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NPS इक्विटी फ़ंड अब गोल्ड, सिल्वर ETF और IPO में कर सकेंगे निवेश

नए नियमों से रिटायरमेंट निवेश में डाइवर्सिफ़िकेशन की मिलेगी अनुमति

नए नियमों से रिटायरमेंट निवेश में डाइवर्सिफ़िकेशन की मिलेगी अनुमति

सारांशः गोल्ड, सिल्वर और अल्टरनेटिव एसेट्स में नए एक्सपोज़र के साथ, संशोधित NPS नियमों का मक़सद अलग-अलग एसेट क्लास में ज़्यादा डायवर्सिफ़ाइड और मज़बूत पेंशन फ़ंड पोर्टफ़ोलियो तैयार करना है.

पेंशन फ़ंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े निवेश के नियमों में बड़े बदलाव का ऐलान किया है. इसे रिटायरमेंट सेविंग्स को निवेश करने के तरीक़ों में अब तक के सबसे बड़े बदलाव में से एक माना जा रहा है. ये बदलाव इक्विटी और कॉरपोरेट डेट, दोनों तरह के निवेशों पर लागू होंगे. इसका मक़सद निवेशकों को बेहतर डाइवर्सिफ़िकेशन और मज़बूत रिस्क कंट्रोल देना है. आगे कुछ अहम बदलावों का उल्लेख किया गया है:

इक्विटी स्कीम के लिए

  • गोल्ड, सिल्वर ETF और REITs में एक्सपोज़र

इक्विटी आधारित पेंशन फ़ंड अब रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), इक्विटी ओरिएंटेड कैटेगरी I और II अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फ़ंड्स (AIFs) और गोल्ड व सिल्वर ETF में मिलाकर अधिकतम 5% तक निवेश कर सकेंगे. इसका मक़सद कोर इक्विटी होल्डिंग्स से ध्यान हटाए बिना कंट्रोल्ड डाइवर्सिफ़िकेशन लाना है,.

  • IPO में निवेश की अनुमति, साइज़ से जुड़ी शर्तों के साथ

फ़ंड अब IPO, FPO और ऑफ़र-फ़ॉर-सेल में हिस्सा ले सकेंगे, लेकिन सिर्फ़ तुलनात्मक रूप से बड़ी कंपनियों में. किसी भी नई लिस्टिंग का फ़्री-फ़्लोट मार्केट वैल्यू कम-से-कम निफ़्टी 250 इंडेक्स की 250वीं कंपनी के बराबर होना ज़रूरी होगा. अगर बाद में कोई स्टॉक इस स्तर से नीचे चला जाता है, तो एक साल के भीतर उससे निकलने की समीक्षा करनी होगी.

  • टॉप 200 स्टॉक्स पर आधारित पोर्टफ़ोलियो

फ़ंड की कम-से-कम 90% रक़म निफ़्टी 250 के टॉप 200 स्टॉक्स में निवेश करनी होगी. साथ ही BSE 250 के ऐसे स्टॉक्स को शामिल करने की भी छूट होगी, जो निफ़्टी 250 में नहीं हैं. इसका मक़सद ये सुनिश्चित करना है कि पोर्टफ़ोलियो बड़े और लिक्विड स्टॉक्स पर टिके रहें.

  • इंडेक्स म्यूचुअल फ़ंड और ETF में एलोकेशन

फ़ंड निफ़्टी 50 और सेंसेक्स जैसे प्रमुख इंडेक्स को ट्रैक करने वाले इंडेक्स म्यूचुअल फ़ंड और ETF में अधिकतम 5% तक निवेश कर सकेंगे. इससे सीधे शेयर निवेश के साथ कम ख़र्च वाला विकल्प जुड़ता है.

  • डेरिवेटिव्स सिर्फ़ हेजिंग के लिए

फ़ंड डेरिवेटिव्स में भी निवेश कर सकेंगे, लेकिन सिर्फ़ रिस्क प्रोटेक्शन और हेजिंग के मक़सद से. इसमें कुल एक्सपोज़र पोर्टफ़ोलियो के 5% से ज़्यादा नहीं हो सकेगा.

कॉरपोरेट डेट स्कीम के लिए

कॉरपोरेट डेट पेंशन फ़ंड्स के लिए निवेश का दायरा बढ़ाया गया है, लेकिन क्वालिटी से जुड़ी सख़्त शर्तों के साथ.

  • डेट इंस्ट्रूमेंट्स की बड़ी रेंज

कॉरपोरेट डेट फ़ंड अब बैंक इश्यूज़, लॉन्ग-टर्म बैंक डिपॉज़िट्स, मल्टीलेट्रल एजेंसियों द्वारा जारी रुपी बॉन्ड और उपयुक्त डेट म्यूचुअल फ़ंड्स में निवेश कर सकेंगे.

  • म्युनिसिपल, इंफ़्रास्ट्रक्चर और ट्रस्ट आधारित डेट का समावेश

अब लिस्ट में म्युनिसिपल बॉन्ड, InvITs (इंफ़्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट) और REITs द्वारा जारी डेट, मॉर्टगेज-बैक्ड सिक्योरिटीज़ और चुनिंदा डेट ओरिएंटेड AIFs भी शामिल होंगे. इसके अलावा, बैंकों के एडिशनल टियर-1 बॉन्ड्स की भी अनुमति दी जाएगी, जिससे फ़िक्स्ड-इनकम निवेश में बेहतर डाइवर्सिफ़िकेशन संभव होगा.

ये नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं और उम्मीद है कि इसके चलते NPS मैनेजर्स अलग-अलग एसेट क्लास में अपने पोर्टफ़ोलियो बनाने के तरीक़ों में बड़ा बदलाव करेंगे.

ये भी पढ़ेंः पिछले 3 सालों में किन स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने खोजे सबसे ज़्यादा मल्टीबैगर?

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