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आपके पोर्टफ़ोलियो के लिए कौन-सा इंडेक्स फ़ंड सही है?

इंडेक्स फ़ंड चुनते समय असल में क्या मायने रखता है

अपनी फ़ाइनेंशियल ज़रूरतों के लिए सही इंडेक्स फंड कैसे चुनें?Adobe Stock

सारांशः पैसिव निवेश के बढ़ते चलन के साथ ज़्यादा से ज़्यादा निवेशक इंडेक्स फ़ंड की ओर जा रहे हैं. लेकिन अक्सर वे ग़लत फ़ंड चुन लेते हैं. असली फ़ैसला रिटर्न का नहीं, बल्कि समय, जोख़िम और धैर्य का होता है. यह लेख बताता है कि इंडेक्स का नाम कम अहम है और यह ज़्यादा ज़रूरी है कि उसे कैसे और किस मक़सद से इस्तेमाल किया जाए.

पैसिव निवेश की लोकप्रियता बढ़ने के साथ, ज़्यादा निवेशक इंडेक्स फ़ंड चुन रहे हैं. और इसमें हैरानी भी नहीं है, क्योंकि यह बाज़ार जैसे रिटर्न कम लागत में पाने का तरीका देते हैं.

असल में, इंडेक्स फ़ंड किसी बाज़ार इंडेक्स को कॉपी करता है. ज़्यादातर इंडेक्स फ़ंड टोटल रिटर्न इंडेक्स यानी TRI को ट्रैक करते हैं, जिसमें क़ीमत में बढ़त के साथ-साथ डिविडेंड भी शामिल होता है. इसी वजह से यह लंबे समय के निवेश के लिए बेहतर बेंचमार्क माना जाता है.

लेकिन इंडेक्स फ़ंड आउटपरफ़ॉर्मेंस का वादा नहीं करते. चूंकि ये बेंचमार्क की नकल करते हैं, इसलिए इनका रिटर्न बाज़ार के रिटर्न से लागत और ट्रैकिंग डिफ़रेंस घटाने के बाद मिलता है. ट्रैकिंग डिफ़रेंस वह अंतर है, जो इंडेक्स के रिटर्न और फ़ंड के रिटर्न के बीच होता है. यह समझौता कभी सही लगता है, तो कभी निराश करता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि फ़ंड का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया है.

इसी समझ के साथ, अब इंडेक्स फ़ंड के रिटर्न, जोख़िम और सही फ़ंड चुनने के तरीक़े पर नज़र डालते हैं.

इंडेक्स फ़ंड के रिटर्न, जोख़िम और लागत क्या बताते हैं

हालांकि इंडेक्स फ़ंड अपने एक्टिव विकल्पों के मुक़ाबले कम जोख़िम वाले होते हैं, लेकिन वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते. इनमें भी उतार-चढ़ाव होता है. इसकी वजह यह है कि बाज़ार का हर सेगमेंट अलग तरह से बर्ताव करता है. मसलन, जब लार्ज कैप शेयरों से मिड-कैप और स्मॉल-कैप की ओर बढ़ते हैं, तो लंबे समय में रिटर्न बेहतर हो सकता है. लेकिन इसके साथ उतार-चढ़ाव यानी स्टैंडर्ड डिविएशन भी काफ़ी बढ़ जाता है.

जितना ज़्यादा उतार-चढ़ाव, उतना ज़्यादा स्टैंडर्ड डिविएशन

हालांकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने बड़े शेयरों से बेहतर रिटर्न दिया, लेकिन उनके साथ जोख़िम भी ज़्यादा रहा

इंडेक्स का नाम पांच साल का रिटर्न (%) सात साल का रिटर्न (%) स्टैंडर्ड डिविएशन (%)
निफ़्टी 100 13.4 12.4 12.1
निफ़्टी लार्ज मिड कैप 250 15.6 14.1 13.5
निफ़्टी मिड कैप 150 17.9 15.8 15.8
निफ़्टी स्मॉल कैप 250 15.2 12.8 19.9
निफ़्टी टोटल मार्केट 14 12.7 13
ये डेटा 31 जनवरी 2023 से 2 फ़रवरी 2026 तक का है. दिए गए समय के लिए एवरेज रोलिंग रिटर्न के आधार पर. हर कैटेगरी के लिए टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) लिया गया है.

ये आंकड़े क्यों अहम हैं? क्योंकि ये साफ़ दिखाते हैं कि लंबे समय के ज़्यादा रिटर्न और उतार-चढ़ाव के बीच कैसा समझौता होता है. क़रीब 12% और लगभग 20% के स्टैंडर्ड डिविएशन का फ़र्क सिर्फ़ काग़ज़ी नहीं है. इसका असर बीच-बीच में आने वाली गहरी गिरावट और रिकवरी में लगने वाले लंबे समय के रूप में दिखता है.

इसी वजह से बड़े शेयरों और पूरे बाज़ार को कवर करने वाले इंडेक्स सबसे सुरक्षित सिरे पर आते हैं. निफ़्टी 100 और निफ़्टी टोटल मार्केट जैसे इंडेक्स ने सात साल में क़रीब 12.5% सालाना रिटर्न दिया है, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप के मुक़ाबले कहीं कम उतार-चढ़ाव के साथ. यही कारण है कि ये उन निवेशकों के लिए ज़्यादा सही रहते हैं, जिनका समय-दायरा क़रीब पांच साल है या जिन्हें तेज़ गिरावट के दौरान निवेश बनाए रखना मुश्क़िल लगता है.

दूसरी तरफ़ मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स हैं. निफ़्टी मिड कैप 150 ने यहां बताए गए इंडेक्स में सबसे ज़्यादा पांच साल का रिटर्न दिया है, जबकि निफ़्टी स्मॉल कैप 250 ने भी लंबे समय में अच्छे आंकड़े दिखाए हैं. लेकिन इनमें गिरावट ज़्यादा तेज़ होती है और कमज़ोर प्रदर्शन का दौर भी लंबा चलता है. ये तभी सही हैं, जब कम से कम सात साल तक निवेश बनाए रखा जा सके और यह समझ हो कि बड़ी गिरावट इस सफ़र का हिस्सा है.

तो सही इंडेक्स फ़ंड कैसे चुनें?

जब यह समझ आ जाए कि अलग-अलग सेगमेंट में रिटर्न और जोख़िम कैसे बदलते हैं, तो इंडेक्स फ़ंड चुनना आसान हो जाता है.

  • अगर समय-दायरा पांच से सात साल है, तो निफ़्टी 100, निफ़्टी 500, सेंसेक्स या टोटल मार्केट जैसे बड़े या पूरे बाज़ार को कवर करने वाले इंडेक्स ज़्यादा सही रहते हैं.
  • अगर कम से कम सात साल तक निवेश बनाए रखा जा सकता है और बाज़ार के उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता है, तो मिड-कैप इंडेक्स पर विचार किया जा सकता है.
  • और अगर निवेश का समय 10 साल या उससे ज़्यादा है और तेज़ गिरावट झेलने की क्षमता भी है, तो स्मॉल-कैप इंडेक्स सही हो सकते हैं.

पैसिव निवेश को अपने-आप सही मानकर न चुनें. उसी कैटेगरी के एक्टिव फ़ंड के एवरेज रिटर्न से इंडेक्स रिटर्न की तुलना ज़रूर करें.

कम एक्सपेंस रेशियो फ़ायदा है, लेकिन बेहतर नतीजों की गारंटी नहीं. मिड-कैप और स्मॉल-कैप में कई एवरेज एक्टिव फ़ंड लागत के बाद भी इंडेक्स से बेहतर करते रहे हैं. अगर कोई इंडेक्स फ़ंड एवरेज एक्टिव फ़ंड के बराबर भी नहीं कर पा रहा, तो सिर्फ़ कम लागत उसे चुनने की मज़बूत वजह नहीं बनती.

निष्कर्ष

सही इंडेक्स फ़ंड चुनना सिर्फ़ विकल्पों में से आंख मूंदकर एक चुन लेने का मामला नहीं है. एक्टिव फ़ंड की तरह, इंडेक्स निवेश में भी लागत, उतार-चढ़ाव, अपने फ़ाइनेंशियल लक्ष्य और जोख़िम सहने की क्षमता पर सोच ज़रूरी है.

इंडेक्स फ़ंड असरदार औज़ार हैं, लेकिन हर किसी के लिए एक-सा हल नहीं हैं. कोई एक “सबसे अच्छा” इंडेक्स फ़ंड नहीं होता. असली सवाल यह है कि क्या कोई फ़ंड आपकी स्थिति के मुताबिक़ है या नहीं. अपने लक्ष्य से शुरुआत करें. अगर इंडेक्स फ़ंड सही जवाब है, तो सही इंडेक्स अक्सर अपने-आप साफ़ हो जाता है.

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ये भी पढ़ें: कई इंडेक्स फ़ंड्स में निवेश करना एक ख़राब स्ट्रैटेजी है?

ये लेख पहली बार फ़रवरी 04, 2026 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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