंड के चरणजीत सिंह के साथ साक्षात्कार
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]


