बड़े सवाल

20 साल में रिटायर होने के लिए कितने पैसे की ज़रूरत होगी?

चलिए पता लगाते हैं

चलिए पता लगाते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः ये आर्टिकल किसी थ्रिलर फ़िल्म की तरह शुरू होता है. इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप जितना आगे बढ़ेंगे, उतना ही बड़ा और डरावना रिटायरमेंट नंबर सामने आता जाएगा. लेकिन आख़िर तक बने रहे तो क्लाइमैक्स शानदार होगा. हम एक ऐसा प्लान दिखाएंगे जिससे ये सब मुमकिन लगेगा.

सभी बेहतरीन स्पोर्ट्स फिल्मों की तरह इस कहानी की भी शुरुआत ऐसे होती है जैसे मैदान में हारकर खिलाड़ी ज़मीन पर गिरा हो. ऊपर चमकती लाइट्स और मन में सवाल कि ज़िंदगी क्यों चीज़ों को छीनने में माहिर है. सपने, उम्मीदें, सोमवार की सुबह उठने का जोश… सब चुटकियों में ख़त्म. हालात और भी बदतर होते हुए, वापसी का रास्ता नामुमकिन सा लगता है. (स्पॉइलर: अगर आर्टिकल बीच में छोड़ दिया तो हालात वैसे ही रहेंगे.)

इस वक़्त मन करेगा कि लैपटॉप बंद करो, आइसक्रीम उठाओ और चक दे! देखो, जहां कम से कम आपको पता है कि आख़िर में कमज़ोर पक्ष ही जीतता है. लेकिन मेरे साथ बने रहिए. क्योंकि जैसे हर स्पोर्ट्स फ़िल्म में कमबैक आता है, यहां भी आएगा.

जब तक ये आर्टिकल पूरा होगा (उम्मीद है), बादल हटेंगे, फ़रिश्ते उतरेंगे - या यूं कहें तो SIP कैलकुलेटर उतरेगा और आपका फ़ाइनेंशियल फ़्यूचर डरावनी फ़िल्म जैसा नहीं बल्कि ट्रॉफ़ी उठाने वाले हैप्पी एंडिंग जैसा लगेगा.

ये सब मेरे कहने का नाटकीय अंदाज़ है: “इस आर्टिकल को बीच में ही पढ़ना बंद मत कीजिए.” फ़ाइनेंस कभी-कभी कोच जैसा लगता है जो सिर्फ़ चिल्लाता है, लेकिन वही जीत की स्ट्रैटेजी भी बताता है.

तो अब बहुतहो गई बातें. जूते कस लीजिए, क्योंकि अब रिंग में उतरने और अपनी किस्मत आज़माने का समय आ गया है.

कल की ज़िंदगी की क़ीमत

आइए आज आप जो ख़र्च करते हैं, उससे शुरुआत करते हैं.

मान लीजिए कि आज आपका मासिक ख़र्च ₹50,000 है. 20 साल बाद, अगर 6% महंगाई मानें, तो ये बढ़कर ₹1.6 लाख हो जाएगा.

जी हां, महंगाई आपके आस-पास मंडराकर आपको परेशान करने वाले मच्छर की तरह है, फ़र्क़ बस इतना है कि एक छोटा सा नुक़सान पहुंचाने के बजाय, ये आपकी क्रय शक्ति को धीरे-धीरे, लेकिन लगातार, छीन लेती है. शुरुआत में आपको इसका पता नहीं चलता और फिर एक दिन जब आप जागते हैं तो आपको पता चलता है कि ₹500 की पानी-पुरी कोई मीम नहीं बल्कि हक़ीक़त है.

भले ही लाइफ़स्टाइल वही रहे (नए गैजेट्स नहीं, महंगी ट्रिप नहीं, “बड़ा घर चाहिए” वाला मूड नहीं), फिर भी 30 साल बाद आपको ज़िंदगी जीने के लिए ₹4.15 करोड़ की ज़रूरत होगी.

हां, ₹4.15 करोड़!

ये मानकर कि पैसे समझदारी से लगे हों (33–50% इक्विटी, बाक़ी सुरक्षित डेट में) और हर साल लगभग 8% कमा रहे हों. साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस, इमरजेंसी फ़ंड मौजूद हो और बच्चे अकाउंट को UPI ID न मानते हों.

लेकिन ध्यान रहे: मार्केट हर साल 8% का रिटर्न नहीं देता. कभी ऊपर, कभी नीचे. इसे कहते हैं “सीक्वेंस ऑफ़ रिटर्न्स रिस्क”. अगर शुरुआती सालों में मार्केट गिरा और पैसा निकालते रहे, तो कॉर्पस तेज़ी से घटेगा.

तो हल क्या है? जब मार्केट नीचे हो तो थोड़ा कम पैसा निकालें और जब ऊपर हो तो थोड़ा ज़्यादा.

अगर ज़्यादा ख़र्च है?

अगर आज मासिक ख़र्च ₹1 लाख है, तो हिसाब डबल हो जाएगा.

20 साल बाद, आप हर महीने ₹3.2 लाख ख़र्च करेंगे. इसके लिए आपको ₹8.3 करोड़ के कॉर्पस की ज़रूरत होगी.

SIP जो बचाएगा

हां, ये सब सुनकर लग सकता है कि अब तो हमेशा काम ही करना होगा. लेकिन यहीं से कहानी रोमांचक मोड़ लेती है.

20 सालों में ₹4.15 करोड़ तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने ₹42,000 की SIP शुरू करनी होगा, ये मानकर कि म्यूचुअल फ़ंड्स 12% सालाना रिटर्न देंगे.

कई लोगों को ये रास्ता काफ़ी आसान लगेगा.

वैसे, आज ₹1 लाख ख़र्च करने वालों के लिए ₹8.3 करोड़ का लक्ष्य पाने के लिए ₹84,000 से ज़्यादा की SIP की ज़रूरत होगी. हालांकि अगर रिटायरमेंट 20 की बजाय 25 साल बाद किया जाए, तो बोझ हल्का हो जाएगा. वही ₹4.15 करोड़ के लक्ष्य के लिए आपकी मासिक SIP घटकर लगभग ₹44,000 रह जाती है.

परेशान नहीं हों!

हां, शुरुआत में ये आंकड़े डरावने लगते हैं. हां, शायद कुछ ख़र्चों में कटौती करना या कुछ साल ज़्यादा काम करना हो सकता है. लेकिन अगर प्लान के साथ टिके रहें, नियमित रूप से निवेश करें और अनुशासित रहें, तो मंज़िल आपके हाथ में होगी.

असर में, शानदार रिटायरमेंट किस्मत पर निर्भर नहीं करता. ये उसके लिए तैयारी करने और लंबे समय तक मैदान पर बने रहने के बारे में है ताकि कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके.

और आप जब उस मुक़ाम पर पहुंचोगे, तो सिर्फ़ पैसा नहीं होगा. ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीने की आज़ादी होगी.

रिटायरमेंट के लिए SIP शुरू करना चाहते हो?

ये सवाल सबके लिए एक जैसा नहीं है. जो फ़ंड दोस्त के लिए सही है, वही आपके लिए सही हो, ये ज़रूरी नहीं. सही रिटायरमेंट प्लान आपकी रिस्क लेने की क्षमता, समय और निवेश की आदत पर निर्भर करता है.

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र यहीं पर काम आता है. हमारे एनालिस्ट हर इक्विटी फ़ंड को ट्रैक करते हैं - सिर्फ़ रिटर्न नहीं, बल्कि पोर्टफ़ोलियो क्वालिटी, कंसिस्टेंसी और लागत का भी एनालेसिस करते हैं. फिर एक लिस्ट बनाते हैं जो अलग-अलग निवेशकों के लक्ष्य और रिस्क प्रोफ़ाइल के हिसाब से फिट बैठे, जिनमें रिटायरमेंट प्लानिंग भी शामिल है.

इसे ऐसे समझें जैसे पर्सनल कोच हो, जो ट्रेनिंग प्लान भी बनाता है और ये भी बताता है कि कौन-सी रेस दौड़नी है. बस हर महीने SIP के साथ मैदान में आना है.

आज ही वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र एक्सप्लोर कीजिए!

ये भी पढ़ें: 10 साल में ₹1 करोड़: मुमकिन है पर रिटायरमेंट…नामुमकिन!

ये लेख पहली बार सितंबर 19, 2025 को पब्लिश हुआ.

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