स्टॉक वायर

8 स्टॉक जिनकी सेल्स उनके मार्केट कैप से कहीं ज़्यादा है

सिद्धार्थ भैया के प्राइस-टू-सेल्स फ़्रेमवर्क का इस्तेमाल करके ऐसे बिज़नसेज की पहचान करें जो अपनी टॉपलाइन से कम क़ीमत पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं

आरपीएसजी, क्वेस कॉर्प, 6 अन्य शेयर जिनकी बिक्री मार्केट कैप से कहीं ज़्यादा हैAI-generated image

एक्विटास एसेट मैनेजमेंट के प्रमुख सिद्धार्थ भैया ने भारतीय बाज़ारों में अपनी अनुशासित और वैल्यू-आधारित निवेश रणनीति के लिए सम्मान हासिल किया है. उनके ख़ास टूल्स में से एक है प्राइस-टू-सेल्स (P/S) रेशियो का इस्तेमाल. इसके ज़रिये वो ख़ासकर उन स्टॉक्स पर ध्यान देते हैं जो 0.3x सेल्स से नीचे ट्रेड कर रहे हों. ये तरीक़ा उन मज़बूत बिज़नसेज को पहचानने में मदद करता है जिन्हें वैल्यूएशन के पारंपरिक मेथड नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो जहां कमाई में अस्थायी झटकों, अकाउंटिंग से जुड़े समायोजन या एकमुश्त ख़र्चों के कारण काफ़ी उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है, वहीं, P/S रेशियो कंपनी के आर्थिक इंजन का एक ज़्यादा स्थिर चित्र प्रस्तुत करता है. सेल्स कम समय की अस्थिरता से कम प्रभावित होती है, जिस कारण P/S उन कंपनियों को छांटने के लिए एक उपयोगी फ़िल्टर है जिनकी कमाई अस्थायी रूप से कम हो सकती है, लेकिन जिनका बिज़नस ठोस बना रहता है.

इस फ़िलॉसफ़ी से प्रेरित होकर, हमने निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर कंपनियों की जांच की:

  • P/S रेशियो 0.3x से कम या बराबर
  • मार्केट कैप ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा या बराबर

इसके परिणामस्वरूप 8 बिज़नस सामने आए (देखें टेबल) जो अपने परिचालन के पैमाने के लिए उल्लेखनीय हैं. इनमें से दो— रेडिंगटन और गोकुल एग्रो —पर क़रीब से नज़र डालने की ज़रूरत है.

कंपनी P/S स्टॉक रेटिंग 5 साल का ROCE (% सालाना ) 5 साल की सेल्स ग्रोथ (% सालाना)
गोकुल एग्रो रिसोर्सेज़ 0.2 5 25 25
चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन 0.1 4 24 10
रेडिंगटन 0.2 4 21 14
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स 0.2 3 13 14
नेशनल फर्टिलाइजर्स 0.2 3 8 14
क्वेस कॉर्प 0.2 3 11 18
RPSG वेंचर्स 0.3 3 9 13
टीमलीज सर्विसेज 0.3 3 15 16
P/S और मार्केट कैप फ़़िल्टर लागू करने के बाद हमारी स्टॉक रेटिंग पर 3 से ज़्यादा रेटिंग वाली शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियां

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रेडिंगटन

पहली नज़र में रेडिंगटन की वैल्यूएशन अनोखी लगती है. कंपनी की सालाना आय ₹95,000 करोड़ से ज़्यादा है, पिछले एक दशक के दौरान सालाना प्रॉफ़िट में 14 फ़ीसदी की ग्रोथ दर्ज की है और पांच साल का इक्विटी पर औसत रिटर्न (ROE) और लगाई गई पूंजी पर रिटर्न (ROCE) क्रमशः 18 और 21 फ़ीसदी रहा है. फिर भी, ये केवल 0.2 गुना के P/S रेशियो पर ट्रेड कर रहा है. ये एक ऐसे बिज़नस के लिए आश्चर्यजनक छूट है जिसके बुनियादी मेट्रिक्स इतने मज़बूत हैं. इसका क्या कारण है?

जवाब इसके बिज़नस के नेचर में छिपा है. रेडिंगटन एक डिस्ट्रीब्यूटर है, न कि मैन्युफैक्चरर. ये 450 से अधिक ग्लोबल ब्रांड्स के लिए IT हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर—PC, स्मार्टफोन, सर्वर, क्लाउड लाइसेंस—का वितरण करती है. ये कम मार्जिन वाला (FY24 में प्रॉफ़िट मार्जिन केवल 1.4 फ़ीसदी था) और सामान्य मॉडल है, जिसे अक्सर 'मिडिलमैन' बिज़नस के रूप में नज़रअंदाज़ किया जाता है. इसीलिए, इसमें कोई आकर्षण नहीं है.

लेकिन रेडिंगटन की ताकत इसके पैमाने और पहुंच में है. ये 40 से ज़्यादा देशों में ऑपरेट करती है, जिसमें अफ्रीका और पश्चिम एशिया जैसे प्रमुख बाज़ार शामिल हैं, जहां वैश्विक प्रतिस्पर्धी शायद ही कदम रखते हों. ये दिग्गज टेक कंपनियों और स्थानीय कंपनियों दोनों के साथ साझेदारी करती है, जिसके कारण ये दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी IT डिस्ट्रीब्यूटर है और इसका वर्किंग कैपिटल साइकल केवल 35 दिन का है.

हालांकि, कम मार्जिन प्रोफ़ाइल और पारंपरिक हार्डवेयर बिक्री को क्लाउड-आधारित सब्सक्रिप्शन मॉडल से बदलने का खतरा सहित जोखिमों पर भी विचार करना जरूरी है. इसका मुकाबला करने के लिए, रेडिंगटन अपने क्लाउडक्वार्क्स प्लेटफॉर्म का विस्तार कर रही है, जो अमेजन वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य के क्लाउड ऑफरिंग्स को एग्रीगेट करता है यानी एक जगह लाता है.

दिलचस्प बात ये है कि भले ही, इसका वैल्यूएशन सस्ता दिखता है, लेकिन वर्तमान P/S और P/E मल्टीपल इसकी ऐतिहासिक रेंज के उच्चतम स्तर के आसपास हैं. इसकी इंडस्ट्री के साइक्लिकल नेचर को देखते हुए, स्टॉक अपने पांच साल के औसत P/E (लगभग 10x) की तुलना में 70 फ़ीसदी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इसके P/S में आमतौर पर 0.1 से 0.2 गुने के बीच उतार-चढ़ाव रहता है.

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गोकुल एग्रो रिसोर्सेज

गोकुल एग्रो का P/S मल्टीपल 0.2 गुना होने के बावजूद इसका रेवेन्यू ₹13,800 करोड़ है. इसकी टॉपलाइन में पिछले पांच वर्षों के दौरान 25 फ़ीसदी की सालाना ग्रोथ बनी हुई है. तो इतने पैमाने और ग्रोथ वाला व्यवसाय इतने निचले स्तर पर कैसे ट्रेड कर रहा है?

गोकुल सोयाबीन, सरसों, पाम, सूरजमुखी जैसे खाद्य तेलों के साथ-साथ डी-ऑइल्ड केक और कैस्टर डेरिवेटिव्स को प्रोसेस और उनका ट्रेड भी करती है. ये ब्रांडेड कंज्यूमर बिज़नस के बजाय, मुख्य रूप से B2B और निर्यात-केंद्रित बिज़नस है. मार्जिन कम हैं (2 फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा) और सभी एग्री प्रोसेसर्स की तरह, इसे कमोडिटी की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी मुद्रा जोखिम और आयात शुल्क में बदलाव का सामना करना पड़ता है. ये ढांचागत चुनौतियां निवेशकों में हिचकिचाहट पैदा करती हैं.

फिर भी, गोकुल वॉल्यूम और दक्षता में बेहतर कंपनी है. FY19-24 के दौरान इसका पांच साल का औसत ROCE 21 फ़ीसदी और ROE 16.5 फ़ीसदी रहा है, जो ऊंचे एसेट टर्नओवर (फ़िक्स्ड एसेट टर्नओवर 5 गुना से ज़्यादा) के कारण प्रभावशाली है. क्रशिंग से लेकर लॉजिस्टिक्स तक की सभी वर्टिकल का एकीकरण और कृष्णपट्टनम, हल्दिया और कांडला जैसे बंदरगाहों के निकट रणनीतिक संयंत्र होने से लागत उचित स्तरों पर रहती है.

ब्रांडिंग पर निर्भर रहने वाली FMCG कंपनियों (जैसे अडानी विल्मर) के विपरीत, गोकुल बड़े पैमाने पर कारोबार और बुनियादी ढांचे का फ़ायदा उठाती है. ये 36 देशों में निर्यात करती है और 20 भारतीय राज्यों में ऑपरेट करती है, फिर भी तुलनात्मक रूप से हल्की बैलेंस शीट बनाए रखती है. वर्किंग कैपिटल और डेट में बढ़ोतरी (डेट-टू-इक्विटी अभी भी 0.5 गुना के सहज स्तर पर है) क्षमता विस्तार की वजह से हुई है. लेकिन स्टॉक का कम वैल्यूएशन संभवतः इसकी प्राइसिंग पावर में कमी और साइक्लिकल अर्निंग की वजह से है. निवेशक शायद देखना चाहते हैं कि क्या गोकुल की क्षमता में बढ़ोतरी स्थिर मुनाफ़े में तब्दील होती है.

निष्कर्ष से पहले

भले ही, P/S रेशियो अकेले एक समग्र वैल्यूएशन टूल नहीं है, लेकिन ये उन कंपनियों को पहचानने के लिए एक उपयोगी स्क्रीन हो सकता है जिनकी सेल्स अच्छी रहती है लेकिन जिनकी आय अस्थायी रूप से भ्रामक हो सकती है. इस अभ्यास से ऐसे बिज़नसेज सामने आए जो पैमाने, परिचालन दक्षता और पूंजी अनुशासन को जोड़ते हैं, फिर भी क्षेत्रीय ख़ूबियों के कारण इसकी वैल्यू कम आंकी गई है.

वैल्यू रिसर्च में, हम केवल P/S रेशियो पर भरोसा करने की सलाह नहीं देते. ये स्क्रीन एक प्रारंभिक बिंदु है, जिसे उन संभावित रूप से दिलचस्प बिज़नसेज को उजागर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिनके मूलभूत पहलुओं पर क़रीब से नज़र डालने की ज़रूरत है. निवेशकों को निवेश के फैसले लेने से पहले गहन जांच-पड़ताल करनी चाहिए. हालांकि, अगर आप सावधानीपूर्वक रिसर्च किए गए स्टॉक आइडियाज़ की तलाश में हैं, तो हमारी स्टॉक रिकमंडेशन सर्विस वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र को देखें.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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