फंड वायर

क्या ELSS का दौर ख़त्म हुआ या उसकी पहचान बदल रही है?

ELSS फ़ंड से पैसा लगातार निकल रहा है. लेकिन वजह कमज़ोर रिटर्न नहीं, नया टैक्स रिज़ीम है. और इस निकासी के पीछे छुपा है एक मज़बूत इक्विटी फ़ंड जिसे नकारना ग़लती होगी.

ELSS फ़ंड से पैसा लगातार निकल रहा है. लेकिन वजह कमज़ोर रिटर्न नहीं, नया टैक्स रिज़ीम है. और इस निकासी के पीछे छुपा है एक मज़बूत इक्विटी फ़ंड जिसे नकारना ग़लती होगी.Vinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः ELSS फ़ंड से पैसा महीने दर महीने निकल रहा है. ऊपर से देखें तो लगता है किसी प्रोडक्ट का अंत हो रहा है. लेकिन आंकड़ों के भीतर झांकें तो कहानी बदल जाती है. पैसा कमज़ोर रिटर्न की वजह से नहीं निकल रहा. वजह कुछ और है और उसी में आपके लिए असली सबक़ छुपा है.

हर तरफ़ एक ही बात: "ELSS अब किसी काम का नहीं." नया टैक्स रिज़ीम आ गया. 80C की छूट चली गई. तो ELSS भी गया, है ना?

ज़रा रुकिए. यही वो ग़लती है जो लाखों निवेशक एक साथ कर रहे हैं. असल में, जिस ELSS को वो टैक्स की वजह से छोड़ रहे हैं, उसकी असल ख़ूबी टैक्स में थी ही नहीं.

ELSS से पैसा (ELSS यानी इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम, वो इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड जो सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट देता है, यह वो हिस्सा है जो ₹1.5 लाख तक की छूट देता है) इसलिए नहीं निकल रहा कि उसने कमज़ोर रिटर्न दिया, बल्कि इसलिए कि उसकी सबसे बड़ी ख़ूबी, यानी टैक्स बचत, नए टैक्स रिज़ीम में बेमतलब हो गई है. ELSS मर नहीं रहा. बस उसका टैक्स वाला चोला उतर रहा है और उसके नीचे जो बचता है वो एक मज़बूत और फ़ुर्तीला इक्विटी फ़ंड है.

आगे पढ़ते हुए एक बात याद रखें: ELSS को टैक्स के चश्मे से देखना बंद करें और उसे रिटर्न और अनुशासन के चश्मे से देखना शुरू करें. वजह यहां है.

आंकड़े क्या कहते हैं?

AMFI के मुताबिक़ ELSS फ़ंड से मई 2026 में ₹650 करोड़ की नेट निकासी हुई. यह 2026 का लगातार पांचवां महीना है, जब निकासी देखने को मिली है. पिछले 14 में से 13 महीनों में इस कैटेगरी से पैसा निकला है.

लगातार हो रही है निकासी:-

महीना (2026)
ELSS नेट फ़्लो (करोड़ ₹)
मार्च −437
अप्रैल −567
मई −650

इसका असर कैटेगरी के आकार पर दिखता है. FY2025-26 में ELSS एसेट 6.45% की गिरावट के साथ क़रीब ₹2.32 लाख करोड़ से घटकर क़रीब ₹2.17 लाख करोड़ रह गया, जबकि बाकी इक्विटी फ़ंड पैसा आकर्षित कर रहे हैं.

असली वजह: टैक्स वाला तर्क ख़त्म हो गया

ELSS की पूरी अपील एक ही बात पर टिकी थी, सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट और म्यूचुअल फ़ंड में सिर्फ़ ELSS यह देता था.

वो तर्क अब ढह गया है, क्योंकि देश पूरी तरह नए टैक्स रिज़ीम की तरफ़ बढ़ गया है. CBDT के मुताबिक़, अब क़रीब 88% व्यक्तिगत करदाता नए रिज़ीम में हैं (टैक्स एसेसमेंट ईयर 2024-25 में 7.28 करोड़ रिटर्न में से 5.27 करोड़, यानी क़रीब 72%, इसी के तहत भरे गए). नए रिज़ीम में 80C की कोई छूट नहीं है, इसलिए ELSS के होने की सबसे बड़ी वजह ही ख़त्म हो जाती है. इसके ऊपर, नए रिज़ीम में ₹12 लाख तक की आमदनी अब लगभग टैक्स-फ़्री है (नौकरीपेशा के लिए ₹12.75 लाख, स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ), जो टैक्स बचाने वाले साधनों की ज़रूरत और कम कर देती है.

लेकिन यहां एक बारीक बात है जो ज़्यादातर रिपोर्ट छोड़ देती हैं: इस निकासी का एक बड़ा हिस्सा मौसमी है. हर ELSS निवेश तीन साल के लिए लॉक होता है. मार्च 2023 में टैक्स बचाने के लिए शुरू हुई SIP का लॉक-इन मार्च-अप्रैल 2026 के आसपास पूरा होता है और निकासी स्वाभाविक रूप से होती है. तो निकलने वाला हर रुपया रिज़ीम से निराशा नहीं है. कुछ तो बस तय समय पर मुक्त हुआ पैसा है.

सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी: निकासी का मतलब कमज़ोर रिटर्न नहीं

यहीं पाठक अक्सर फिसलते हैं. लोगों को लगता है कि अगर पैसा निकल रहा है तो ज़रूर ELSS ने कमज़ोर प्रदर्शन किया होगा? डेटा इसका उल्टा कहता है.

पैरामीटर
आंकड़ा
ELSS 3 साल कैटेगरी CAGR 12.42%
फ़्लेक्सी-कैप 3 साल कैटेगरी CAGR 12.75%
फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी औसत, 5 साल / 10 साल 13.75% / 14.75%
ELSS ने फ़्लेक्सी-कैप को हराया (5-साल रोलिंग, 2003 से) 53% बार
ELSS ने Nifty 500 TRI को हराया (5-साल रोलिंग, 2003 से) 58% बार

(CAGR यानी सालाना बढ़त की दर; आंकड़े वैल्यू रिसर्च के कैटेगरी डेटा से, मई 2026 तक के हैं.)

ELSS का तीन साल का रिटर्न फ़्लेक्सी-कैप से बस ज़रा सा पीछे है. और लंबे समय में, 2003 से 5-साल रोलिंग आधार पर, यानी हर मुमकिन पांच साल का दौर, न कि कोई एक भाग्यशाली खिड़की, ELSS ने फ़्लेक्सी-कैप को आधे से ज़्यादा बार मात दी है और Nifty 500 TRI (500 बड़ी लिस्टेड कंपनियों को ट्रैक करने वाला एक व्यापक इंडेक्स, डिविडेंड समेत) को क़रीब 60% बार. सबसे अच्छे ELSS फ़ंड ने 10 साल में 18-21% की दर से बढ़त दी, हालांकि ये टॉपर हैं, कैटेगरी औसत नहीं. यह किसी पिछड़ती कैटेगरी का रिकॉर्ड नहीं है.

छुपा फ़ायदा: ELSS अब भी फ़ुर्तीला है

यहां एक दिलचस्प मोड़ है. जिस निकासी को कमज़ोरी समझा जा रहा है, वही ELSS को एक बढ़त दे रही है.

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड, जो लार्ज, मिड और स्मॉल कंपनियों में आज़ादी से पैसा लगाते हैं, एक चुपचाप समस्या से जूझते हैं: आकार. जैसे-जैसे इनका पैसा बढ़ा, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ी पोज़ीशन लेना मुश्किल होता गया, क्योंकि इतना ख़रीदना कि फ़र्क़ पड़े, ख़ुद क़ीमत को हिला देता है. नतीजा यह कि कई फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चुपचाप लार्ज-कैप की तरफ़ खिसक गए. ELSS के सामने यह दिक्कत नहीं है. जिस निकासी ने कैटेगरी को छोटा किया, उसी ने उसे फ़ुर्तीला भी रखा.

लॉक-इन: टैक्स की बंधन नहीं, अनुशासन का औज़ार

ELSS में सेक्शन 80C के सभी विकल्पों में सबसे छोटा लॉक-इन है, तीन साल. इसे पहले एक टैक्स शर्त माना जाता था. अब इसे एक आदत बनाने वाले के रूप में देखें.

गिरते बाज़ार में सबसे बड़ी ग़लती है घबराकर बेच देना. लॉक-इन इस ग़लती को रोकता है, आपका पैसा कम से कम तीन साल टिका रहता है, और बाज़ार अक्सर इसी दौरान वापस उठ जाता है. उन नए निवेशकों के लिए जो गिरावट में निकल जाते हैं, यह "हथकड़ी" असल में एक तोहफ़ा है. 

ELSS बनाम टैक्स-सेवर FD: असली टैक्स के बाद वाली तुलना

जो अब भी पुराने रिज़ीम में हैं, उनके लिए मुक़ाबला ELSS बनाम टैक्स-सेवर FD है, दोनों 80C के तहत ₹1.5 लाख की छूट देते हैं. लेकिन ज़्यादातर तुलनाएं वो एक बात छोड़ देती हैं जो मायने रखती है: टैक्स के बाद आपके हाथ में क्या आता है.

फ़ीचर
ELSS फ़ंड टैक्स-सेवर FD
रिटर्न बाज़ार से जुड़ा; लंबे समय में ~12-15%, दौर के हिसाब से बदलता (गारंटीड नहीं) तय 6-7.5% (गारंटीड)
जोख़िम ज़्यादा (इक्विटी) बहुत कम (पूंजी सुरक्षित)
लॉक-इन 3 साल (सबसे छोटा) 5 साल
मुनाफ़े पर टैक्स LTCG सिर्फ़ 12.5% (हर साल पहले ₹1.25 लाख छूट) ब्याज पूरा स्लैब पर टैक्स (30%+ तक)

वो आख़िरी लाइन बेहद अहम है. FD का "7%" आपका असली रिटर्न नहीं है. 30% स्लैब वाले के लिए यह घटकर क़रीब 5% रह जाता है, क्योंकि ब्याज आमदनी में जुड़ता है और स्लैब पर टैक्स लगता है (TDS के साथ, जब ब्याज ₹50,000 पार करे). इसके उलट ELSS का मुनाफ़ा सिर्फ़ 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन के रूप में टैक्स होता है, हर साल ₹1.25 लाख की छूट के बाद; शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता ही नहीं, क्योंकि तीन साल का लॉक-इन हर निकासी को लॉन्ग-टर्म बना देता है. ज़्यादा कमाने वालों के लिए ELSS कहीं ज़्यादा टैक्स के लिहाज़ से फ़ायदेमंद है.

एक आसान उदाहरण इसे साफ़ करता है. 30% स्लैब वाले निवेशक का ₹1.5 लाख, पांच साल के लिए:

नतीजा (₹1.5 लाख, 5 साल, 30% स्लैब)
टैक्स-सेवर FD @7% ELSS @12%*
टैक्स से पहले मैच्योरिटी ₹2.10 लाख ₹2.64 लाख
मुनाफ़े पर टैक्स कैसे ब्याज हर साल स्लैब पर LTCG 12.5%, ₹1.25 लाख/साल से ऊपर
टैक्स के बाद हाथ में क़रीब ₹1.90 लाख ₹2.64 लाख

*ELSS का आंकड़ा सिर्फ़ उदाहरण है; इक्विटी रिटर्न गारंटीड नहीं. इस एक बार की निकासी में मुनाफ़ा ₹1.25 लाख LTCG छूट के भीतर रहता है, इसलिए टैक्स लगभग शून्य; बड़ा मुनाफ़ा हो तो अतिरिक्त रक़म पर 12.5% लगेगा.

और नए रिज़ीम वालों के लिए एक सीधी सच्चाई: जब 80C की कोई छूट लेनी ही नहीं, तो "टैक्स-सेवर" FD बस एक FD है, ऊपर से एक बेमतलब पांच साल का लॉक-इन जुड़ा हुआ. ऐसे में एक आम FD या कोई दूसरा विकल्प आमतौर पर ज़्यादा समझदारी है.

एक संतुलन की बात भी. इक्विटी एकतरफ़ा रास्ता नहीं है. ELSS गिर सकता है, कभी-कभी तेज़ी से, और किसी कमज़ोर या छोटे दौर में यह टैक्स-सेवर FD से कम रिटर्न दे सकता है, या नुकसान भी करा सकता है. FD की गारंटी असली और क़ीमती है. ELSS सिर्फ़ उसी निवेशक को इनाम देता है जो गिरावट में बिना घबराए टिका रह सके.

तो आपको क्या करना चाहिए

पुराने रिज़ीम में हैं? ELSS अब भी आपके लिए ख़ूब मेहनत करता है, 80C की छूट, सबसे छोटा लॉक-इन और इक्विटी की बढ़त, सब एक साथ. FD तभी चुनें जब पूंजी की सुरक्षा और तय आमदनी आपकी पहली ज़रूरत हो, जैसे रिटायरमेंट के क़रीब.

नए रिज़ीम में हैं? ELSS को टैक्स प्रोडक्ट मानना बंद करें. अगर इक्विटी फ़ंड चाहिए तो ELSS और फ़्लेक्सी-कैप को उनके दम पर तौलें. ELSS फ़ुर्ती और अनुशासन बनाने वाला लॉक-इन देता है. फ़्लेक्सी-कैप पूरी तरलता देता है, कभी भी भुना सकते हैं.

अपनी पुरानी ELSS यूनिट का क्या करें? लॉक-इन ख़त्म होते ही बेचना ज़रूरी नहीं. अगर फ़ंड अच्छा है तो उसे किसी और इक्विटी फ़ंड की तरह अपने लक्ष्य से जोड़कर रखें. बेचने का फ़ैसला रिटर्न और लक्ष्य पर हो, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि "टैक्स छूट तो गई."

आगे क्या होगा

ELSS की कहानी ख़त्म नहीं हुई. AMFI ने सरकार से बजट 2026 में नए रिज़ीम के तहत ELSS के लिए नए प्रोत्साहन और ₹500 के गुणा में (यानी 500, 1000, 1500...) निवेश वाले पुराने नियम को हटाने की मांग की है. अलग से, SBI रिसर्च ने सुझाव दिया है कि FD के ब्याज पर कैपिटल गेन की तरह टैक्स लगे और टैक्स-सेवर FD का लॉक-इन ELSS की तरह तीन साल किया जाए. नियम अब भी बदल सकते हैं.

बड़ी तस्वीर: ELSS धीरे-धीरे एक टैक्स बचाने वाले प्रोडक्ट से एक लंबे समय के इक्विटी निवेश में बदल रहा है. सेक्शन 80C के तहत उसका दबदबा भले फीका पड़े, लेकिन बढ़त और अनुशासन के दम पर वो बढ़त चाहने वाले के पोर्टफ़ोलियो में अपनी जगह बनाए रखेगा.

आख़िरी बात

ELSS से पैसा निकलना उसकी कमज़ोरी नहीं, उसके बदलते रूप की निशानी है. टैक्स का लेबल हटा दें, और जो बचता है, फ़्लेक्सी-कैप के क़रीब रिटर्न, एक दुबला और फ़ुर्तीला पोर्टफ़ोलियो, और एक छोटा लॉक-इन जो अनुशासन बनाता है, वो अब भी कई निवेशकों के लिए क़ीमती है. सही सवाल यह नहीं है कि "क्या ELSS बेमतलब हो गया?" सही सवाल है, "क्या यह इक्विटी फ़ंड मेरे लक्ष्य और मेरे टैक्स रिज़ीम में फ़िट बैठता है?" कई लोगों के लिए जवाब अब भी हां है. 

वैल्यू रिसर्च की राय

ELSS हो या कोई और इक्विटी फ़ंड, सही चुनाव आपके लक्ष्य और टैक्स रिज़ीम पर निर्भर करता है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके लिए सही फ़ंड चुनने में मदद करता है.

आज ही फ़ंड एडवाइज़र एक्सप्लोर करें

यह भी पढ़ें: मई 2026: नए निवेशकों में घबराहट, पर SIP का भरोसा कायम

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इंटरनेशनल फ़ंड्स: एकमुश्त निवेश के लिए एक ही विकल्प बचा है

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

आपका REIT 6% रिटर्न देता है. लेकिन आपको शायद सिर्फ़ 2% मिल रहा है

पढ़ने का समय 3 मिनटसिद्धांत माधव जोशी

RBI डॉलर डिपॉज़िट पर NRI को दे रहा 7% तक ब्याज

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

क्या बड़ा कैपिटल गेन हुआ है? ऐसे लग सकता है कम टैक्स

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

इस महीने 6 इक्विटी फ़ंड्स की रेटिंग में हुआ सुधार

पढ़ने का समय 6 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

SEBI का नया नियम ग़लत लोगों की मदद करता है

SEBI का नया नियम ग़लत लोगों की मदद करता है

जिन लोगों को थर्ड-पार्टी SIPs से सबसे ज़्यादा फ़ायदा होता, यह नियम उन लोगों के लिए नहीं बनाया गया है

अन्य एपिसोड

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी