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सारांशः साल के अंत में हर तरफ़ अनुमान दिखाई देते हैं, लेकिन वे निवेशकों के लिए शायद ही कभी मददगार होते हैं. यह लेख भविष्यवाणियों से हटकर कुछ अहम संकेतों पर नज़र डालता है और समझाता है कि आम बचतकर्ताओं के लिए अनुशासन और डाइवर्सिफ़िकेशन आज भी दूरदर्शिता से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं.
सारांशः साल के अंत में हर तरफ़ अनुमान दिखाई देते हैं, लेकिन वे निवेशकों के लिए शायद ही कभी मददगार होते हैं. यह लेख भविष्यवाणियों से हटकर कुछ अहम संकेतों पर नज़र डालता है और समझाता है कि आम बचतकर्ताओं के लिए अनुशासन और डाइवर्सिफ़िकेशन आज भी दूरदर्शिता से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं. साल के इस समय, फ़ाइनेंशियल मीडिया आने वाले 12 महीनों के अनुमानों से भर जाता है. सेंसेक्स कहां जाएगा? कौन-से सेक्टर बेहतर परफ़ॉर्म करेंगे? रुपया क्या करेगा? मुझे इन क़वायदों से कभी ज़्यादा फ़ायदा नहीं लगा, हालांकि कई बार मुझे भी इनमें शामिल कर लिया जाता है. ये अनुमान भविष्य के बारे में कोई ख़ास समझ नहीं देते और अगर कोई इनके पुराने रिकॉर्ड देख ले, तो ये बात साफ़ हो जाएगी. मुझे ज़्यादा उपयोगी ये लगता है कि दुनिया को जैसा है वैसा देखा जाए और ये सोचा जाए कि इन हालात का आम बचत करने वालों के लिए क्या मतलब निकलता है. तो साल के ख़त्म होने के करीब ऐसी कुछ बातें हैं, जो मेरा ध्यान खींचती हैं. वॉरेन बफ़े की बर्कशायर हैथवे के पास लगभग 300 अरब डॉलर नक़द पड़ा है. ये ऐसा व्यक्ति नहीं है जो आइडिया की कमी या हिम्मत हारने की वजह से नक़द जमा करता हो. ये वही शख़्स है जिसने सात दशक तक सही क़ीमत पर बिज़नेस ख़रीदे हैं और जब क़ीमत सही नहीं लगी, तो धैर्य से इंतज़ा
ये लेख पहली बार दिसंबर 29, 2025 को पब्लिश हुआ.
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