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सारांशः HDFC Bank ने पिछले दशक की शुरुआत भारत के सबसे दमदार बैंक के तौर पर की थी. यह स्टोरी बताती है कि कैसे ICICI Bank ने धीरे-धीरे प्रॉफ़िटेबिलिटी, मार्जिन और वैल्यूएशन में इसे पीछे छोड़ दिया और वे कौन-सी बड़ी घटनाएं थीं जिन्होंने इस प्रतिस्पर्धा को नया रूप दिया.
FY16 में HDFC Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी 18.7 प्रतिशत था, जो इस डेटा में इसका सबसे ऊंचा स्तर है, और यह ICICI Bank के 12.4 प्रतिशत से क़रीब 50 प्रतिशत ज़्यादा था. HDFC Bank का शेयर बुक वैल्यू के 3.6 गुने पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ICICI Bank का शेयर 1.5 गुने पर. हर उस पैमाने पर जो मायने रखता है, HDFC Bank एक बड़े अंतर से बेहतर बैंक था.
एक दशक बाद, यह फ़र्क़ पूरी तरह मिट चुका है. ICICI Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी अब ज़्यादा है. इसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन, यानी लेंडिंग से होने वाली प्रॉफ़िटेबिलिटी का मुख्य पैमाना, भी ज़्यादा है. इसका प्राइस-टू-बुक रेशियो भी ज़्यादा है. दोनों बैंकों ने सिर्फ़ एक बार जगह नहीं बदली. ये तीन अलग-अलग लाइनों -रिटर्न पर, मार्जिन पर और क़ीमत पर- पर एक-दूसरे को पार कर गए और यह सफ़र एक कॉर्पोरेट स्कैंडल, एक महामारी और भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े मर्जर से होकर गुज़रा.

कैसे घटका गया फ़र्क़?
पिछले एक दशक में ICICI Bank ने P/B रेशियो के मामले में HDFC Bank से दूरी कम की है और अब आगे भी निकल गया है
| वर्ष | HDFC बैंक | ICICI बैंक |
| FY16 | 3.6 | 1.5 |
| FY17 | 4 | 1.6 |
| FY18 | 4.5 | 1.7 |
| FY19 | 4.1 | 2.3 |
| FY20 | 2.7 | 1.8 |
| FY21 | 3.9 | 2.6 |
| FY22 | 3.3 | 2.8 |
| FY23 | 3.1 | 2.9 |
| FY24 | 2.4 | 3.1 |
| FY25 | 2.7 | 3.1 |
| FY26 | 1.9 | 2.4 |
| सोर्स: AceEquity. P/B रेशियो वित्त वर्ष के अंत का है. | ||
FY16 से FY19: रीसेट का दौर
ICICI Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी FY19 तक हर साल गिरता हुआ 12.4 से 5.2 प्रतिशत के स्तर पर आ गया. असल में, RBI के 2015-16 के एसेट क्वालिटी रिव्यू के बाद सामने आए कॉर्पोरेट लेंडिंग के नुक़सान बैंक की बुक में धीरे-धीरे असर दिखा रहे थे. अक्तूबर 2018 में, चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव चंदा कोचर ने Videocon Group को दिए गए लोन से जुड़े एक कथित कॉन्फ़्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट के चलते इस्तीफ़ा दे दिया. संदीप बख़्शी को बैंक इस डेटा के सबसे कमज़ोर दौर में मिला.
FY20 से FY22: ख़ामोश ग्रोथ
महामारी ने दोनों बैंकों के वैल्यूएशन को एक महीने के भीतर झटका दिया. दोनों उबर गए. इस हलचल के पीछे, ICICI Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी 9.7 से बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गया और इसका मार्जिन 3.1 से 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गया, क्योंकि ग्रोथ रिटेल और SME लेंडिंग की तरफ़ शिफ़्ट हो रही थी. HDFC Bank का प्रदर्शन सपाट रहा. जो अंतर FY19 में बहुत बड़ा था, अब सिंगल डिजिट में सिमट चुका था.
FY23 और FY24: तीनों मेट्रिक्स पर बाज़ी पलटी
FY23 में, ICICI Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी 17.7 प्रतिशत के आंकड़े के साथ HDFC Bank के 17.2 प्रतिशत से आगे निकल गया. जुलाई 2023 में, HDFC Bank ने अपनी पैरेंट कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर पूरा किया, जो भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा मर्जर था. HDFC Ltd की बुक कम मार्जिन वाले मॉर्गेज लोन की थी और इसका असर फ़ौरन दिखा: नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.9 से गिरकर 3.4 प्रतिशत रह गया. उसी साल मार्जिन और प्राइस-टू-बुक, दोनों पैमानों पर बाज़ी पलट गई.
FY25 से FY26: नया दौर
HDFC Bank का रिटर्न ऑन इक्विटी घटकर 15.1 प्रतिशत और फिर 14.4 प्रतिशत रह गया. ICICI Bank भी अपने 19.5 प्रतिशत के पीक से थोड़ा नीचे आकर 17.4 प्रतिशत पर आ गया, यानी यह सफ़र भी सीधी लाइन में ऊपर जाने वाला नहीं रहा. FY16 में, बाज़ार HDFC Bank के लिए बुक वैल्यू का 3.6 गुना और ICICI Bank के लिए 1.5 गुना चुका रहा था. FY26 में, यह आंकड़े 1.9 और 2.4 हैं.
यह कहानी यहां तक ही क्यों
इस स्टोरी ने यह जवाब दिया है कि HDFC Bank और ICICI Bank ने किस तरह अपनी जगहें बदलीं. इसने जानबूझकर यह नहीं बताया कि आगे क्या होगा, क्या ICICI Bank की यह बढ़त बनी रहेगी, या क्या HDFC Bank का अब भी सेहतमंद RoE किसी स्टेबलाइज़ेशन की शुरुआत है जिसे क़ीमत ने अभी तक नहीं पकड़ा है, ठीक वैसी ही देरी जिसे यह स्टोरी पिछले एक दशक से ट्रेस करती आई है.
यह आगे का फ़ैसला, इन दोनों बैंकों और बाक़ी बाज़ार को लेकर, Value Research Stock Advisor की बाय, होल्ड और सेल रेटिंग्स का काम है, जो इसी फ़ंडामेंटल्स-फ़र्स्ट रिसर्च पर आधारित हैं जिस पर यह स्टोरी भी टिकी है.
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