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सारांशः 2020 में लॉन्च हुआ ITI Small Cap अपनी शुरुआती सालों में परफ़ॉर्मेंस चार्ट पर सबसे नीचे रहा और रिकॉर्ड में दर्ज सबसे मज़बूत स्मॉल-कैप रैली के दौरान अपने बेंचमार्क से काफ़ी पीछे रह गया. ज़्यादातर निवेशकों ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. लेकिन शायद वो फ़ैसला जल्दबाजी में लिया गया था. इस स्टोरी में, हमने इस बात पर ग़ौर किया कि पिछले तीन सालों में इस फ़ंड ने कैसे वापसी की है.
ITI Small Cap ऐसा फ़ंड नहीं है जिसके बारे में ज़्यादा निवेशक बात करते हों. फ़रवरी 2020 में लॉन्च होने के बाद से ये ज़्यादातर निवेशकों की नज़र से दूर ही रहा, जबकि इसके पास वैल्यू रिसर्च की सम्मानजनक तीन-स्टार रेटिंग है. इसके एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में भी मामूली ग्रोथ हुई, जो ₹2,474 करोड़ से बढ़कर सिर्फ़ ₹2,835 करोड़ हो गई. ये उस तरह की तेज़ बढ़त नहीं है जिसकी उम्मीद किसी ऐसे फ़ंड से की जाए जिसने लगातार बेहतर काम किया हो.
और फिर भी, यही वो काम है जो इसने किया है.
पिछले तीन सालों में, ITI Small Cap अपनी कैटेगरी में दूसरा सबसे अच्छा फ़ंड बन गया है, जिसने 25.6% का सालाना रिटर्न दिया है. ये सिर्फ़ Bandhan Small Cap Fund से पीछे रहा. ये नतीजा किसी भी मानक पर काबिल-ए-तारीफ़ है और इसकी शुरुआती मुश्किलों को देखते हुए और भी उल्लेखनीय है.
एक निराशाजनक शुरुआत
मार्च 2020 से जून 2022 तक, यानी लगभग दो साल और कुछ महीनों तक, ITI Small Cap अपनी कैटेगरी का सबसे कमज़ोर फ़ंड था. इस दौरान इसके 13.9% के सालाना रिटर्न, Nifty Smallcap 250 TRI के 25.9% रिटर्न के लगभग आधे थे.
2021 में ये फ़ासला और भी बढ़ गया. जहां स्मॉल-कैप इंडेक्स 59.1% चढ़ा, फ़ंड 34.9% पर अटक गया. अगले साल भी स्थिति में ज़्यादा सुधार नहीं हुआ और कमज़ोर परफ़ॉर्मेंस जारी रहा.
इसके बाद आया 2023 और इसके साथ ही परफ़ॉर्मेंस अचानक बदल गई.
तब से लेकर अब तक, फ़ंड ने हर कैलेंडर वर्ष में अपने बेंचमार्क को पछाड़ा है और पिछले तीन वर्षों में दो बार कैटेगरी के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाई है. तो ये सवाल उठना स्वाभाविक है - आख़िर क्या बदला?
वजह-1: शीर्ष स्तर पर स्थिरता
सबसे स्पष्ट बदलाव फ़ंड मैनेजर के स्तर पर आया. लॉन्च से अगस्त 2022 तक, फ़ंड में लगातार बदलाव होते रहे. प्रदीप गोकले, जॉर्ज हेबर जोसेफ़, हेतल गड़ा और प्रतिभ अग्रवाल बारी-बारी से इसकी कमान संभालते रहे. इसका असर अमल यानी एग्जीक्यूशन पर पड़ा.
अगस्त 2022 में धीमंत शाह के आने और उसी साल दिसंबर में रोहन कोर्डे के सह-प्रबंधन जुड़ने के बाद स्थिरता आई. इसके तुरंत बाद परफ़ॉर्मेंस में ख़ासा सुधार देखने को मिला और अगले तीन वर्षों में फ़ंड कैटेगरी का दूसरा सबसे अच्छा फ़ंड बन गया.
लेकिन क्या ये सिर्फ़ नए मैनेजरों के आने से किस्मत का चमकना था? ऐसा तो नहीं है.
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वजह-2: विरासत में मिले स्टॉक सलेक्शन का अधिकतम लाभ उठाना
पोर्टफ़ोलियो का एनालेसिस एक और दिलचस्प तस्वीर दिखाता है. शाह और कोर्डे के आने के 12 महीने बाद भी, फ़ंड की 74 में से 39 होल्डिंग्स, यानी आधे से ज़्यादा, पुराने मैनेजरों की चुनी हुई थीं. और ये स्टॉक्स बोझ नहीं बने, बल्कि उन्होंने शानदार रफ्तार पकड़ी. अगले साल में इनका औसत रिटर्न 44.2% रहा, जबकि स्मॉल-कैप इंडेक्स का रिटर्न 28.1% था.
समय को 39 महीनों तक बढ़ाकर मौजूदा पोर्टफ़ोलियो पर नज़र डालें तो तस्वीर और साफ़ होती है. फ़ंड आज भी पुराने मैनेजरों द्वारा चुने गए 12 स्टॉक्स रखता है. इनका तीन साल का सालाना रिटर्न 36.2% रहा है, जबकि इंडेक्स इसी अवधि में 20.5% बढ़ा. इन स्टॉक्स का औसत पोर्टफ़ोलियो वेट 16% रहा, जिससे इनका योगदान बेहद अहम बन जाता है.
अहम बात ये है कि पिछले मैनेजरों ने कुछ टिकाऊ बिज़नेस पहचाने थे और मौजूदा टीम ने उन्हें बनाए रखने का भरोसा दिखाया. सिर्फ़ नया दिखाने के लिए पूरा पोर्टफ़ोलियो बदलना आसान होता है, लेकिन समझदारी अक्सर सही चीज़ों को पहले की तरह बनाए रखने में होती है.
वजह-3: उथल-पुथल से स्थिरता की ओर
फ़ंड की शुरुआती अस्थिरता इसकी होल्डिंग्स में भी दिखाई देती थी. Mayur Uniquoters को छोड़कर कोई स्टॉक टिका नहीं था. यानी पोर्टफ़ोलियो में स्थायी हिस्सेदारी लगभग नहीं थी.
वर्तमान टीम के आने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. अब 20 स्टॉक्स पिछले तीन वर्षों से लगातार पोर्टफ़ोलियो में मौजूद हैं, जो अस्थिरता से स्थिरता की ओर बदलाव को दिखाता है.
वजह-4: मल्टीबैगर्स की खोज
इस स्थिरता का फ़ायदा मिला. पिछले तीन वर्षों में, ITI Small Cap ने 18 ऐसे स्टॉक्स पहचाने जो 200% से ज़्यादा का रिटर्न दे गए, यानी निवेश की गई रक़म को तीन गुना कर दिया. इस मामले में इससे बेहतर सिर्फ़ Nippon India Small Cap रहा.
ये वो मल्टीबैगर्स (रिटर्न को एक दशमलव तक राउंड ऑफ किया गया है) हैं, जिन्हें फ़ंड ने अक्तूबर 2022 से अक्तूबर 2025 के बीच ख़रीदा या होल्ड रखा.
| कंपनी | रिटर्न (XIRR, %) | होल्डिंग पीरियड (महीने) | औसत एलोकेशन (%) |
|---|---|---|---|
| Inox Wind | 178.4 | 27 | 1.3 |
| PG Electroplast | 96.5 | 26 | 2 |
| Acutaas Chemicals | 59.9 | 37 | 1.4 |
| Jindal Stainless | 90.6 | 36 | 1.9 |
| Dixon Technologies | 107.4 | 31 | 1.3 |
| Jyoti CNC Automation | 136.2 | 22 | 1.2 |
| Radico Khaitan | 47.7 | 37 | 1.4 |
| Arvind | 86.3 | 31 | 1.2 |
| Aster DM Healthcare | 47.7 | 37 | 1.2 |
| Eternal | 85.2 | 27 | 1.3 |
| Kirloskar Oil Engines | 62.5 | 36 | 1.6 |
| Welspun Corp | 71.8 | 29 | 1.3 |
| Bharat Dynamics | 73.8 | 37 | 1.4 |
| Blue Star | 48.6 | 37 | 1.3 |
| Solar Industries India | 80.2 | 29 | 1.3 |
| BSE | 141.3 | 26 | 1.5 |
| NCC | 48 | 36 | 1.8 |
| NLCIndia | 168.2 | 15 | 1.1 |
| XIRR (एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ़ रिटर्न) उन पोर्टफ़ोलियो के लिए ख़ास तौर पर उपयोगी है जहां निवेश एक साथ एकमुश्त करने के बजाय अलग-अलग समय पर किया जाता है. विचार की गई अवधि: अक्तूबर 2022 और अक्तूबर 2025. | |||
तुलना के लिए देखें तो, फ़रवरी 2020 से जुलाई 2022 तक, फ़ंड सिर्फ़ दो मल्टीबैगर्स पहचान पाया था. भले ही उस वक्त टीमों के पास दांव खेलने के लिए कम समय था, फिर भी ये अंतर बहुत बड़ा है.
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वजह-5: सेक्टर पर अहम बदलाव
शुरुआती वर्षों में सेक्टर एलोकेशन की एक स्पष्ट पहचान नहीं थी. फ़ाइनेंशियल्स और कैपिटल गुड्स का दबदबा था, लेकिन कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और IT ने निराश किया.
पिछले वर्षों में सेक्टर एलोकेशन ज़्यादा सोचा-समझा रहा है. फ़ंड ने 13.6% के कैटेगरी एवरेज के मुकाबले सिर्फ़ 10.8% का एक्सपोज़र कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी में रखा. पहले निराश कर चुके IT एक्सपोज़र को भी न्यूनतम रखा गया.
इसी बीच, कैपिटल गुड्स, जो पहले मिला-जुला क्षेत्र था, अब ख़ास बन गया है. सिर्फ़ तीन वर्षों में इस सेक्टर के पांच स्टॉक्स तीन गुना रिटर्न दे गए.
वजह-6: बेहतर मार्केट-कैप मिक्स
एक और शांत लेकिन अहम बदलाव मार्केट-कैप एलोकेशन में हुआ. अगस्त 2022 से पहले, पोर्टफ़ोलियो में लगभग 90% स्मॉल-कैप थे, जबकि लार्ज-कैप 6.8% और मिड-कैप सिर्फ़ 7.6% थे.
शाह और उनकी टीम के आने के बाद, लार्ज-कैप्स का औसत एक्सपोज़र बढ़कर लगभग 10% हो गया है, जबकि मिड-कैप्स का एक्सपोज़र बढ़कर 20.5% हो गया है, यानी लगभग तीन गुना. ये बदलाव स्थिरता की तरफ़ एक सोचा-समझा कदम भी है और स्मॉल-कैप में सफल दांव के लार्ज-कैप में विकसित होने की स्वाभाविक प्रक्रिया भी. इन 18 मल्टीबैगर्स में से 13 अब मिड-कैप बन चुके हैं.
शानदार वापसी
ITI Small Cap का सफर याद दिलाता है कि शुरुआती नाकामी अंतिम नतीजा तय नहीं करती. इस फ़ंड की सफलता स्ट्रैटेजी में किसी बड़े बदलाव से नहीं, बल्कि स्थिरता, धैर्य और समझदारी भरे रिस्क कंट्रोल से आई. जो निवेशक इसके शुरुआती मुश्किल दौर से आगे देखने को तैयार थे, उन्होंने पाया कि ये फ़ंड चुपचाप अपनी कहानी फिर से लिख चुका है.
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3-स्टार रेटिंग किसी फ़ंड को हमारी रेकमंडेशन से बाहर नहीं करती. रेटिंग लंबे समय के स्थायित्व को देखती है, लेकिन असल दुनिया में निवेश का मतलब है संदर्भ को समझना, जिसमें हालिया स्ट्रैटेजी बदलाव, पोर्टफ़ोलियो की क्वालिटी, डाउनसाइड से सुरक्षा और अलग-अलग बाज़ार स्थितियों में फ़ंड का व्यवहार शामिल है.
इसी वजह से फ़ंड एडवाइज़र, स्टार रेटिंग से आगे जाकर ये देखता है कि सुधार असल है या सिर्फ़ सतही. ये ऐसे फ़ंड पहचानने में मदद करता है जहां फ़ंडामेंटल मज़बूत हो रहे हैं, रिस्क कंट्रोल में है और स्ट्रैटेजी ऐसी है जिस पर निवेशक टिक सके. कई बार ये बारीकी किसी एक नंबर से कहीं ज़्यादा मायने रखती है.
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