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सारांशः ज़्यादा फ़ंड्स का मतलब हमेशा ज़्यादा सुरक्षा नहीं होती; कभी-कभी ये आपके विनर्स का असर फ़ीका कर देते हैं. जानिए कि क्यों बढ़ती वेल्थ आपके पोर्टफ़ोलियो को धीरे-धीरे ‘औसत’ बना सकती है.
पैसे से जुड़ा एक ख़ास तरह का भ्रम होता है - वो जो सिर्फ़ पैसा ही ला सकता है. ये “मैं बिल कैसे भरूं?” वाला नहीं, बल्कि “मेरे पास ₹1 करोड़ हैं, अब क्या करूं?” वाला है.
ज़्यादातर लोगों के लिए निवेश की शुरुआत ज़रूरत से होती है. इनमें इमरजेंसी फ़ंड बनाना, बीमा लेना, भविष्य के लिए बचत करना शामिल है. लेकिन जब ये सब पूरे हो जाते हैं और आपकी वित्तीय स्थिति सहज लगने लगती है, तो एक अजीब बेचैनी शुरू होती है. ऐसे में, ग्रोथ की खोज अब परफेक्शन की तलाश में बदल जाती है.
वेल्थ की विडंबन यही है कि ये शांति नहीं लाती; ये आत्म-संदेह लाती है. आप सोचना शुरू करते हैं कि क्या आप और बेहतर कर सकते हैं, क्या आपको और फ़ंड्स और कैटेगरीज़ और जटिलता जोड़नी चाहिए. यहीं से पोर्टफ़ोलियो आगे बढ़ना बंद कर देता है और हाशिये की तरफ़ बढ़ने लगता है.
अमीर निवेशक की डाइवर्सिफ़िकेशन की दुविधा
जैसे-जैसे पोर्टफ़ोलियो का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे बड़े स्तर पर डाइवर्सिफ़िकेशन की लालसा भी बढ़ती है. एक बड़ा पोर्टफ़ोलियो कुछ नए नामों के बिना अधूरा लगता है. ज़्यादा फ़ंड्स ज़्यादा सुरक्षा का वादा करते हैं और कम से कम दिखने में तो प्रभावशाली लगते हैं.
लेकिन इन फ़ंड्स के भीतर झांकिए, तो कहानी अलग मिलती है. लार्ज-कैप और फ़्लेक्सी-कैप स्कीम्स अक्सर लगभग समान पोर्टफ़ोलियो रखती हैं. दोनों कैटेगरीज के बीच औसतन 48% ओवरलैप होता है - यानी जो आपके एक फ़ंड में है, वही आधा हिस्सा दूसरे में भी मौजूद है.
जो विविधता दिखती है, वो अक्सर दोहराव होती है. 10 फ़ंड्स, अगर सबमें HDFC Bank, Reliance Industries, Infosys या ICICI Bank जैसे शेयर हैं, तो वे जोखिम को छह फ़ंड्स से बेहतर नहीं बांटते. बाज़ार के झटकों में ये सभी एक साथ ऊपर-नीचे होते हैं, बस अलग-अलग नामों के साथ.
इसलिए, फ़ंड्स की संख्या तो बढ़ जाती है, लेकिन सुरक्षा नहीं. ये डाइवर्सिफ़िकेशन का का रूप तो है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है.
जब डाइवर्सिफ़िकेशन प्रदर्शन को नुक़सान पहुंचाने लगता है
डाइवर्सिफ़िकेशन ज़रूरी है, लेकिन केवल एक हद तक. शुरुआती कुछ फ़ंड जोखिम को संतुलित करते हैं और रिटर्न बेहतर बनाते हैं. लेकिन बहुत ज़्यादा फ़ंड्स जोड़ने से प्रदर्शन उल्टा गिर सकता है.
ऐसा क्यों? असल में, हर नया फ़ंड आपकी पूंजी को और ज़्यादा हिस्सों में बांट देता है. जो शीर्ष फ़ंड्स वास्तव में आपके रिटर्न को आगे बढ़ा रहे हैं, उनका हिस्सा आपके कुल पोर्टफ़ोलियो में घट जाता है.
नीचे दिए गए उदाहरण को देखिए - ये दिखाता है कि जब आप एक ही कैटेगरी (फ़्लेक्सी-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप) में बार-बार नए फ़ंड जोड़ते हैं, तो क्या होता है.
जब ज़्यादा फ़ंड का मतलब कम मुनाफ़ा हो जाए
हर नया 'बेस्ट' फ़ंड आपके टॉप परफ़ॉर्मर्स के वेट को कम करता है - और साथ ही आपके पोर्टफ़ोलियो के कुल रिटर्न को भी
| फ़ंड्स की संख्या | फ़्लेक्सी कैप (%) | मिड कैप (%) | स्मॉल कैप (%) |
|---|---|---|---|
| 1 | 21.6 | 20.7 | 24.5 |
| 3 | 19.8 | 20.5 | 23.3 |
| 6 | 18.4 | 19.9 | 22 |
| 9 | 17.6 | 19.6 | 21 |
| 12 | 17.1 | 19.3 | 20.1 |
| जनवरी 2013 से एवरेज डेली 5-ईयर रोलिंग रिटर्न पर आधारित | |||
ऊपर दिए डेटा से पैटर्न साफ़ दिखता है:
- जब आपके पास केवल एक या दो अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड होते हैं, रिटर्न सबसे ज़्यादा होता है.
- जैसे-जैसे नए फ़ंड जुड़ते हैं, रिटर्न घटने लगता है.
- 10 से 12 फ़ंड्स तक पहुंचते-पहुंचते, औसत रिटर्न सभी कैटेगरीज में सपाट हो जाता है.
इससे साफ़ है कि नया फ़ंड जोड़ने से हमेशा नया अवसर नहीं मिलता. बल्कि, ये आपके बेहतरीन फ़ंड्स के प्रभाव को कम कर देता है. नतीजतन, आपका पोर्टफ़ोलियो मार्केट के एवरेज जैसा व्यवहार करने लगता है.
सरल शब्दों में कहें तो बहुत ज़्यादा फैलाव, सफलता का असर सीमित कर देता है.
कम जोखिम या बस कम रिटर्न?
कई निवेशक मानते हैं कि भले ही ज़्यादा फ़ंड रिटर्न न बढ़ाएं, लेकिन कम से कम पोर्टफ़ोलियो को सुरक्षित तो बनाएंगे. लेकिन सच्चाई ये है - ज़्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता.
इसे समझने के लिए हमने एक सरल प्रयोग किया. मान लीजिए आप एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड, एक मिड-कैप फ़ंड और एक स्मॉल-कैप फ़ंड के साथ शुरुआत करते हैं, हर एक में 33.33% एलोकेशन करते हैं. अब इसी प्रक्रिया को दोहराइए - हर कैटेगरी में एक नया फ़ंड जोड़ते जाइए, जब तक आपके पास 12 फ़ंड (हर कैटेगरी के चार) न हो जाएं.
अब आगे बढ़ने से पहले, वोलैटिलिटी को समझते हैं - यानी आपके पोर्टफ़ोलियो की वैल्यू कितनी ऊपर-नीचे होती है. जितना ज़्यादा उतार-चढ़ाव, उतना ज़्यादा जोखिम महसूस होता है.
इसे मापने के लिए “स्टैंडर्ड डेविएशन” (standard deviation) का इस्तेमाल होता है - जो बताता है कि औसत रिटर्न से रिटर्न कितना अलग होता है. छोटे आंकड़े मतलब स्थिर प्रदर्शन, ज़्यादा का मतलब है अस्थिरता.
अब इस प्रयोग को और व्यापक बनाने के लिए हमने तीन वर्जन बनाए:
- सबसे कम वोलैटिलिटी वाले फ़ंड (12 साल के डेटा पर आधारित)
- औसत वोलैटिलिटी वाले फ़ंड
- सबसे अधिक वोलैटिलिटी वाले फ़ंड (10 साल के डेटा पर आधारित)
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हमने पाया
ज़्यादातर निवेशकों का मानना है कि ज़्यादा फ़ंड्स जोड़ने से पोर्टफ़ोलियो स्थिर हो जाता है. लेकिन डेटा इसका उलटा दिखाता है.
1. सबसे स्थिर पोर्टफोलियो
डेटा से पता चला कि सबसे कम वोलैटिलिटी वाले पोर्टफ़ोलियो में भी कुल स्टैंडर्ड डेविएशन थोड़ा बढ़ा. यानी जितने ज़्यादा फ़ंड्स जोड़े, स्थिरता उतनी घटी.
हमने रिटर्न-एडजस्टेड रिटर्न भी देखा - यानी हर यूनिट जोखिम पर आप कितना रिटर्न कमा रहे हैं. उदाहरण के लिए, अगर किसी फ़ंड ने औसतन 18% रिटर्न दिया और उसका स्टैंडर्ड डेविएशन 12% है, तो प्रति जोखिम यूनिट रिटर्न 1.5 (18 ÷ 12) होगा. जितना ये आंकड़ा बड़ा था, उतना बेहतर रिटर्न दिया.
असल में, डाइवर्सिफ़िकेशन ने दक्षता घटाई - बढ़ाई नहीं.
2. सबसे अस्थिर पोर्टफ़ोलियो
यहां वोलैटिलिटी तो कुछ घटी, लेकिन रिटर्न-एडजस्टेड जोखिम भी घट गया. यानी स्थिरता की कोशिश ने परफ़ॉर्मेंस को सीमित कर दिया.
3. औसत पोर्टफ़ोलियो
ये सबसे आम निवेशकों वाला पोर्टफ़ोलियो है. यहां छह फ़ंड्स हों या बारह - न वोलैटिलिटी में कोई फर्क पड़ा, न रिटर्न में.
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फ़ंड जोड़ना यानि असर कम करना
फ़्लेक्सी, मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स को मिलाने के बाद भी, 'एवरेज-अस्थिर पोर्टफोलियो' में और फ़ंड जोड़ने से अस्थिरता और रिटर्न में शायद ही कोई सुधार होता है
| फ़ंड्स की संख्या | सबसे कम अस्थिर फ़ंड (स्टैंडर्ड डेविएशन %/रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न) | औसत अस्थिरता वाले फ़ंड (स्टैंडर्ड डेविएशन %/रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न) | सबसे ज़्यादा अस्थिर फ़ंड (स्टैंडर्ड डेविएशन %/रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न) |
|---|---|---|---|
| 3 | 12.9/1.6 | 15.5/1.2 | 18.0/1.5 |
| 6 | 13.3/1.2 | 15.3/1.3 | 17.1/1.3 |
| 9 | 13.6/1.4 | 15.4/1.2 | 16.8/1.4 |
| 12 | 13.8/1.4 | 15.5/1.2 | 16.7/1.0 |
| डेटा जनवरी, 2013 से नवंबर, 2025 तक का है | |||
तो, एक ही कैटेगरी में नया फ़ंड कब जोड़ना चाहिए?
1. ऐसे फ़ंड चुनें जो वास्तव में डाइवर्सिफ़िकेशन जोड़ें
कोई नया फ़ंड जोड़ने से पहले, सुनिश्चित करें कि वो आपके पोर्टफ़ोलियो में कुछ नया लाए. अगर उसमें आपके मौजूदा फ़ंड्स के समान ही कई स्टॉक हैं, तो वो वैल्यू नहीं जोड़ रहा है; ये बस अव्यवस्था बढ़ा रहा है. लक्ष्य उन फ़ंड्स को शामिल करना है जो नई कंपनियों या क्षेत्रों से जुड़े हैं जो आपके पास पहले से नहीं हैं.
आप फ़ंड की फैक्टशीट देखकर या वैल्यू रिसर्च वेबसाइट पर जाकर आसानी से इसकी जांच कर सकते हैं, जहां प्रत्येक फ़ंड की होल्डिंग्स और दूसरों के साथ ओवरलैप स्पष्ट रूप से दिखाए जाते हैं.
2. इन्वेस्टमेंट की स्टाइल में विविधता लाएं
डाइवर्सिफ़िकेशन केवल कैटेगरीज के बारे में नहीं है; ये इस बारे में भी है कि कोई फ़ंड कैसे निवेश करता है. कुछ फ़ंड ग्रोथ का नज़रिया अपनाते हैं-तेज़ी से विस्तार करने वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं-जबकि अन्य वैल्यू का नज़रिया अपनाते हुए ऐसे मज़बूत व्यवसायों का चयन करते हैं जिनका वैल्यूएशन अस्थायी रूप से कम हो सकता है. दोनों स्टाइल का मिश्रण आपके पोर्टफ़ोलियो को बाज़ार के विभिन्न चरणों में संतुलित रखने में मदद करता है.
साथ में, ये छोटी और लंबी अवधि दोनों में आपके रिटर्न को संतुलित रखते हैं. ये जानने के लिए कि कोई फ़ंड किस स्टाइल का अनुसरण करता है, हमारी वेबसाइट पर उसके पोर्टफ़ोलियो कम्पोजिशन पेज को देखें या उसकी लिस्टेड निवेश स्टाइल के लिए फ़ंड की फैक्ट-शीट देखें.
3. अलग-अलग फ़ंड हाउस से निवेश करें
एक ही AMC (एसेट मैनेजमेंट कंपनियों या फ़ंड हाउस) के फ़ंड अक्सर एक समान रिसर्च की प्रक्रिया और निवेश मानसिकता साझा करते हैं. इसलिए, कई फ़ंड हाउस से फ़ंड चुनने से विचारों का दायरा बढ़ता है और एक ही रणनीति पर निर्भरता कम होती है.
4. हर फ़ंड का एक उद्देश्य हो
हर नया फ़ंड तीन में से एक काम करे - रिटर्न बढ़ाए, आपसी-संबंध (correlation) घटाए या कोई खाली जगह भरे. अगर नहीं, तो वह बस क्लटर बढ़ा रहा है.
आख़िरी बात
एक अच्छा पोर्टफ़ोलियो वो नहीं जिसमें फ़ंड्स की लंबी लिस्ट हो. बल्कि वो है जिसमें हर फ़ंड अपनी जगह सही साबित करे. सच्ची समझदारी सादगी में है - चाहे आपका निवेश एक करोड़ हो या 10 करोड़.
अपने पोर्टफोलियो को सरल बनाइए, रिटर्न को बढ़ाइए
वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के साथ जानिए कौन-से फ़ंड वाक़ई आपके लायक हैं, और कौन सिर्फ़ दिखने में आकर्षक हैं. स्पष्टता के साथ निवेश कीजिए - भीड़ नहीं, प्रभाव बढ़ाइए.
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ये लेख पहली बार नवंबर 12, 2025 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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