फंड वायर

आपने 2 फ़ंड चुने, हो सकता है आपने एक जैसे शेयर दो बार ख़रीद लिए हों

शेयर-स्तर के ओवरलैप के डेटा से पता चलता है कि कई कैटेगरी में दो अलग-अलग फ़ंड हाउस के दो फ़ंड लगभग एक ही पोर्टफ़ोलियो हैं

शेयर-स्तर के ओवरलैप के डेटा से पता चलता है कि कई कैटेगरी में दो अलग-अलग फ़ंड हाउस के दो फ़ंड लगभग एक ही पोर्टफ़ोलियो हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः दो लार्ज-कैप फ़ंड. अलग-अलग नाम, अलग-अलग फ़ंड हाउस, अलग-अलग मैनेजर. औसतन, इन दोनों पोर्टफ़ोलियो का 45 प्रतिशत हिस्सा एक जैसा है. ज़्यादातर निवेशक जिस डाइवर्सिफ़िकेशन को अपनी ताक़त समझते हैं, वो शायद है ही नहीं.

आपके पास दो लार्ज-कैप म्यूचुअल फ़ंड हैं. अलग-अलग नाम. अलग-अलग फ़ंड हाउस. अलग-अलग फ़ंड मैनेजर. आपको लगता है आपने डाइवर्सिफ़िकेशन कर लिया है.

लेकिन औसतन उन दोनों पोर्टफ़ोलियो का 45 प्रतिशत हिस्सा एक जैसा है. इस कैटेगरी के 265 फ़ंड पेयर्स में आधे से ज़्यादा होल्डिंग्स एक जैसी हैं. आपके पास दो फ़ोलियो हैं. लेकिन कई मामलों में पोर्टफ़ोलियो एक ही है.

यह फ़ंड मैनेजर की ग़लती नहीं है. यही होता है जब किसी कैटेगरी का शेयर पूल इतना छोटा हो कि दो मैनेजर कहीं अलग पहुंच ही न सकें.

वो कैटेगरी जहां हालात और बुरे हैं

बैंकिंग फ़ंड की मिसाल सबसे साफ़ है. भारत में कोई 45 से कम ही बैंक बड़े पैमाने पर लिस्टेड हैं. हर बैंकिंग फ़ंड उन्हीं बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंकों के इर्द-गिर्द घूमता है. दो मैनेजर, दो फ़ंड हाउस, दो प्रोडक्ट और औसतन 48.4 प्रतिशत ओवरलैप.

लार्ज-कैप में भी यही कहानी है. SEBI के नियमों के मुताबिक़ लार्ज-कैप फ़ंड को अपना कम से कम 80 प्रतिशत पैसा मार्केट कैप के लिहाज़ से टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों में लगाना होता है. ज़्यादातर मैनेजर पहले से ही सीमित लिस्ट में से 30 से 40 हाई-कन्विक्शन नामों के साथ और भी कन्संट्रेट रहते हैं. दो मैनेजर, अलग-अलग रिसर्च टीमों के साथ, स्वतंत्र रूप से काम करते हुए लगभग एक जैसे पोर्टफ़ोलियो तक पहुंच जाते हैं. इसलिए नहीं कि वो एक-दूसरे की नक़ल उतारते हैं. बल्कि इसलिए कि शेयर पूल ही बहुत ज़्यादा विकल्प नहीं देता.

जहां ओवरलैप सबसे ज़्यादा होता है

पांच कैटेगरीज़ जहां अलग-अलग फ़ंड हाउस के दो फ़ंड्स में ज़्यादातर एक जैसे ही स्टॉक होते हैं

कैटेगरी औसत ओवरलैप (%) अधिकतम ओवरलैप (%) 50% से ज़्यादा वाले पेयर्स 5 साल का SIP रिटर्न (मिड-50%)
लार्ज कैप 45 55 265 7.6% to 10.4%
सेक्टोरल-बैंकिंग 48.4 55.9 202 9.0% to 12.2%
सेक्टोरल-फार्मा 41.2 49 48 14.1% to 16.2%
थीमैटिक-कंजम्प्शन 34.9 44.6 37 8.7% to 10.1%
सेक्टोरल-टेक्नोलॉजी 34.6 45.6 18 -3.0% to 1.9%
5-वर्षीय SIP रिटर्न कॉलम इस कैटेगरी के बीच के 50 प्रतिशत फ़ंड्स को दर्शाता है - सभी फ़ंड्स में से आधे इसी दायरे में आते हैं. VR कैटेगरीज़ पर आधारित; डेटा 31 मार्च, 2026 तक का है.

ओवरलैप के आंकड़ों के साथ रिटर्न कॉलम भी देखें. लार्ज-कैप में बीच के आधे फ़ंड ने पांच साल में 7.6 से 10.4 प्रतिशत के बीच रिटर्न दिया. बैंकिंग में 9.0 से 12.2 प्रतिशत के बीच रहा. दायरा बेहद संकरा है. संकरा इसलिए है क्योंकि जब दो मैनेजर काफ़ी हद तक एक जैसे शेयर रखते हों, तो एक के दूसरे से काफ़ी आगे जाने की गुंजाइश नहीं रहती.

टेक्नोलॉजी उन सेक्टोरल निवेशकों को रुककर सोचने पर मजबूर करने वाली कैटेगरी है. टेक्नोलॉजी फ़ंड के बीच के आधे हिस्से ने पांच साल के SIP रिटर्न में माइनस 3 से 1.9 प्रतिशत दिए. ज़्यादा ओवरलैप. ख़राब रिटर्न. दो टेक्नोलॉजी फ़ंड रखने से जोख़िम नहीं बंटा. उल्टे एक ऐसी कैटेगरी में एक्सपोज़र दोगुना हो गया जो पांच साल में कहीं नहीं पहुंची.

इन पांच कैटेगरी में दो फ़ंड का मतलब है एक ही दांव दो बार.

वो कैटेगरी जहां ऐसा नहीं होता

शेयर पूल बड़ा हो तो तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है. इन पांच कैटेगरी में एक भी फ़ंड पेयर ऐसा नहीं निकला जिसमें 50 प्रतिशत से ज़्यादा ओवरलैप हो.

जहां ओवरलैप सबसे कम है

पांच कैटेगरीज़ जहां अलग-अलग फ़ंड हाउस के दो फ़ंड में वास्तव में अलग-अलग स्टॉक्स होने की संभावना होती है.

कैटेगरी औसत ओवरलैप (%) अधिकतम ओवरलैप (%) 50% से ज़्यादा वाले पेयर्स 5 साल का SIP रिटर्न (मिड-50%)
इक्विटी: इंटरनेशनल 4.7 8.7 0 15.9% to 22.0%
इक्विटी: स्मॉल कैप 12 19 0 12.9% to 15.6%
इक्विटी: थीमेटिक-बिज़नेस साइकिल 17.9 23.5 0 14.6% to 15.1%
इक्विटी: थीमेटिक-इनोवेशन 18.4 23.2 0 12.4% to 14.3%
इक्विटी: मल्टी कैप 21.3 29.2 0 10.4% to 14.6%
डेटा 31 मार्च, 2026 तक का है.

इंटरनेशनल फ़ंड में औसतन 4.7 प्रतिशत ओवरलैप है. ग्लोबल यूनिवर्स में कई देशों में हज़ारों लिस्टेड कंपनियाँ हैं. दो भारतीय फ़ंड हाउस उस यूनिवर्स से चुनते हुए बिल्कुल अलग-अलग पोर्टफ़ोलियो तक पहुँचते हैं यानी अलग देश, अलग सेक्टर, अलग कंपनियाँ. कैटेगरी का नाम भले एक हो. प्रोडक्ट नहीं है.

स्मॉल-कैप फ़ंड में औसतन 12 प्रतिशत ओवरलैप है. भारत में 500 से ज़्यादा स्मॉल-कैप कंपनियां लिस्टेड हैं. दो मैनेजर 50 से 60 शेयरों का पोर्टफ़ोलियो बनाते हुए अपनी रिसर्च के आधार पर उस यूनिवर्स में बिखर जाते हैं. इस बात की संभावना कम है कि वो एक ही जगह पर आ जाएं. और डेटा यही कहता है.

मल्टी कैप, थीमैटिक-इनोवेशन और थीमैटिक-बिज़नेस साइकिल इस लिस्ट को पूरा करते हैं. इनमें से हर एक में या तो निवेश का दायरा बड़ा है या थीम इतनी खुली है कि अलग-अलग हाउस उसे अपने तरीक़े से समझते हैं. एक हाउस का इनोवेशन फ़ंड टेक्नोलॉजी पर फ़ोकस कर सकता है, दूसरे का कंज्यूमर मार्केट को बदलने वाले या नए ज़माने के बिज़नेस मॉडल पर. कैटेगरी का नाम एक है. पोर्टफ़ोलियो नहीं है.

यहां रिटर्न कॉलम एक अलग कहानी कहता है. इंटरनेशनल फ़ंड में बेस्ट और वर्स्ट परफ़ॉर्मर हटाने के बाद भी बीच के आधे हिस्से ने पांच साल का SIP रिटर्न 15.9 से 22 प्रतिशत के बीच दिखाया यानी छह प्रतिशत से ज़्यादा का फ़र्क़. यह फ़र्क़ इसलिए है क्योंकि फ़ंड सच में अलग-अलग हैं. इन कैटेगरी में आप कौन सा फ़ंड चुनते हैं, यह मायने रखता है. ज़्यादा ओवरलैप वाली कैटेगरी में शायद ही फ़र्क़ पड़ता है.

इस मामले में क्या करें

निवेश योग्य यूनिवर्स का आकार लगभग सब कुछ तय करता है. छोटा पूल यानी मिलते-जुलते पोर्टफ़ोलियो. बड़ा पूल यानी सच में अलग-अलग.

किसी भी कैटेगरी में दूसरा फ़ंड जोड़ने से पहले असल शेयर-स्तर का ओवरलैप चेक करें. कैटेगरी का लेबल आपको इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी बताता है. यह नहीं बताता कि दूसरा फ़ंड कुछ ऐसा दे रहा है जो पहला पहले से नहीं दे रहा.

ज़्यादातर निवेशक यह कभी चेक नहीं करते. वो दो फ़ंड रखते हैं और मान लेते हैं कि दो अलग दांव खेल रहे हैं. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके पोर्टफ़ोलियो के अंदर झांकता है, सिर्फ़ नाम नहीं देखता बल्कि यह भी देखता है कि वो फ़ंड असल में क्या रखते हैं. ताकि आपको पता चले कि आपका दूसरा फ़ंड अपनी जगह सही है या चुपचाप पहले की नक़ल बन रहा है.

अगर आप सच में डाइवर्सिफ़िकेशन चाहते हैं तो बड़े यूनिवर्स वाली कैटेगरी यानी स्मॉल-कैप, मल्टी-कैप, इंटरनेशनल ब्रॉड मैन्डेट वाले थीमैटिक फ़ंड वो जगह हैं जहां दूसरा फ़ंड सच में कुछ अलग करता है.

अगर आप किसी सेक्टर में फ़ोकस्ड एक्सपोज़र चाहते हैं जिस पर आपको भरोसा है, तो अक्सर एक अच्छा फ़ंड काफ़ी होता है.

दूसरा फ़ंड हेज नहीं है. ज़्यादातर मामलों में वो एक कॉपी है.

मेथडोलॉजी के बारे में एक बात

यहां ओवरलैप के आंकड़े अलग-अलग फ़ंड हाउस के फ़ंड की तुलना करते हैं, एक ही हाउस के दो फ़ंड की नहीं. SEBI के नियम एक ही फ़ंड हाउस के अंदर समानता पर पहले से रोक लगाते हैं. जो बात वो नियम नहीं देखते, वो यह है कि दो अलग हाउस के दो फ़ंड, जो अलग प्रोडक्ट की तरह बेचे जाते हैं, वो सच में अलग-अलग पोर्टफ़ोलियो रखते हैं या नहीं. हर एक ही कैटेगरी के फ़ंड जोड़े के लिए हमने शेयर-स्तर का ओवरलैप निकाला यानी उस पोर्टफ़ोलियो का वो हिस्सा जो दोनों फ़ंड में एक जैसा है, यह देखते हुए कि हर फ़ंड उस साझा शेयर में कितना रखता है. 50 प्रतिशत ओवरलैप का मतलब है कि मिलाकर देखें तो आधा पोर्टफ़ोलियो लगभग एक जैसे वेट पर एक ही कंपनियों में है.

यह भी पढ़ेंः यह दिग्ग़ज लार्ज एंड मिड-कैप फ़ंड पिछड़ क्यों रहा है?

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