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डायरेक्ट फ़ंड में स्विच करें: एक बार चुकाएं, सालों फ़ायदा उठाएं

रेगुलर से डायरेक्ट म्यूचुअल फ़ंड प्लान पर शिफ़्ट होने पर LTCG टैक्स तो देना ही होगा, लेकिन अगर आप रुके रहते हैं, तब भी यह टैक्स कहीं नहीं जाता

रेगुलर से डायरेक्ट म्यूचुअल फ़ंड प्लान पर शिफ़्ट होने पर LTCG टैक्स तो देना ही होगा, लेकिन अगर आप रुके रहते हैं, तब भी यह टैक्स कहीं नहीं जाताVinayak Pathak/AI-Generated Image

पाठक का सवाल: मेरे कई म्यूचुअल फ़ंड्स डायरेक्ट की जगह रेगुलर स्कीम में हैं. लेकिन शिफ़्ट करने पर कैपिटल गेन्स पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स देना पड़ेगा. अगर डिफ़रेंशियल रिटर्न और कैपिटल गेन्स टैक्स का हिसाब लगाएं, तो क्या शिफ़्ट करना समझदारी होगी? मेरी उम्र को देखते हुए मेरा निवेश का समय लगभग सात साल का है. खर्चों के लिए मेरे पास दूसरे ज़रिये भी हैं. -संजीव राजेंद्र पंडित

बहुत-से निवेशक रेगुलर से डायरेक्ट म्यूचुअल फ़ंड प्लान पर स्विच करने से इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि रिडेम्शन के वक़्त कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है. सोच यह होती है - अभी 12.5 फ़ीसदी टैक्स क्यों दें, जब यूं ही बने रहने का विकल्प मौजूद है? बात समझ में आती है, लेकिन यह सोच ग़लत है.

असल बात यह है कि इंतज़ार करने से टैक्स ख़त्म नहीं होता. जब भी आप रेगुलर फ़ंड की यूनिट्स रिडीम करेंगे - चाहे सात साल बाद हो या दस साल बाद - उस वक़्त तक जमा हुए गेन्स पर 12.5 फ़ीसदी LTCG टैक्स तो देना ही पड़ेगा. और चूंकि तब तक कॉर्पस बड़ा हो चुका होगा, टैक्स की रक़म भी उतनी ही ज़्यादा होगी.

यानी स्विच टालने से टैक्स बचता नहीं, बस पीछे खिसक जाता है. उस दौरान रेगुलर प्लान का ऊंचा एक्सपेंस रेशियो चुपचाप आपकी दौलत को घिसता रहता है.

रुके रहने की क़ीमत

रेगुलर प्लान में डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन फ़ंड के एक्सपेंस रेशियो में छुपा होता है - आमतौर पर डायरेक्ट प्लान से हर साल 1-1.5 फ़ीसदी ज़्यादा. काग़ज़ पर यह फ़र्क़ छोटा लगता है, लेकिन सात साल में कंपाउंडिंग के साथ यही अंतर एक बड़े कॉर्पस पर लाखों में बदल सकता है. रेगुलर प्लान में बिताया हर साल एक ऐसी सर्विस के लिए पेमेंट है जिसकी शायद आपको अब ज़रूरत भी नहीं.

स्विचिंग कॉस्ट एक बार की होती है

जब आप रेगुलर प्लान रिडीम करके डायरेक्ट में लगाते हैं, तो इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में 1.25 लाख रुपये से ऊपर के गेन्स पर 12.5 फ़ीसदी LTCG टैक्स चुकाना पड़ता है. यह रक़म असली है और इसका ईमानदार हिसाब लगाना ज़रूरी है. लेकिन यह एक बार की लागत है. इसके बाद एक्सपेंस रेशियो की बचत हर साल आपके हक़ में कंपाउंड होती रहती है.

एक सीधा-सा उदाहरण लेते हैं. मान लीजिए आप आज से किसी फ्लेक्सी-कैप फ़ंड के रेगुलर प्लान में हर महीने 10,000 रुपये की SIP शुरू करते हैं. सात साल बाद आपका फ़ाइनल कॉर्पस डायरेक्ट प्लान से कितना अलग होगा, यह नीचे टेबल में देख सकते हैं.

रेगुलर' होने की कीमत

किसी फ़ंड के रेगुलर प्लान में निवेशित रहने से, समय के साथ आपके पास कम पैसे बचते हैं

  रेगुलर प्लान डायरेक्ट प्लान
मासिक SIP ₹10,000 ₹10,000
समय अवधि 7 साल 7 साल
रिटर्न की दर 17.3 प्रतिशत 18.3 प्रतिशत
अंतिम रक़म ₹15.6 ₹16.1 लाख
पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के रिटर्न पर विचार किया गया है. वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन म्यूचुअल फ़ंड कैलकुलेटर के अनुसार.

जैसा कि टेबल दिखाती है, रेगुलर प्लान में बने रहने वाले निवेशक का कॉर्पस उतनी ही रक़म उतने ही वक़्त लगाने के बावजूद 50,000 रुपये कम रहा. और यह फ़र्क़ निवेश की अवधि बढ़ने के साथ और चौड़ा होता जाता है.

निचोड़ यही है: म्यूचुअल फ़ंड के डायरेक्ट प्लान पर जल्दी स्विच करना बेहतर है. इंतज़ार करते रहे, तो ऊंचे एक्सपेंस रेशियो और कम रिटर्न की भेंट चढ़ती रहेगी आपकी मेहनत की कमाई.

स्मार्ट तरीक़े से स्विच करें, एक झटके में नहीं

डायरेक्ट जाने का मतलब यह नहीं कि एक साथ सभी यूनिट्स रिडीम कर दें.

निवेश को कई फ़ाइनेंशियल ईयर में फैलाकर हर बार 1.25 लाख रुपये की सालाना LTCG छूट का फ़ायदा उठाया जा सकता है, जिससे असरदार टैक्स बोझ काफ़ी कम हो जाता है.

आखिरी बात

LTCG टैक्स से बचा नहीं जा सकता. असली सवाल बस यह है कि आप इसे कब चुकाते हैं और बदले में क्या मिलता है. रेगुलर प्लान में रहने पर वही टैक्स बाद में देना होगा - और ऊपर से हर साल ऊंचे एक्सपेंस रेशियो का घाटा अलग. डायरेक्ट पर स्विच करें, टैक्स एक बार दें, और फिर बचत को चुपचाप अपने हक़ में कंपाउंड होने दें. सात साल के क्षितिज के साथ यह क़दम उठाने की दलील बिल्कुल साफ़ है.

यह भी पढ़ेंः आपके पास ₹50 लाख हैं. यह ग़लती बिल्कुल नहीं करना

ये लेख पहली बार मई 04, 2026 को पब्लिश हुआ.

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