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सारांशः IPO के बाद एक ज़बरदस्त गिरावट ने इस स्टॉक की कीमत आधी कर दी. अब हालात बदल रहे हैं, लेकिन साइक्लिकल (उतार-चढ़ाव वाले) बिज़नेस के लिए असली सवाल यह है कि इस रिकवरी का कितना असर पहले ही स्टॉक की क़ीमत पर दिख चुका है.
कुछ ही बिज़नेस ऐसे होते हैं जिनमें साइक्लिकल बिज़नेस की तरह ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव आते हैं. आइए Uniparts का उदाहरण लेते हैं. दिसंबर 2022 में लिस्ट हुई इस कंपनी का स्टॉक अगले दो सालों में चुपचाप गिरकर लगभग ₹300 पर आ गया. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि उसका बिज़नेस खराब हो गया था, बल्कि बिज़नेस साइकिल में बदलाव आया था.
जब साइकिल बदला, तो बदलाव बहुत ज़ोरदार था. और अब जब कंपनी धीरे-धीरे उबर रही है, तो सवाल यह है: क्या वह IPO, जो उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा था, अब आखिरकार फ़ायदे का सौदा बन सकता है?
यूनिपार्ट्स क्या करती है?
यूनिपार्ट्स कृषि और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) वाहनों के लिए पुर्जे बनाने वाली कंपनी है. इसके ग्राहकों में दुनिया की बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
कंपनी दो मुख्य चैनलों के ज़रिए काम करती है. Deere, Kubota, TAFE और CNH जैसी एग्रीकल्चरल कंपनियों के लिए, Uniparts का मुख्य प्रोडक्ट 'थ्री-पॉइंट लिंकेज' (3PL) है. यह ट्रैक्टर के पिछले हिस्से में लगा एक मैकेनिज़्म है जो हल और कल्टीवेटर जैसे उपकरणों को जोड़ता और कंट्रोल करता है.
Caterpillar और Bobcat जैसे कंस्ट्रक्शन क्लाइंट्स के लिए, कंपनी मुख्य रूप से प्रिसिजन-मशीन्ड पार्ट्स (सटीक मशीनिंग से बने पार्ट्स) सप्लाई करती है. कुल बिक्री में एग्रीकल्चरल इक्विपमेंट का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत है और बाक़ी हिस्सा कंस्ट्रक्शन सेक्टर से आता है. कंपनी के रेवेन्यू में नॉर्थ अमेरिका का योगदान लगभग आधा है, यूरोप का लगभग 25 प्रतिशत और भारत का लगभग 15 प्रतिशत है.
कारोबार पर दबाव क्यों आया?
तेज़ी के दौर के बाद, फ़सलों की गिरती क़ीमतों, एग्रीकल्चर से होने वाली कम आमदनी और एग्रीकल्चर में लगने वाली ज़्यादा लागत ने किसानों की ख़रीदने की क्षमता को कम कर दिया. सप्लाई चेन की समस्याओं ने इस नुक़सान को और बढ़ा दिया.
कोविड महामारी के दौरान, डीलरों ने कमी के डर से स्टॉक जमा कर लिया था. जब आखिरकार मांग कम हुई, तो उन्होंने नए ऑर्डर देना बंद कर दिया और मौजूदा स्टॉक बेच दिया. इस तरह, भले ही आम ग्राहकों की मांग में गिरावट मामूली थी, लेकिन मैन्युफैक्चरर्स को मिलने वाले ऑर्डर में भारी कमी आई. इसका नुक़सान यूनिपार्ट्स को उठाना पड़ा.
कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के मामले में भी ऐसा ही हुआ. ऊंची ब्याज दरों का असर रेजिडेंशियल हाउसिंग एक्टिविटी पर पड़ा, जो कॉम्पैक्ट मशीनरी की मांग का एक मुख्य कारण है. जैसे-जैसे घर बनाने का काम धीमा हुआ और डेवलपर्स सतर्क हुए, डीलरों ने फिर से इन्वेंट्री कम कर दी और नए ऑर्डर देने के बजाय ऑर्डर रोक दिए.
लगातार गिरावट
Uniparts के रेवेन्यू और मुनाफ़े में फ़ाइनेंशियल ईयर 23 से 25 तक लगातार गिरावट आई
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मार्च, 26 | मार्च, 25 | मार्च, 24 | मार्च, 23 | मार्च, 22 |
|---|---|---|---|---|---|
| रेवेन्यू (₹ करोड़) | 1,170 | 964 | 1,140 | 1,366 | 1,227 |
| एग्रीकल्चर (YoY बदलाव, %) | 18 | -17 | -24 | 12 | 37 |
| CFM (YoY बदलाव, %) | 27 | -13 | 3 | 30 | 29 |
| EBITDA मार्जिन (%) | 21 | 15 | 18 | 22 | 22 |
| टैक्स के बाद मुनाफ़ा (₹ करोड़) | 162 | 88 | 125 | 205 | 169 |
| CFM यानी कंस्ट्रक्शन, फ़ॉरेस्ट्री और माइनिंग | |||||
आखिरकार, समय ने यूनिपार्ट्स के लिए हालात और ख़राब कर दिए. आम तौर पर, खेती और कंस्ट्रक्शन मार्केट में तेज़ी-मंदी के साइकिल के अलग-अलग समय पर सुस्ती आती है, इसलिए दोनों सेक्टर में मौजूदगी को एक समझदारी भरा बचाव (हेज) माना जाता था. यूक्रेन युद्ध की वजह से एग्रीकल्चर सेक्टर में मंदी देर से आई, जिससे फसलों की क़ीमतें और किसानों का ख़र्च ऊंचा बना रहा. जब यह सहारा खत्म हुआ, तो पहली बार ऐसा हुआ कि दोनों मार्केट एक साथ नीचे गिर गए, और जिस बचाव (हेज) से कारोबार को सुरक्षा मिलने की उम्मीद थी, उसने कोई सुरक्षा नहीं दी. इसका नतीजा साफ़ था, क्योंकि लगातार दो सालों में रेवेन्यू में 15 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई.
हालात सुधर रहे हैं, लेकिन सब कुछ एकदम ठीक नहीं है
भले ही हालात बदल रहे हैं, लेकिन इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है.
जो डीलर सालों से पुराना स्टॉक बेच रहे थे, वे अब नए ऑर्डर दे रहे हैं और ब्याज दरों में कमी से लोगों ने गैर-ज़रूरी चीज़ों पर खर्च करना शुरू कर दिया है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कुल मिलाकर एग्रीकल्चर का क्षेत्र पटरी पर लौट रहा है. जहां छोटे ट्रैक्टरों की बिक्री में तेज़ी आती दिख रही है क्योंकि किसान पुरानी मशीनों को बदलकर नई मशीनें ले रहे हैं, वहीं बड़े ट्रैक्टरों की बिक्री में अभी कोई सुधार नहीं दिखा है.
डीयर (Deere) और CNH की हालिया टिप्पणियों से पता चलता है कि खेती-बाड़ी के क्षेत्र में मंदी का दौर अब खत्म होने वाला है; 2026 में सुधार शुरू होने और 2027 तक इसमें तेज़ी आने की उम्मीद है. इस सेगमेंट में उत्तरी अमेरिका के मुकाबले यूरोप में पहले से ही बेहतर मांग दिख रही है और यूनिपार्ट्स (Uniparts) को यूरोपीय मैन्युफैक्चरर्स से हाई-हॉर्सपावर प्लेटफॉर्म के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट मिल रहे हैं. जब बड़े कृषि उपकरणों की मांग में सुधार होगा और मौजूदा स्तर से इसमें सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी की गुंजाइश है - तो इन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स से असली कमाई बढ़ सकती है.
कंस्ट्रक्शन सेक्टर में स्थिति काफ़ी अलग है, जहां OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) को ज़बरदस्त डिमांड और ऑर्डर की अच्छी विज़िबिलिटी दिख रही है. कैटरपिलर ने हाल ही में बताया कि उसका रेवेन्यू साल-दर-साल 38% बढ़ा है और ऑर्डर बैकलॉग में 79% की बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह इंफ्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च, डेटा सेंटर बनाना और रेंटल फ्लीट को फिर से भरना है, जो 2028 तक जारी रहेगा. डीयर ने भी 2026 में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 20% ग्रोथ का अपना अनुमान बढ़ाया है.
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ग्रोथ की बात
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में रेवेन्यू 21% बढ़ा और EBITDA मार्जिन वापस 20% से ऊपर पहुंच गया, जबकि एग्रीकल्चर सेक्टर अभी भी भारी मंदी के दौर से गुज़र रहा था. पिछले साल का कम बेस भी मददगार रहा, लेकिन मुख्य मार्केट के सुस्त रहने के बावजूद मार्जिन को वापस पाना और नया मार्केट शेयर हासिल करना, सिर्फ़ रिकवरी का फ़ायदा उठाने से कहीं ज़्यादा मज़बूत संकेत है. मैनेजमेंट ने फ़ाइनेंशियल ईयर 27 में भी ऐसी ही ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जिसे बड़े एग्रीकल्चर और प्रिसिजन पार्ट्स सेगमेंट में सालाना ₹225 करोड़ के नए बिज़नेस से सहारा मिलेगा. इसमें हाई-हॉर्सपावर ट्रैक्टरों के लिए एक नया 3PL प्लेटफ़ॉर्म भी शामिल है, जिसे पहले ही नए OEM ऑर्डर मिल चुके हैं.
अब यूनिपार्ट्स का आधे से ज़्यादा रेवेन्यू उसके वेयरहाउस-और-डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से आता है. इस मॉडल में मार्जिन 25-28% होता है, जबकि कंपनी का औसत मार्जिन 21% है; इसमें मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन, दोनों का मार्जिन शामिल होता है. यह मॉडल यूनिपार्ट्स को सीधे कस्टमर की सप्लाई चेन से जोड़ता है, जिसमें सेफ़्टी स्टॉक रखा जाता है और असेंबली लाइनों तक 'जस्ट-इन-टाइम' डिलीवरी की जाती है. मैक्सिको में नया वेयरहाउस, जो फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की तीसरी तिमाही से चालू है, इस व्यवस्था को और आगे बढ़ाता है और उम्मीद है कि 2026 में इससे ₹100 करोड़ की अतिरिक्त कमाई होगी.
किन बातों का ध्यान रखें
साइकिल का सबसे बुरा दौर अब पीछे छूट चुका है और नए कस्टमर प्रोग्राम शुरू हो रहे हैं, इसलिए यूनिपार्ट्स आने वाले इंडस्ट्रियल अपसाइकिल का पूरा फ़ायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है.
हालांकि, साइक्लिकल बिज़नेस होने के कारण, इसमें 'री-रेटिंग' (मूल्यांकन में बड़े बदलाव) की गुंजाइश सीमित है. बाज़ार ने हमेशा से इसकी इस प्रकृति को समझा है और उसी के हिसाब से इसकी क़ीमत तय की है. इसलिए, भविष्य में रिटर्न 'मल्टीपल एक्सपेंशन' के बजाय 'अर्निंग्स ग्रोथ' से मिलने की ज़्यादा संभावना है. वेयरहाउस मॉडल और लगातार भौगोलिक विस्तार ने इसकी कमाई को ज़्यादा मज़बूत बनाया है, लेकिन 'ऑफ-हाईवे कैपिटल एक्सपेंडिचर' में अचानक आई गिरावट अभी भी इसे तेज़ी से कम कर सकती है, जैसा कि पिछले दो सालों में साफ़ तौर पर देखा गया है. इसके अलावा, इसके एंड-मार्केट की धीमी गति को देखते हुए, लंबे समय तक चलने वाले जियोपॉलिटिकल टकराव महंगाई का दबाव फिर से बढ़ा सकते हैं और रिकवरी के समय को फ़ाइनेंशियल ईयर 27 से आगे धकेल सकते हैं.
यूनिपार्ट्स के लिए कैपिटल ओवरहैंग (पूंजी का फंसा होना) एक बड़ी चिंता है. ग्लोबल OEM को 'जस्ट-इन-टाइम' डिलीवरी देने के लिए, यूनिपार्ट्स भारत से तैयार सामान अमेरिका और यूरोप में अपने वेयरहाउस में भेजती है, जहां यह सामान 'सेफ्टी स्टॉक' के तौर पर रखा रहता है. आमतौर पर इन्वेंट्री डेज़ (सामान के स्टॉक में रहने का समय) 120 से 150 दिन के बीच होते हैं, इसलिए अगर OEM के प्रोडक्शन शेड्यूल में कोई कमी आती है, तो पूंजी विदेश में रखी इन्वेंट्री में फंस सकती है. इससे न सिर्फ वर्किंग कैपिटल पर दबाव पड़ता है, बल्कि इन्वेंट्री के बेकार होने और उसे बट्टे खाते में डालने (write-off) का जोखिम भी बढ़ जाता है, जिससे लिक्विडिटी पर सीधा असर पड़ता है.
अब यह देखना होगा कि क्या यह तेज़ी फ़ाइनेंशियल ईयर 27 तक बनी रहती है, वॉल्यूम बढ़ने के साथ मार्जिन बरकरार रहता है या नहीं और एग्रीकल्चर से जुड़ा बड़ा मार्केट कितनी तेज़ी से रिकवर करता है. वह सेगमेंट अभी भी सुस्त है और उसके संभलने की रफ़्तार ही यह तय करेगी कि फ़ाइनेंशियल ईयर 27 सिर्फ़ एक अच्छा साल होगा या फिर कोई बड़ा और अहम बदलाव (inflexion point) लाने वाला साल.
क्या यूनिपार्ट्स आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह पाने का हकदार है?
साइक्लिकल स्टॉक्स के मामले में सही समय का अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल होता है और इनमें ग़लती होने की संभावना ज़्यादा होती है. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र आपको रिसर्च आधारित स्टॉक रेकमंडेशन, स्पष्ट ख़रीद और बिक्री गाइडेंस और लंबे समय में वेल्थ तैयार करने के लिए निर्मित एक क्यूरेटेड पोर्टफ़ोलियो देता है. साइकिल का अनुमान लगाना बंद करें और दृढ़ विश्वास के साथ निवेश करना शुरू करें.
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