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सारांशः Manipal Hospitals ने कंपनियां ख़रीद-ख़रीदकर भारत का सबसे बड़ा अस्पताल नेटवर्क खड़ा किया है और इसका कामकाजी रिकॉर्ड भी मज़बूत है. पर जब IPO का ज़्यादातर पैसा कर्ज़ चुकाने के लिए रखा गया हो और शेयर की क़ीमत लगभग बेदाग़ काम कर दिखाने के भरोसे पर लगी हो, तो निवेशकों को यह पूछना चाहिए कि क्या इस क़ीमत में ग़लती की कोई गुंजाइश बची भी है.
Manipal Hospitals ख़ुद भारत की सबसे बड़ी अस्पताल चेन बनाकर नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां ख़रीदकर बनी. FY21 के बाद से इसने पांच क्षेत्रीय स्तर की चेन और 5,548 बेड अपने में मिला लिए, इतने कि लाइसेंस वाले बेड की गिनती में यह Apollo से भी आगे निकल गई. पर इनमें से जो सबसे नया सौदा था, उसके कर्ज़ का ब्याज ही पिछले साल के ऑपरेटिंग मुनाफ़े की पूरी बढ़त खा गया. उसी कर्ज़ को चुकाना इस ₹9,275 करोड़ के इश्यू का मुख्य मक़सद है, जिसमें से ₹8,000 करोड़ फ़्रेश पूंजी है.
इससे यह IPO बाक़ी कई IPO के मुक़ाबले परखना आसान हो जाता है. और हमारी राय है कि इसकी क़ीमत बहुत ऊंची रखी गई है.
पहले यह देखिए कि आप चुका क्या रहे हैं
प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो, यानी कंपनी के सालाना मुनाफ़े के हर रुपये के लिए आप जो दाम देते हैं, वो यहां 80 गुना है. यह नंबर कंपनी के साथ थोड़ी नाइंसाफ़ी करता है, इसलिए फ़िलहाल इसे एक तरफ़ रख देते हैं. इस इश्यू से जो ₹5,310 करोड़ का कर्ज़ चुकाया जा रहा है, वो Sahyadri को ख़रीदने के लिए लिया गया था, वो अस्पताल चेन जो Manipal ने पिछले साल अक्टूबर में ख़रीदी थी. उस पर लगने वाला ब्याज हटा दीजिए, जो Manipal क़रीब 9% सालाना की दर से चुका रही थी, और उस बचत पर 25% टैक्स लगा दीजिए. Sahyadri को छह महीने के बजाय पूरे साल का गिनें, तो मुनाफ़ा क़रीब ₹749 करोड़ बैठता है. और उसमें ब्याज वापस जोड़ दें, तो यह क़रीब ₹1,108 करोड़ हो जाता है. ₹590 के ऊपरी बैंड पर, यह अर्निंग्स का 70 गुना हुआ.
एक और पैमाना है, एंटरप्राइज़ वैल्यू-टू-EBITDA, जो पूरे कारोबार को उसके कर्ज़ समेत और ब्याज-टैक्स-डेप्रिसिएशन से पहले के मुनाफ़े के मुक़ाबले आंकता है. इस पर Manipal क़रीब 31 गुना पर है, जबकि Apollo 33, Fortis 34 और Max 46 पर. पर इसे ज़रा ध्यान से पढ़िए. यह पैमाना ब्याज और डेप्रिसिएशन को गिनता ही नहीं, और यही दोनों तो असल में Manipal की सबसे बड़ी दिक़्क़तें हैं. ब्याज पिछले साल ₹352 करोड़ बढ़ा, जबकि ऑपरेटिंग मुनाफ़ा सिर्फ़ ₹312 करोड़, यानी ब्याज ने पूरी बढ़त ही खा ली. और डेप्रिसिएशन क़रीब एक-तिहाई बढ़ा, क्योंकि ख़रीदे हुए अस्पताल खातों में जुड़ गए और यह आगे भी बढ़ता ही रहेगा.
अब देखिए कि इसके बदले आपको मिलता क्या है. ₹8,000 करोड़ की फ़्रेश पूंजी से नेट वर्थ क़रीब दोगुनी हो जाती है, ₹8,426 करोड़ से ₹16,426 करोड़. और इस बढ़े हुए आधार पर Manipal इक्विटी पर सिर्फ़ क़रीब 7% रिटर्न कमाती है. ख़रीदार के लिए तो यह और भी कम है: ₹590 पर, आपके लगाए हर ₹100 पर कारोबार साल में सिर्फ़ क़रीब ₹1.40 कमाता है.
तीन काम जो Manipal अच्छे से करती है
#1 प्रति बेड कमाई बढ़ रही है
प्रति बेड एवरेज रेवेन्यू (ARPOB), यानी एक अस्पताल एक बेड से एक दिन में जितना कमाता है, वो FY24 के ₹61,742 से बढ़कर FY26 में ₹68,938 हो गया है. Manipal धीरे-धीरे मुश्किल इलाज की तरफ़ बढ़ी है: दिल, कैंसर, न्यूरोलॉजी, हड्डियों, पेट और गुर्दे का इलाज. इन कामों के लिए ख़ास डॉक्टर, आधुनिक मशीनें और गहन देखभाल चाहिए होती है, इसलिए हर मरीज़ का बिल भी ज़्यादा बनता है. इन ख़ास इलाजों से आने वाली भर्ती मरीज़ों की कमाई का हिस्सा 61.6% से बढ़कर 64.3% हो गया है.
#2 इसके बेड इंडस्ट्री में सबसे तेज़ी से ख़ाली होते और भरते हैं
किसी मरीज़ के भर्ती रहने का एवरेज समय 2.9 दिन से घटकर 2.8 दिन रह गया है, जबकि Apollo में यह 3.2, Max में 4.1 और Fortis में 4.2 दिन है. कोई अस्पताल किसी मरीज़ से अपना ज़्यादातर पैसा पहले एक-दो दिन में ही कमा लेता है, सर्जरी, गहन देखभाल और जांच से. जल्दी छुट्टी हो जाए, तो वही बेड ज़्यादा मरीज़ों के काम आते हैं, और इमारत या मशीनों पर कोई नया ख़र्च भी नहीं करना पड़ता.
#3 जो ख़रीदा, उसे सुधारा भी है
Manipal किसी पुराने-थके इलाक़ाई अस्पताल में अपने इलाज के तौर-तरीक़े लागू करती है, उसे मुश्किल इलाज की तरफ़ ले जाती है और सारा सामान एक जगह से थोक में ख़रीदती है. FY22 में ख़रीदी गई Columbia Asia का ऑपरेटिंग मार्जिन FY24 के 30.5% से बढ़कर FY26 में 33.8% हो गया. पूरब की AMRI इन्हीं दो सालों में 21.3% से 23.8% पर पहुंची.
चार बातें जो इस क़ीमत के ख़िलाफ़ जाती हैं
#1 बेड की गिनती धोखा देती है
लाइसेंस वाले 13,037 बेड में से 3,785 बेड तो Manipal के हैं ही नहीं. वो Manipal Academy of Higher Education जैसी संस्थाओं के हैं और Manipal उन्हें मरीज़ से बिल लेने के बजाय एक तय फ़ीस पर चलाती है. इससे उसे ₹52 करोड़ की मैनेजमेंट फ़ीस मिलती है, यानी कमाई का बमुश्किल आधा प्रतिशत. इन्हें हटा दें तो 9,252 बेड बचते हैं जो सच में Manipal के अपने लाइसेंस वाले हैं और इनमें से भी पूरे साल के हिसाब से क़रीब 6,900 ही खुले थे और मरीज़ों का इलाज कर रहे थे. वहीं Apollo के पास 8,131 बेड चालू थे. यानी Manipal लाइसेंस के हिसाब से सबसे बड़ी चेन है, इस्तेमाल हो रहे बेड के हिसाब से नहीं.
#2 बड़ी कंपनियों में इसकी ऑक्युपेंसी सबसे कम है
यह 64.5% पर चलती है, जबकि Apollo में 67%, Fortis में 68% और Max में 76%. पिछले साल ₹5,841 करोड़ में ख़रीदी गई Sahyadri 62% ऑक्युपेंसी और ₹40,555 प्रति बेड रोज़ पर चल रही है, जो पूरे ग्रुप से क़रीब 40% कम है. और यह अभी मुनाफ़े में नहीं आई है: इसकी हर बेड से कमाई ₹41,727 से गिर चुकी है और जिन छह महीनों Manipal के पास यह रही, उनमें इसने टैक्स के बाद ₹41 करोड़ का घाटा दिया.
#3 इश्यू के बाद की नेट वर्थ की आधी है गुडविल
जब कोई कंपनी किसी अस्पताल के लिए उसकी काग़ज़ी क़ीमत से ज़्यादा पैसा चुकाती है, तो वो फ़र्क़ बैलेंस शीट पर गुडविल के तौर पर दर्ज हो जाता है. Manipal पर ऐसी ₹8,121 करोड़ की गुडविल है, जो इस इश्यू के बाद भी उसकी नेट वर्थ के क़रीब आधे के बराबर है. अगर कोई ख़रीदा हुआ अस्पताल उम्मीद पर खरा न उतरे, तो इस गुडविल को घटाना पड़ता है, और उसकी चोट सीधे मुनाफ़े पर पड़ती है. Manipal FY24 में अपनी HealthMap डायग्नोस्टिक्स इकाई पर ₹114 करोड़ बट्टे-खाते डालकर ऐसा एक बार कर चुकी है.
#4 ज़्यादातर पैसा आगे नहीं, पीछे जा रहा है
जुटाए गए ₹8,000 करोड़ में से ₹5,553 करोड़ तो Sahyadri के डिबेंचर चुकाने में चले जाएंगे, जिसमें जमा हुआ ब्याज और जल्दी चुकाने का जुर्माना भी शामिल है और ₹574 करोड़ Sahyadri के बचे हुए छोटे शेयरधारकों का हिस्सा ख़रीदने में जाने हैं. इसके बाद बाक़ी सारे कामों के लिए ₹1,900 करोड़ से भी कम बचता है. कंपनी जिस विस्तार की बात करती है, यानी मुंबई और पुणे में नए अस्पताल और 2030 तक क़रीब 2,400 और बेड, उसके लिए तो वो पैसा चाहिए जो अभी जुटाना या उधार लेना बाक़ी है. लगाई गई पूंजी पर इसका रिटर्न 11.3% है, जबकि उधार की लागत क़रीब 9%, और इतने कम फ़ासले से बहुत कुछ नहीं हो पाता.
Manipal Hospital IPO का ब्यौरा
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कुल IPO आकार (₹ करोड़)
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9,275 |
| ऑफ़र फ़ॉर सेल (₹ करोड़) | 1,275 |
| फ़्रेश इश्यू (₹ करोड़) | 8,000 |
| प्राइस बैंड (₹) | 560-590 |
| सब्सक्रिप्शन डेट | 29 जुलाई - 31 जुलाई 2026 |
| इश्यू का मक़सद | कर्ज़ चुकाना, Sahyadri Hospitals में छोटी हिस्सेदारी ख़रीदना, और आम कंपनी ज़रूरतें |
IPO के बाद
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मार्केट कैप (₹ करोड़)
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77,606 |
| नेट वर्थ (₹ करोड़) | 16,426 |
| प्रमोटर हिस्सेदारी (%) | 61.8 |
| प्राइस/अर्निंग रेशियो (P/E) | 80.3 |
| प्राइस/बुक रेशियो (P/B) | 4.7 |
कंपनी के फ़ाइनेंशियल
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मुख्य आंकड़े
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2 साल CAGR (%) | FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|---|
| कमाई (₹ करोड़) | 29.4 | 10,336 | 8,242 | 6,172 |
| EBIT (₹ करोड़) | 22.6 | 1,932 | 1,620 | 1,286 |
| PAT (₹ करोड़) | 11.7 | 966 | 1,051 | 774 |
| नेट वर्थ (₹ करोड़) | 44.9 | 8,426 | 5,847 | 4,016 |
| कुल कर्ज़ (₹ करोड़) | 58.3 | 12,863 | 6,385 | 5,130 |
| EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई PAT यानी टैक्स के बाद मुनाफ़ा | ||||
मुख्य रेशियो
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रेशियो
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3 साल एवरेज (%) | FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|---|
| ROE (%) | 18 | 13.5 | 21.3 | 19.3 |
| ROCE (%) | 13.4 | 11.3 | 15 | 14 |
| EBIT मार्जिन (%) | - | 18.7 | 19.7 | 20.8 |
| कर्ज़-से-इक्विटी (गुना) | - | 1.5 | 1.1 | 1.3 |
| ROE यानी इक्विटी पर रिटर्न ROCE यानी लगाई गई पूंजी पर रिटर्न |
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कामकाजी इतिहास
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कामकाजी आंकड़ा
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FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|
| कुल बेड (लाइसेंस) | 13,037 | 10,494 | 9,520 |
| चालू बेड | 6,227 | 5,179 | 4,055 |
| ऑक्युपेंसी दर (%) | 64 | 67 | 65 |
| भर्ती रहने का एवरेज समय (दिन) | 2.8 | 2.9 | 2.9 |
| एक बेड का एवरेज रेवेन्यू (₹ रोज़) | 68,938 | 63,312 | 61,742 |
| सभी साल दोबारा तैयार किए गए आंकड़ों पर. | |||
Manipal बनाम लिस्टेड कंपनियां
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कामकाजी आंकड़ा
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Manipal | Apollo | Max | Fortis |
|---|---|---|---|---|
| कुल बेड (लाइसेंस) | 13,037 | 10,970 | 6,131 | 6,100 |
| ऑक्युपेंसी दर (%) | 64 | 67 | 76 | 68 |
| ARPOB (₹ रोज़) | 68,938 | नहीं बताया | 77,800 | 68,767 |
| ALOS (भर्ती रहने का एवरेज समय, दिन) | 2.8 | 3.2 | 4.1 | 4.2 |
हमारी राय
Manipal एक अच्छा कारोबार है. यह बढ़ रही है, जो कंपनियां ख़रीदती है उन्हें सुधारती है और अपने बेड से मरीज़ों को इंडस्ट्री में सबसे तेज़ी से निकालती है. इसमें कोई शक़ नहीं.
शक़ तो क़ीमत पर है. Manipal पिछले साल के मुनाफ़े का 80 गुना मांग रही है और इस इश्यू से होने वाली ब्याज की बचत और Sahyadri के पूरे साल के योगदान को गिन लेने के बाद भी, यह क़रीब 70 गुना पर है. यह लगभग वही क़ीमत है जो Apollo, Fortis और Max की है, इसके बावजूद कि यह अपनी इश्यू-के-बाद इक्विटी पर सिर्फ़ 7% रिटर्न कमाती है, इन चारों में इसकी ऑक्युपेंसी सबसे कम है, इसके पास एक बड़ी ख़रीदी हुई कंपनी है जो अब भी घाटे में है और जिसे पटरी पर आने में दो-तीन साल लग सकते हैं, और इसे अपने योजना वाले विस्तार के लिए नई पूंजी चाहिए. आप आज के आंकड़े नहीं ख़रीद रहे. आप यह मानकर ख़रीद रहे हैं कि Sahyadri सुधर जाएगी, ऑक्युपेंसी बढ़ेगी, और बैलेंस शीट पर बैठी गुडविल टिकी रहेगी.
हो सकता है ऐसा हो भी जाए, Manipal यह पहले भी कर चुकी है. पर क़ीमत तो इन सब बातों को पहले ही मान चुकी है, और अगर यह मेल-जोल का काम देर से हुआ, तो ख़रीदार के हाथ कुछ नहीं आता.
जो निवेशक लिस्टिंग के उछाल के बजाय कारोबार चाहते हैं, वो रुककर चार चीज़ें देख सकते हैं: कर्ज़ चुकने के साथ ब्याज की लागत घटना, ग्रुप की ऑक्युपेंसी सुधरना, Sahyadri की हर बेड से कमाई का बाक़ी नेटवर्क के बराबर आना, और गुडविल में आगे कोई कटौती न होना. इसे तब ख़रीदिए जब ये बातें वादे में नहीं, बल्कि सामने दिखने लगें.
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