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सारांशः FY 2026-27 में STCG 20% और LTCG 12.5% है. ₹1.25 लाख की सालाना छूट मिलती है. लेकिन ज़्यादातर निवेशक साल के आख़िर में घबराकर ग़लत फ़ैसले करते हैं. जो अभी से प्लान करेंगे वो टैक्स बचाएंगे. जो नहीं करेंगे वो CA के पास जाकर अपना सिर पटकेंगे.
आपके पोर्टफ़ोलियो में कुछ शेयर या फ़ंड नुक़सान में चल रहे होंगे. यह नुक़सान सिर्फ़ दर्द नहीं है.
सही तरीक़े से इस्तेमाल किया जाए तो यह टैक्स बचाने का सबसे असरदार हथियार है. इसे टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग कहते हैं. और FY 2026-27 में जब STCG 20% और LTCG 12.5% है, हर रुपये की बचत मायने रखती है.
ज़्यादातर निवेशक यह काम साल के आख़िर में करते हैं. तब बाज़ार ऊपर-नीचे होता है, जल्दबाज़ी होती है और ग़लत फ़ैसले होते हैं. स्मार्ट निवेशक यह काम अभी से शुरू करते हैं.
FY 2026-27 में टैक्स के नियम क्या हैं?
बजट 2026 ने कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया. बजट 2024 के नियम ही लागू हैं.
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टैक्स
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दर | लागू कब से |
|---|---|---|
| STCG (12 महीने से कम) | 20% | जुलाई 2024 से |
| LTCG (12 महीने से ज़्यादा) | 12.50% | जुलाई 2024 से |
| LTCG सालाना छूट | ₹1.25 लाख | FY 2024-25 से |
| LTCG पर धारा 87A की छूट | नहीं मिलता | - |
| धारा 80C से 80U से कटौती | LTCG पर नहीं | - |
| सोर्स: इनकम टैक्स एक्ट की धारा 111A, 112A; बजट 2024-25, बजट 2026 | ||
एक ज़रूरी अपडेट जो बहुत लोग नहीं जानते
इनकम टैक्स बिल 2025 के शुरुआती ड्राफ़्ट में एक बड़ी राहत थी. 31 मार्च 2026 तक जमा हुए LTCL यानी लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस को FY 2026-27 से STCG के एवज में घटाने की एक बार की सुविधा है. यह निवेशकों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. लेकिन यह नियम फ़ाइनल फ़ाइनेंस एक्ट 2025 में हटा दिया गया.
पुराने नियम जारी हैं: LTCL सिर्फ़ LTCG से घटता है. STCG से नहीं. अगर आपने इस सुविधा के भरोसे प्लानिंग की थी, तो अभी हिसाब दोबारा लगाएं.
टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग क्या है और FY 2026-27 में क्यों ज़रूरी है?
पोर्टफ़ोलियो में जो शेयर या म्यूचुअल फ़ंड ख़रीद की क़ीमत से नीचे चल रहे हों, उन्हें बेचकर नुक़सान बुक कर लेना. यह बुक किया हुआ नुक़सान उसी साल के फ़ायदे से घटाया जा सकता है.
यह टैक्स चोरी नहीं. यह क़ानून के दायरे में टैक्स प्लानिंग है.
एक उदाहरण:
मान लीजिए FY 2026-27 में आपने ₹10 लाख का शॉर्ट-टर्म फ़ायदा कमाया. लेकिन पोर्टफ़ोलियो में ₹4 लाख का अभी तक न बुका STCL है.
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स्थिति
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बिना हार्वेस्टिंग | हार्वेस्टिंग के बाद |
|---|---|---|
| STCG | ₹ 10,00,000 | ₹ 10,00,000 |
| STCL हार्वेस्ट किया | - | ₹ 4,00,000 |
| टैक्स देने लायक़ STCG | ₹ 10,00,000 | ₹ 6,00,000 |
| 20% + 4% सेस पर टैक्स | ₹ 2,08,000 | ₹ 1,24,800 |
| बचत | - | ₹ 83,200 |
कौन सा नुक़सान किस फ़ायदे से घटेगा?
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नुक़सान का प्रकार
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किससे घटेगा |
|---|---|
| STCL (शॉर्ट-टर्म नुक़सान) | STCG और LTCG दोनों से |
| LTCL (लॉन्ग-टर्म नुक़सान) | सिर्फ़ LTCG से |
| इस साल इस्तेमाल नहीं हुआ | 8 साल तक कैरी फ़ॉरवर्ड |
| STCL को "यूनिवर्सल इरेज़र" समझें. LTCL ज़्यादा सीमित है. | |
याद रखें: नुक़सान कैरी फ़ॉरवर्ड करने के लिए ITR समय पर फ़ाइल करना ज़रूरी है. 31 जुलाई 2027 की आख़िरी तारीख़ मिस हुई तो नुक़सान आगे नहीं ले जा सकते.
₹1.25 लाख की LTCG छूट: साल भर स्मार्ट तरीक़े से इस्तेमाल करें
धारा 112A के तहत ₹1.25 लाख तक का LTCG हर साल टैक्स-फ़्री है.
- तरीक़ा 1: लॉस हार्वेस्टिंग LTCG ₹1.25 लाख से ज़्यादा है? नुक़सान में चल रहे शेयर या फ़ंड बेचकर टैक्स देने लायक़ फ़ायदा घटाएं.
- तरीक़ा 2: गेन हार्वेस्टिंग (सबसे कम इस्तेमाल होने वाला तरीक़ा) हर साल ₹1.25 लाख तक का LTCG बुक करें और उसी फ़ंड में फिर से लगाएं. इससे लागत रीसेट होती है और भविष्य में टैक्स कम लगता है.
हिसाब: ₹50 लाख का इक्विटी कॉर्पस जो 12% सालाना बढ़ रहा है. अगर हर साल ₹1.25 लाख का LTCG बुक करके फिर से लगाएं तो 10 साल में लगभग ₹1.5 लाख की टैक्स बचत होती है.
ध्यान रखें: जब फिर से ख़रीदें तो होल्डिंग पीरियड रीसेट होता है. 12 महीने से पहले बेचा तो 20% STCG लगेगा.
यह भी पढ़ें: क्या टैक्स-हार्वेस्टिंग से बचत में कोई फ़र्क़ पड़ता है?
SIP निवेशकों के लिए FIFO का असर
SIP करने वाले निवेशकों को एक ख़ास बात समझनी होगी जो ज़्यादातर लोग नज़रअंदाज़ करते हैं.
हर SIP किश्त की अपनी ख़रीद तारीख़ और होल्डिंग पीरियड होती है. यानी अप्रैल 2025 की किश्त और अक्तूबर 2025 की किश्त दोनों अलग-अलग मानी जाती हैं. दोनों का टैक्स भी अलग-अलग होगा.
जब आप पैसा निकालते हैं तो FIFO यानी पहले आओ पहले जाओ का नियम लागू होता है. सबसे पहले ख़रीदी हुई यूनिट सबसे पहले बिकी मानी जाती है.
इसका असर क्या होता है?
मान लीजिए आपने जनवरी 2025 से हर महीने SIP की. जुलाई 2026 में ₹50,000 निकालना चाहते हैं.
FIFO के हिसाब से जनवरी, फ़रवरी, मार्च 2025 की यूनिट पहले बिकेंगी. यह यूनिट 12 महीने से ज़्यादा पुरानी हैं यानी LTCG. लेकिन जून, जुलाई 2026 की किश्तें 12 महीने से कम पुरानी हैं यानी STCG.
एक ही रिडेम्शन में LTCG और STCG दोनों बन सकते हैं.
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किश्त
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ख़रीद तारीख़ | जुलाई 2026 में उम्र | टैक्स |
|---|---|---|---|
| जनवरी 2025 | जनवरी 2025 | 18 महीने | LTCG 12.5% |
| जून 2025 | जून 2025 | 13 महीने | LTCG 12.5% |
| अगस्त 2025 | अगस्त 2025 | 11 महीने | STCG 20% |
| मार्च 2026 | मार्च 2026 | 4 महीने | STCG 20% |
इसीलिए AMC की स्टेटमेंट ध्यान से देखें. ब्रोकर या AMC की कैपिटल गेन रिपोर्ट हमेशा FIFO के हिसाब से बनती है. लेकिन उसे एक बार ख़ुद भी जांच लें.
एक और ज़रूरी बात: अगर आप नुक़सान बुक करने के लिए SIP की हाल की किश्तें बेचना चाहते हैं, तो FIFO आपको यह करने से रोक सकती है. सिस्टम पहले पुरानी यूनिट बेचेगा. इसलिए हार्वेस्टिंग से पहले अपनी FIFO सीक्वेंस ज़रूर देखें.
पोर्टफ़ोलियो में बड़ा फ़ायदा है? ऑफ़सेट की स्ट्रैटेजी यह है
कई निवेशकों के पोर्टफ़ोलियो में इस साल बड़ा LTCG या STCG हुआ है. बाज़ार ने पिछले कुछ सालों में अच्छा रिटर्न दिया, PMS ने चर्न किया, ESOP बेचे या कोई बड़ा एग्ज़िट हुआ.
अब टैक्स का बिल बड़ा दिख रहा है. यहां क्या करें?
- पहला: पूरे पोर्टफ़ोलियो में STCL और LTCL ढूंढें. STCL सबसे लचीला है, पहले इस्तेमाल करें.
- दूसरा: STCL को STCG और LTCG दोनों से घटाया जा सकता है. यानी अगर ₹10 लाख का LTCG है और ₹3 लाख का STCL है तो टैक्स देने लायक़ LTCG ₹7 लाख रह जाता है. ₹1.25 लाख की छूट अलग से मिलेगी.
- तीसरा: अगर नुक़सान काफ़ी नहीं है तो यह भी देखें: क्या कोई शेयर या फ़ंड है जिसका बिज़नेस कमज़ोर हो गया है? उसे बेचना दो काम करेगा, पोर्टफ़ोलियो साफ़ भी होगा और टैक्स भी बचेगा.
- चौथा: बड़ा कॉर्पस निकालना हो जैसे घर ख़रीदना या बच्चे की पढ़ाई, तो एक साल में सब न निकालें. 31 मार्च से पहले कुछ और 1 अप्रैल के बाद कुछ. इससे दो वित्त वर्षों में ₹1.25 लाख की छूट दो बार मिलेगी.
ध्यान रखें: टैक्स बचाने के लिए ग़लत निवेश में बने रहना भी नुक़सानदेह है. टैक्स एकमात्र कारण नहीं होना चाहिए.
STT घटाया नहीं जा सकता
एक आम ग़लतफ़हमी: STT यानी सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स कैपिटल गेन से घटाई नहीं जा सकती. ब्रोकरेज और स्टैम्प ड्यूटी को कैपिटल गेन से घटाया जा सकता है, लेकिन STT को नहीं. और ब्रोकरेज हर ब्रोकर के हिसाब से अलग होती है, कुछ बहुत कम लेते हैं, कुछ ज़्यादा. इसलिए अपने ब्रोकर की फ़ीस पहले चेक कर लें.
यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि हार्वेस्टिंग में आप दो बार ट्रांज़ैक्शन करते हैं: एक बार बेचते हैं, एक बार फिर से ख़रीदते हैं. दोनों बार STT लगता है. दोनों बार ब्रोकरेज लगती है और यह सब घटाने के बाद ही असली बचत दिखती है.
एक उदाहरण:
मान लीजिए ₹4 लाख के शेयर बेचे. STCG पर टैक्स बचत: ₹83,200.
लेकिन ट्रांज़ैक्शन का ख़र्च:
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ख़र्च
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अनुमानित रक़म |
|---|---|
| STT बेचते वक़्त (0.1%) | ₹ 400 |
| बेचते वक़्त ब्रोकरेज | ₹ 200 |
| STT फिर से ख़रीदते वक़्त (0.1%) | ₹ 400 |
| ब्रोकरेज फिर से ख़रीदते वक़्त | ₹ 200 |
| बिड-आस्क स्प्रेड (अनुमानित) | ₹ 500 |
| कुल ख़र्च | ₹ 1,700 |
| यहां बचत ₹83,200 और ख़र्च ₹1,700. यह हार्वेस्टिंग साफ़ फ़ायदेमंद है. | |
लेकिन अगर नुक़सान बहुत छोटा हो, जैसे ₹5,000 तो टैक्स बचत ₹1,000 और ट्रांज़ैक्शन ख़र्च ₹1,700. तब हार्वेस्टिंग का कोई फ़ायदा नहीं.
नियम सीधा है: हार्वेस्टिंग तभी करें जब टैक्स बचत ट्रांज़ैक्शन के कुल ख़र्च से साफ़ ज़्यादा हो.
NRI निवेशकों के लिए अतिरिक्त सावधानी
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पहलू
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नियम |
|---|---|
| STCG TDS | 20% |
| LTCG TDS | 12.5% (₹1.25 लाख से ऊपर) |
| IDCW पर TDS | 20% या DTAA दर, जो कम हो |
| ₹10,000 सालाना लिमिट | NRI को नहीं मिलता |
| धारा 87A की छूट | LTCG पर नहीं मिलता |
| धारा 80C से 80U | LTCG से कटौती नहीं |
पूरे साल के लिए स्मार्ट प्लान
- अप्रैल-जून 2026: पिछले साल का कैरी फ़ॉरवर्ड नुक़सान चेक करें. FIFO के हिसाब से होल्डिंग पीरियड देखें. ITR जल्दी फ़ाइल करें ताकि नुक़सान कैरी फ़ॉरवर्ड हो सके.
- जुलाई-सितंबर 2026: ₹1.25 लाख की LTCG छूट का इस्तेमाल करें. जिन शेयर या फ़ंड की कहानी कमज़ोर हुई है उन्हें देखें.
- अक्तूबर-दिसंबर 2026: साल भर के STCG और LTCG का अनुमान लगाएं. नुक़सान में चल रहे शेयर या फ़ंड पहचानें. STCL और LTCL अलग-अलग करें.
- जनवरी-मार्च 2027: हार्वेस्टिंग पूरा करें. लेकिन आख़िरी हफ़्ते का इंतज़ार मत करें. बाज़ार का उतार-चढ़ाव और काम में देरी सब कुछ बिगाड़ सकती है.
यह ज़रूर संभाल कर रखें
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दस्तावेज़
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क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| कॉन्ट्रैक्ट नोट | मुख्य प्रमाण |
| डीमैट स्टेटमेंट | FIFO क्रम तय करता है |
| ब्रोकर कैपिटल गेन रिपोर्ट | मिलान करें |
| 31 जनवरी 2018 की FMV | पुराने शेयरों के लिए पुराने नियम के लिए |
| पिछले साल की ITR | कैरी फ़ॉरवर्ड नुक़सान के लिए |
अहम सबक़
टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग नुक़सान बनाने की कोशिश नहीं है. यह उन नुक़सानों को पहचानने की कला है जो पहले से मौजूद हैं. FY 2026-27 में STCG 20% और LTCG 12.5% है. जो अभी से हिसाब रखेंगे वो मार्च 2027 में चैन से बैठेंगे. जो आख़िरी वक़्त का इंतज़ार करेंगे वो घबराहट में ग़लत फ़ैसले करेंगे.
2026-27 में स्मार्ट निवेश सिर्फ़ यह नहीं कि क्या ख़रीदें और क्या बेचें. यह भी है कि कब फ़ायदा बुक करें, कब नुक़सान बुक करें और दोनों को कितनी सही तरीक़े से रिपोर्ट करें.
ध्यान दें!
यह लेख सिर्फ़ जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है. टैक्स का असर रेज़िडेंट स्टेटस, ट्रांज़ैक्शन की तारीख़, STT स्टेटस, सरचार्ज स्लैब और DTAA नियमों पर निर्भर करता है. कोई भी तरीक़ा अपनाने से पहले किसी टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें. इसके अलावा, टैक्स प्लानिंग और सही फ़ंड चुनना दोनों साथ-साथ चलते हैं. इसके लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपको ऐसे फ़ंड चुनने में मदद करता है जो लंबे समय में टैक्स के लिहाज़ से फ़ायदेमंद रिटर्न दे.
आज ही फ़ंड एडवाइज़र एक्सप्लोर करें
यह भी पढ़ें: टैक्स हार्वेस्टिंग आपका टैक्स कम कर सकती है!
ये लेख पहली बार जून 02, 2026 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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