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नए निवेशकों के लिए 2 बेहतरीन म्यूचुअल फ़ंड, सुकून के साथ बनाएंगे वेल्थ

आइए जानते हैं कैसे

आइए जानते हैं कैसे

सारांशः लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का असली राज़ जोखिम भरी दौड़ नहीं, बल्कि बेजोड़ निरंतरता है. नए निवेशक अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा जोखिम लेते हैं और पहली गिरावट में घबरा जाते हैं. इस स्टोरी में हम वो आदर्श बैलेंस्ड पोर्टफ़ोलियो रणनीति के बारे में बता रहे हैं, जो आपके निवेश के शुरुआती वर्षों के लिए सबसे उपयुक्त है. यहां दो मूलभूत पोर्टफ़ोलियो विकल्प - उनके दीर्घकालिक प्रदर्शन, लाभ और सीमाओं के साथ - दिए गए हैं ताकि आपका पैसा बढ़े और नींद भी चैन से आए.

अगर आप म्यूचुअल फ़ंड में नए हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे - “क्या इक्विटी निवेश एक लॉटरी जैसा है?”, “क्या म्यूचुअल फ़ंड मौजूदा दौर का कोई नया स्कैम है?”, “मैं सारा पैसा इक्विटी में नहीं लगा सकता, वो तो जोखिम भरा है.” दूसरी तरफ़ कुछ निवेशक कहेंगे, “स्मॉल-कैप फ़ंड्स इन दिनों धमाल मचा रहे हैं, कौन-सा ख़रीदूं?” या “डेट फ़ंड्स तो बोरिंग हैं, मुझे हाई रिटर्न चाहिए.”

वैल्यू रिसर्च में हमारा सिद्धांत सरल है - निवेश में ‘सुर्खियों’ को पकड़ने की नहीं, बल्कि स्थिरता से वेल्थ बनाने की कला सीखिए.

जैसे एक T20 टीम को स्लॉगर, स्ट्रोक-प्लेयर और एंकर तीनों चाहिए, वैसे ही आपके पोर्टफ़ोलियो में भी संतुलन ज़रूरी है. इसीलिए, नए निवेशकों के लिए हम 75:25 एसेट एलोकेशन की सलाह देते हैं, यानि 75% इक्विटी में और 25% डेट में.

क्यों? असल में, इक्विटी का पोर्शन लंबे समय में वेल्थ बढ़ाता है, जबकि डेट का पोर्शन बाज़ार में गिरावट आने पर झटका सोख लेता है - जैसे कि आपकी कार का शॉक एब्ज़ॉर्बर होता है. कई “एग्रेसिव” निवेशक गिरावट में घबराकर निकल जाते हैं, जबकि सफलता की कुंजी होती है टिके रहना. यही जगह है जहां थोड़ी सा डेट एलोकेशन आपकी मदद करता है ताकि आप निरंतर रहें और कंपाउंडिंग को काम करने का समय दें.

लंबे समय में वेल्थ बनाने के दो आसान रास्ते

विकल्प 1: फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड + शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फ़ंड में SIP शुरू करें

75% फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में और 25% शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फ़ंड में निवेश करें.

  • फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड अपने फ़ंड मैनेजर्स को मार्केट के सबसे अच्छे मौक़े चुनने के लिए लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश का लचीलापन देता है.
  • शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फ़ंड 1–3 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स में निवेश करते हैं, जो स्थिरता और मध्यम रिटर्न देते हैं.

ये संयोजन आपको ग्रोथ (इक्विटी से) और सुरक्षा (डेट से) दोनों प्रदान करता है.

विकल्प 2: एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड में SIP शुरू करें

एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड में इक्विटी (आम तौर पर 65–80%) और डेट दोनों शामिल होते हैं.

इससे आपको स्वतः ही संतुलित पोर्टफ़ोलियो मिलता है - इक्विटी ग्रोथ देती है और डेट अस्थिरता घटाती है.

प्रदर्शन

चलिए, अब आंकड़ों पर ग़ौर करते हैं.

• विकल्प 1 (फ़्लेक्सी-कैप में 75 प्रतिशत+ शॉर्ट ड्यूरेशन डेट में 25 प्रतिशत) का औसत 5-वर्षीय रोलिंग रिटर्न 12.9% रहा.
• औसत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड का 5-वर्षीय रोलिंग रिटर्न 13.3% रहा.

मतलब - दोनों लगभग बराबर, लेकिन हाइब्रिड फ़ंड्स थोड़ा आगे रहे.\

हालांकि, गहराई के साथ देखने पर दिलचस्प बात ये सामने आई कि नवंबर 2020 से नवंबर 2025 तक हर दिन हाइब्रिड फ़ंड्स का रिटर्न 75:25 पोर्टफ़ोलियो से ज़्यादा रहा.

ये भी पढ़ेंः आपके लॉन्ग-टर्म पोर्टफ़ोलियो के लिए दो बेहतरीन म्यूचुअल फ़ंड

एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स के दूसरे फ़ायदे

फ़्लेक्सी-कैप और एक डेट फ़ंड के साथ अपना 75-25 मिक्स बनाने से आपको कंट्रोल तो मिलता है, लेकिन इसके लिए नियमित री-बैलेंसिंग ज़रूरी होती है - यानी जब इक्विटी बहुत बढ़ जाए, तो थोड़ा मुनाफ़ा निकालकर डेट में डालना पड़े. नए निवेशकों के लिए ये भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है.

फ़ंड के भीतर जो भी इक्विटी या डेट ट्रांजैक्शन होते हैं, उन पर आपको टैक्स नहीं देना पड़ता. चूंकि इनमें 65% से अधिक इक्विटी होती है, इसलिए पूरे फ़ंड पर इक्विटी फ़ंड की तुलना में कम टैक्स रेट पर टैक्स होता है.

दूसरी ओर, अगर आप अलग-अलग फ़ंड्स में निवेश करते हैं, तो हर बार डेट फ़ंड बेचने या री-बैलेंस करने पर टैक्स लग सकता है, जिससे रिटर्न घटता है.

मान लीजिए कि आपका पोर्टफ़ोलियो ₹75,000 इक्विटी और ₹25,000 डेट से शुरू होता है. एक साल बाद, इक्विटी में तेज़ी आती है और आपका पोर्टफ़ोलियो ₹90,000 इक्विटी और ₹26,000 डेट हो जाता है.

अब, आपका एलोकेशन 78-22 है, जो आपके लक्ष्य से ज़्यादा जोखिम भरा है. अपने 75-25 एलोकेशन पर वापस लौटने के लिए, आपको कुछ इक्विटी बेचकर उसे डेट में लगाना होगा ताकि वो वापस 75-25 पर आ जाए.

इसे रिबैलेंसिंग कहते हैं. ये ज़रूरी तो है, लेकिन ख़ासकर नए निवेशकों के लिए हमेशा आसान नहीं होता.

हाइब्रिड फ़ंड्स में ये काम प्रोफ़ेशनल फ़ंड मैनेजर खुद करते हैं - यानी आपको न निगरानी करनी है, न बेचने-ख़रीदने की चिंता.

इसके अलावा, ये टैक्स-एफिशिएंट भी हैं.

जब फ़ंड मैनेजर फ़ंड के भीतर इक्विटी या डेट ख़रीदता या बेचता है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता क्योंकि ये आंतरिक रूप से होता है. इसके अलावा, चूंकि इन फ़ंड्स में 65 प्रतिशत से ज़्यादा इक्विटी होती है, इसलिए इन पर इक्विटी फ़ंड्स की तरह ही टैक्स लगता है, यानी आपके निवेश के डेट वाले हिस्से पर भी टैक्स की दरें कम होती हैं.

इसके विपरीत, अगर आप इक्विटी और डेट फ़ंड्स का अलग-अलग प्रबंधन करते हैं, तो डेट फ़ंड से हर रीबैलेंस या बिक्री पर टैक्स लग सकता है, जो आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकता है.

निष्कर्ष

अगर आप एक धैर्यवान निवेशक हैं, जो सरल, टैक्स-एफिशिएंट और कम तनाव वाला निवेश चाहते हैं, तो एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड एक बढ़िया विकल्प है.

ये एक ही फ़ंड में इक्विटी और डेट दोनों का संतुलन, प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट और ऑटो-रीबैलेंसिंग प्रदान करता है. वेल्थ तैयार करने की राह में सरलता उबाऊ नहीं होती - ये सबसे बड़ा बल होती है.

क्या आप एक एग्रेसिव हाइब्रिड फंड में SIP शुरू करना चाहते हैं?

अगर आप तनावमुक्त होकर वेल्थ तैयार करने की दिशा में पहला कदम उठाने के लिए तैयार हैं, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र से शुरुआत करें.

हमारे एक्सपर्ट्स की टीम ने प्रदर्शन की निरंतरता, गिरावट से सुरक्षा, फ़ंड मैनेजर की रणनीति और पोर्टफ़ोलियो की क्वालिटी का एनालिसिस करके आपके लिए कड़ी मेहनत की है ताकि लंबे समय के निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड्स की एक लिस्ट तैयार की जा सके. ये केवल पिछले रिटर्न के आधार पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड नहीं हैं; ये ऐसे फ़ंड हैं जिन्होंने मार्केट साइकल्स में बेहतर अनुशासन बनाए रखा है.

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र को आज ही एक्सप्लोर करें.

ये भी पढ़ेंः क्या फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड से बेहतर हैं फ़ोकस्ड फ़ंड?

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