Aman Singhal/AI-Generated Image
सारांशः ऐक्टिवली मैनेज्ड स्मॉल-कैप फ़ंड्स पर हमारी गहरी रिसर्च बताती है कि निवेशक किन फ़ंड्स पैसा लग रहे हैं और किन फ़ंड्स से चुपचाप निकल रहे हैं. ये आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं.ज़रूरी नहीं कि सबसे बड़े फ़ंड ही सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हों, कम से कम प्रतिशत के लिहाज़ से तो नहीं.
म्यूचुअल फ़ंड्स की दुनिया में, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले आंकड़ों में से एक है. सीधे शब्दों में कहें तो AUM उन सभी निवेशों की टोटल मार्केट वैल्यू को दिखाता है, जितना पैसा एक फ़ंड अपने निवेशकों की ओर से मैनेज कर रहा है. इसे फ़ंड के “साइज़” की तरह समझ सकते हैं.
किसी म्यूचुअल फ़ंड का AUM ये दिखाता है कि निवेशकों ने उस पर कितना भरोसा किया है और मार्केट ने उसके पिछले प्रदर्शन को कितना रिवॉर्ड (या पनिश) दिया है.
AUM की अहमियत
1. फ़ंड की साइज़ और स्थिरता दिखाता है
एक बड़ा AUM आमतौर पर बताता है कि ज़्यादा निवेशक उस फ़ंड और उसके रिकॉर्ड पर भरोसा करते हैं. उदाहरण के लिए, लगभग ₹65,000 करोड़ के एसेट के साथ Nippon India Small Cap भारत का सबसे बड़ा स्मॉल-कैप फ़ंड है. इसका साइज़ मज़बूत निवेशक भागीदारी और कई साल तक लगातार प्रदर्शन को दर्शाता है.
2. कम एक्सपेंस रेशियो का फ़ायदा
बड़े AUM वाले फ़ंड्स को कम कॉस्ट का फ़ायदा मिलता है, यानी उनकी फ़िक्स्ड कॉस्ट ज़्यादा निवेशकों के बीच बंट जाती हैं. इससे एक्सपेंस रेशियो कम होता है, जो निवेशकों के लिए अच्छी बात है क्योंकि लॉन्ग-टर्म में ये कॉस्ट रिटर्न को कम कर देती है.
3. मार्केट सेंटीमेंट का आइना
AUM मार्केट ट्रेंड्स की धड़कन जैसा है. जब मार्केट ऊपर होता है और निवेशक एक्टिव होते हैं, AUM बढ़ता है. ये आंशिक तौर पर NAV बढ़ने और आंशिक तौर पर नए निवेश के कारण होता है. वहीं बाज़ार में गिरावट और रिडेम्शन इसे नीचे खींचते हैं.
किस वजह से AUM बढ़ता या घटता है?
तीन बड़े फैक्टर हैं जो AUM को ऊपर या नीचे ले जाते हैं:
- मार्केट का प्रदर्शन: अगर मार्केट बढ़ता है, तो पोर्टफ़ोलियो की वैल्यू बढ़ती है और AUM ऑटोमैटिकली ऊपर जाता है. लगातार गिरावट की स्थिति में इसका उल्टा होता है.
- नए निवेश: जब निवेशक नया पैसा डालते हैं, तो बाज़ार के प्रदर्शन की परवाह किए बिना AUM बढ़ता है.
- रिडेम्शन: जब निवेशक बाहर निकलते हैं, AUM गिरता है, भले ही NAV ऊपर जा रहा हो.
पिछले 12 महीनों में स्मॉल-कैप फ़ंड्स की तस्वीर
हमने एक साल पहले कम से कम ₹2,000 करोड़ के एसेट वाले 22 ऐक्टिवली मैनेज किए गए स्मॉल-कैप फ़ंड्स का एनालेसिस किया और कुछ दिलचस्प ट्रेंड्स सामने आए.
शानदार ग्रोथ वाले फ़ंड्स
- Bandhan Small Cap Fund ने लगभग ₹7,000 करोड़ के एसेट्स जोड़े - जो कि अपने आप में एक बड़ी और शानदार ग्रोथ है.
- Nippon India Small Cap और Quant Small Cap ने क्रमशः ₹4,000 करोड़ और ₹3,300 करोड़ से ज़्यादा जोड़े.
यहां इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एब्सोल्यूट ग्रोथ आमतौर पर बड़े म्यूचुअल फ़ंड्स के पक्ष में होती है क्योंकि उनका आधार बड़ा होता है.
इसीलिए हमने उन स्मॉल-कैप फ़ंड्स का भी एनालिसिस किया जो प्रतिशत में सबसे तेज़ी से बढ़े.
- Motilal Oswal Small Cap Fund ने अपने मज़बूत प्रदर्शन और कम आधार के दम पर सिर्फ़ एक साल में अपना AUM दोगुने से भी ज़्यादा कर लिया है, जो ₹2,354 करोड़ से बढ़कर ₹5,263 करोड़ का हो गया. दरअसल, इसने पिछले 12 महीनों में सबसे ज़्यादा रिटर्न दिया है.
- प्रतिशत के लिहाज़ से Bandhan Small Cap ( साइज़ में 92.6% की ग्रोथ) और Invesco India Small Cap (51.3%) दूसरे और तीसरे सबसे तेज़ ग्रोथ दर्ज करने वाले फ़ंड रहे. वहीं Tata Small Cap (28.6%) और Edelweiss Small Cap (18.8%) को भी टॉप-5 में जगह मिली.
ध्यान देने वाली बात ये है कि कोई भी बहुत बड़ा स्मॉल-कैप फ़ंड इस परसेंटेज-ग्रोथ लीडरबोर्ड में नहीं है - और ये लॉजिकल भी है क्योंकि: a) बड़े आधार से आगे बढ़ना मुश्किल है. ₹30,000 करोड़ को दोगुना करना और ₹2,000 करोड़ को दोगुना करना अलग बात है. b) निवेशक सावधानी बरत रहे हैं. कई निवेशक पहले से ही बड़े स्मॉल-कैप फ़ंड्स में नया पैसा लगाने से बचते हैं, डरते हैं कि साइज़ भविष्य के रिटर्न को कम कर सकता है.
सिकुड़ते फ़ंड्स
दिलचस्प है कि जिन 22 फ़ंड्स का हमने एनालेसिस किया, उनमें से 8 का साइज़ पिछले 12 महीनों में कम हुआ है. ये कमी काफ़ी हद तक पिछले साल के कमज़ोर स्मॉल-कैप प्रदर्शन का नतीजा है, जिसने रिडेम्शन और NAV को नीचे धकेला. दरअसल, पूरी कैटेगरी में साल-दर-साल लगभग 6% की गिरावट आई.
कुछ फ़ंड्स जिनका साइज़ घटा उनमें शामिल हैं -Kotak Small Cap, HSBC Small Cap, DSP Small Cap और Franklin India Small Cap.
हमारी राय
निवेशकों के लिए AUM एक मज़बूत लेंस है, क्योंकि ये दिखाता है कि पैसा कहां जा रहा है.
जब आप Motilal Oswal Small Cap और Bandhan Small Cap जैसे फ़ंड्स को तेज़ी से बढ़ते देखते हैं, तो समझ आता है कि निवेशक प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और ऐसे मौक़ों की तलाश कर रहे हैं, जहां फ़ंड मैनेजर को अभी भी चुस्त स्मॉल-कैप विनर्स चुनने का लचीलापन हासिल है.
लेकिन एक निवेशक के तौर पर, आपको AUM के ट्रेंड पर नज़र रखनी चाहिए. उन्हें सिर्फ़ एक डेटा-पॉइंट के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए. इसे परफ़ॉर्मेंस कंसिस्टेंसी, पोर्टफ़ोलियो क्वालिटी और एक्सपेंस रेशियो के साथ मिलाकर ही फ़ैसला लें.
अगर ये सब करना मुश्किल लगता है, तो चिंता की बात नहीं. हमने आपके लिए ये मेहनत कर ली है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर हमारे अनुभवी एनालिस्ट ने सावधानी से चुनी गई स्मॉल-कैप फ़ंड्स की लिस्ट बनाई है. ये वही फ़ंड हैं जो लॉन्ग-टर्म प्रदर्शन, पोर्टफ़ोलियो की मज़बूती और रिटेल निवेशकों के लिए उपयुक्तता होने की कसौटी पर खरे उतरते हैं.
अगर आप चाहते हैं कि आपका पैसा सही स्मॉल-कैप फ़ंड में लगे- जो आपके लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल हो - तो आपको यहीं से शुरुआत करनी चाहिए.
आज ही फ़ंड एडवाइज़र एक्सप्लोर करें!
ये भी पढ़ें: इन 3 स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने बीते 5 सालों में की सबसे दमदार वापसी
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]






