Vinayak Pathak/AI-Generated Image
सारांशः मज़बूत बुनियाद, वफ़ादार ग्राहक और दशकों की तकनीकी महारत. अब इसमें रॉकेट, आइलैंड पावर प्लांट और ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज को जोड़ें. महत्वाकांक्षा असली है. और वैल्यूएशन भी.
Inox India ऐसे उपकरण बनाती है जो इंडस्ट्रियल गैसों को ठंडा रखते हैं. यह एक मार्केट लीडर है जिसका ROCE लगातार 30 प्रतिशत से ऊपर रहा है और क़र्ज़ न के बराबर है. कारोबार अच्छा है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से धीमी रफ़्तार से बढ़ने वाला भी है.
फिर बदलाव आया. एक्सपोर्ट फ़ाइनेंशियल ईयर 22 में ₹268 करोड़ से बढ़कर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹971 करोड़ हो गया, यानी चार साल में क़रीब चार गुना. अब एक्सपोर्ट कुल रेवेन्यू का 62 प्रतिशत है.
कारोबार की बनावट
Inox ने घरेलू बाज़ार में अपनी पकड़ क्रायोजेनिक इंडस्ट्रियल गैस उपकरणों के ज़रिए बनाई है. ये उपकरण हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और नेचुरल गैस जैसी गैसों को अत्यंत कम तापमान पर तरल रूप में स्टोर करने योग्य बनाते हैं. CRISIL के मुताबिक़, घरेलू बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी 70 से 75 प्रतिशत है, जो कुल रेवेन्यू का 57 प्रतिशत देती है.
इसके अलावा, गैस इंफ्रास्ट्रक्चर (मिनी-टर्मिनल, रीगैसिफ़िकेशन सिस्टम, व्हीकल-माउंटेड फ्यूल टैंक) से क़रीब 25 प्रतिशत आता है. बाक़ी हिस्सा क्रायोजेनिक साइंटिफ़िक उपकरणों से है, जो रॉकेट, सैटेलाइट और न्यूक्लियर फ्यूज़न प्रयोगों में इस्तेमाल होते हैं. अभी यह हिस्सा छोटा है, लेकिन यह Inox का सबसे जटिल काम है.
दो अलग-अलग कहानियां
फ़ाइनेंशियल ईयर 22 से Inox India के एक्सपोर्ट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी
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FY22 | FY23 | FY24 | FY25 | FY26 | चार साल का CAGR (%) |
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| कुल इनकम (₹ करोड़) | 803 | 986 | 1,162 | 1,354 | 1,632 | 19 |
| घरेलू (₹ करोड़) | 533 | 541 | 521 | 641 | 661 | 6 |
| एक्सपोर्ट (₹ करोड़) | 270 | 445 | 641 | 713 | 971 | 38 |
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में डिस्पोज़ेबल सिलिंडर की शिपमेंट 20 लाख यूनिट से ज़्यादा रही, जो मुख्यतः अमेरिका के रेफ्रिजरेंट ग्राहकों के लिए थी. लिक्विड सिलिंडर, क्रायोसील प्रोडक्ट, स्टोरेज और रीगैसिफ़िकेशन सिस्टम और सेमीकंडक्टर सोलर मैन्युफ़ैक्चरर्स के लिए हाई-प्योरिटी अमोनिया कंटेनर के दम पर, नॉर्थ और सेंट्रल अमेरिका का रेवेन्यू में हिस्सा पिछले साल के 14 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया.
LNG रेवेन्यू एक साल में लगभग दोगुना होकर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹457 करोड़ पहुंच गया. घरेलू स्तर पर इसकी उम्मीद भारी वाहनों में LNG अडॉप्शन पर टिकी है. PESO की 2025 में भारी वाहनों पर LNG फ्यूल टैंक को मंज़ूरी ने राह खोली है और PNGRB का अनुमान है कि LNG भारी ट्रांसपोर्ट में 30 से 40 प्रतिशत डीज़ल की जगह ले सकता है. Inox इसी अनुमान के आधार पर फ्यूल टैंक क्षमता 10 गुना बढ़ाने की योजना बना रही है.
हालांकि, ज़मीनी हक़ीक़त अभी पीछे है. आज भारतीय सड़कों पर सिर्फ़ क़रीब 1,500 LNG ट्रक चल रहे हैं और 2021 में सरकार ने 1,000 LNG रिटेल स्टेशन का जो लक्ष्य रखा था, उसमें से अगस्त 2025 तक सिर्फ़ 29 चालू हो सके हैं. निकट भविष्य के ज़्यादा ठोस मौक़े सीमित हैं: Cochin Shipyard से ₹85 करोड़ का मरीन ऑर्डर और भारतीय रेल से ड्यूल-फ्यूल लोकोमोटिव ऑर्डर.
बड़ा दांव
Inox ऐसे प्रोजेक्ट्स में आ गई है जिन्हें दुनिया में बहुत कम मैन्युफ़ैक्चरर पूरा कर सकते हैं. मैनचेस्टर में इसने Highview Power की दुनिया की पहली कमर्शियल-स्केल लिक्विड एयर एनर्जी स्टोरेज सुविधा के लिए पांच क्रायोजेनिक टैंक डिलीवर किए, जिनकी फेज़ 1 में क़ीमत ₹93.5 करोड़ थी. Highview स्कॉटलैंड में फेज़ 2 प्लांट की योजना बना रही है जो 8 से 10 गुना बड़ा होगा और संभावित रूप से ₹750 से ₹900 करोड़ का हो सकता है.
बहामास में Inox एक आइलैंड पावर प्लांट के लिए ₹240 करोड़ का टर्नकी मिनी-LNG टर्मिनल बना रही है. इंडोनेशिया, फ़िलीपींस और अंडमान द्वीप समूह में भी ऐसे ही प्रोजेक्ट्स के लिए बोलियां लगाई जा रही हैं, जिनमें से हर एक का अनुमानित मूल्य क़रीब ₹200 करोड़ है.
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की चौथी तिमाही में Inox को एक प्रमुख अमेरिकी प्राइवेट स्पेस कंपनी से क्रायोजेनिक उपकरणों के लिए ₹200 करोड़ का ऑर्डर मिला. मैनेजमेंट को उम्मीद है कि यह कंपनी की भविष्य की ज़रूरतों का कम से कम 50 प्रतिशत Inox सप्लाई करेगी, यानी यह एक बार का नहीं बल्कि सीरियल प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट है. Inox ISRO के 'थर्ड लॉन्च पैड' के क्रायोजेनिक हिस्से के लिए भी बोली लगा रही है. यह ₹4,000 करोड़ का प्रोजेक्ट है जिसमें क्रायोजेनिक उपकरण आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत होते हैं.
ऑर्डरबुक क्या बताती है
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के आख़िर में Inox की ऑर्डरबुक ₹1,514 करोड़ थी, जिसमें 63 प्रतिशत एक्सपोर्ट ऑर्डर हैं. इसमें से क़रीब ₹1,200 करोड़ फ़ाइनेंशियल ईयर 27 में पूरे होने हैं. पिछले साल के रेवेन्यू का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा, एक भी नया ऑर्डर मिलने से पहले ही पक्का हो चुका है. बैकलॉग का आधा हिस्सा LNG और क्रायो-साइंटिफ़िक में है, जो दोनों ज़्यादा मार्जिन वाले सेगमेंट हैं.
नए ऑर्डर का आना लगातार ₹350 से ₹400 करोड़ प्रति तिमाही रहा है और मैनेजमेंट ₹500 करोड़ को नया बेस बनाना चाहता है. कंपनी फ़ाइनेंशियल ईयर 27 के लिए 18 से 20 प्रतिशत रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रही है.
कमज़ोरियां कहां हैं
प्रोजेक्ट-बेस्ड ऑर्डर का हिस्सा 30 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत से ऊपर चला गया है, जिससे रेवेन्यू में उतार-चढ़ाव आ गया है. बड़े टर्नकी प्रोजेक्ट्स में पेमेंट माइलस्टोन के हिसाब से होती है, यानी Inox को अक्सर अपनी जेब से काम चलाना पड़ता है. इससे वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है. नेट प्रॉफ़िट 14 प्रतिशत बढ़ने के बावजूद, ऑपरेशंस से कैश फ़्लो फ़ाइनेंशियल ईयर 25 के ₹122 करोड़ से घटकर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹117 करोड़ रह गया.
वैश्विक स्तर पर Linde और Chart Industries से मुक़ाबला है. Linde ख़ुद गैस बनाती है और सप्लाई को उपकरण के साथ बंडल करती है, जो Inox नहीं कर सकती. Chart Industries LNG इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रायोजेनिक साइंटिफ़िक उपकरणों में आक्रामक रूप से बढ़ रही है, यानी ठीक उन्हीं दो सेगमेंट में जहां Inox दांव लगा रही है. Inox की क़ीमत में बढ़त है, लेकिन जैसे-जैसे ऑर्डर का आकार बढ़ेगा, सिर्फ़ यही काफ़ी है या नहीं, यह अभी साफ़ नहीं.
मौजूदा हालात
रेगुलर इंडस्ट्रियल गैस का काम, लगातार आते एक्सपोर्ट ऑर्डर और भरी-पूरी ऑर्डरबुक मिलकर बिना किसी असाधारण घटना के इंतज़ार के Inox की ग्रोथ के गाइडेंस को भरोसेमंद बनाते हैं. शेयर का री-रेटिंग से INOX की भरोसेमंद डिलीवरी और मज़बूत पाइपलाइन दोनों का पता चलता है.
P/E मल्टीपल अभी 52 गुना है, जो एक उपकरण निर्माता के लिए असामान्य रूप से ज़्यादा है, ख़ासकर जब उसके बड़े दांव अभी साबित नहीं हुए. निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फ़ाइनेंशियल ईयर 27 में एक्सपोर्ट पाइपलाइन कितनी तेज़ी से कन्वर्ट होती है और क्या वह रफ़्तार उस वैल्यूएशन को सही ठहरा सकती है जो शेयर पहले से मान कर चल रहा है.
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