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पाठक का सवाल: मैं हर महीने ₹2 लाख कमाता हूं. इक्विटी SIP के लिए ₹40,000 और दूसरे ख़र्चों के लिए ₹50,000 अलग रखने के बाद ₹1 लाख बचता है जो सेविंग अकाउंट में चला जाता है. क्या आप सेविंग अकाउंट के विकल्प बता सकते हैं? मेरा मक़सद सेविंग अकाउंट से बचना है क्योंकि पैसा वहां बेकार पड़ा रहता है. - अभिषेक शर्मा
आप पहले से सही काम कर रहे हैं: नियमित SIP और ख़र्चों पर नज़र. लेकिन हर महीने ₹1 लाख सेविंग अकाउंट में डालना एक चूका हुआ मौक़ा है.
बैंक सेविंग अकाउंट एक अच्छे कारण से वित्तीय ज़िंदगी का हिस्सा है. यह सुरक्षित है, नियमित है और पैसा जब चाहें निकाल सकते हैं.
लेकिन एक दिक्कत है: भारत में ज़्यादातर सेविंग अकाउंट बहुत कम ब्याज देते हैं जो मुश्किल से महंगाई के साथ चल पाता है. दूसरे शब्दों में, आपका पैसा आपके लिए काम नहीं कर रहा, बस इंतज़ार कर रहा है.
अच्छी बात यह है कि थोड़े से स्ट्रक्चर के साथ ₹1 लाख काफ़ी बढ़ सकता है. यहां है एक आसान तीन-लेयर का तरीक़ा है जिससे इसे काम पर लगाया जा सके.
लेयर 1: थोड़ा कैश हाथ में रखें (10-20%)
हां, हमने अभी सेविंग अकाउंट की आलोचना की, लेकिन उसमें एक छोटा हिस्सा रखना अभी भी सही है. ज़िंदगी अनिश्चित है. कोई ज़रूरी पेमेंट हो या अचानक कोई बिल, तुरंत मिलने वाला कैश होने का मतलब है कि ग़लत वक़्त पर कोई निवेश नहीं बेचना पड़ेगा. इसे अपना वित्तीय कुशन समझें, निवेश नहीं.
लेयर 2: ज़्यादातर पैसे के लिए लिक्विड फ़ंड (50-60%)
यहीं से पैसा कमाना शुरू होता है. लिक्विड फ़ंड, जो डेट म्यूचुअल फ़ंड की एक कैटेगरी है, ट्रेज़री बिल और कमर्शियल पेपर जैसे शॉर्ट-टर्म के विकल्पों में निवेश करते हैं. इनकी मैच्योरिटी 91 दिन होती है और आमतौर पर सालाना 6-7% रिटर्न मिलता है जो सेविंग अकाउंट से काफ़ी ज़्यादा है. इससे भी ज़रूरी बात यह कि कामकाजी दिनों में 24 घंटे में पैसा वापस मिल जाता है, इसलिए पैसे की मौजूदगी का कोई नुक़सान नहीं होता.
टैक्स भी एक फ़ायदा है. बैंक FD के उलट जहां ब्याज पर हर साल टैक्स लगता है, लिक्विड फ़ंड में फ़ायदे पर टैक्स तभी लगता है जब पैसे निकालें. इससे टैक्स पर ज़्यादा कंट्रोल रहता है.
लेयर 3: बाक़ी के लिए शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड (20-30%)
जो पैसा छह महीने से एक साल या उससे ज़्यादा समय तक नहीं चाहिए, उसके लिए शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड लिक्विड फ़ंड के मुक़ाबले थोड़ा ज़्यादा रिटर्न दे सकते हैं और अपेक्षाकृत स्थिर भी रहते हैं. ये थोड़ी लंबी मैच्योरिटी (3-5 साल) के बॉन्ड और साधनों में निवेश करते हैं जो इन्हें बीच की अवधि के लिए पैसे रखने का अच्छा विकल्प बनाता है.
निष्कर्ष
बैंक सेविंग अकाउंट में कुछ पैसा रखने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन चूंकि सेविंग अकाउंट आमतौर पर बहुत कम ब्याज देते हैं, इसलिए पैसे को ऐसी जगह लगाना बेहतर है जो कम जोख़िम और आसान पहुंच के साथ कुछ ज़्यादा लेकिन स्थिर रिटर्न दे. और यहीं लिक्विड फ़ंड और शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड जैसे डेट फ़ंड काम आते हैं.
बेशक, सभी लिक्विड फ़ंड या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड एक जैसे नहीं होते. सही चुनने के लिए सिर्फ़ रिटर्न से ज़्यादा देखना होता है, और यहीं वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र काम आता है. जोख़िम प्रोफ़ाइल और लक्ष्यों के हिसाब से निजी रेकमेंडेशन के साथ यह डेट फ़ंड चुनने की उलझन दूर करता है.
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ये लेख पहली बार जून 04, 2026 को पब्लिश हुआ.
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