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सारांशः इंटरेस्ट कवरेज से यह पता चल सकता है कि कोई कंपनी अपना मुनाफ़ा कर्ज़ देने वालों से बचाने में पहले से बेहतर हो रही है या नहीं. यह स्क्रीन उन पांच कंपनियों को सामने रखती है जहां यह रेशियो तेज़ी से सुधरा और यह भी देखती है कि वो बदलाव आख़िर आया कहां से.
किसी कंपनी की इनकम (प्रॉफ़िट एंड लॉस) स्टेटमेंट देखते वक़्त, हममें से ज़्यादातर लोग सीधे उसके मुनाफ़े पर नज़र गड़ा देते हैं. पर कई बार सबसे दिलचस्प बदलाव, ऑपरेटिंग मुनाफ़े से एक लाइन नीचे हो रहा होता है.
एक उदाहरण लीजिए, एक कंपनी ब्याज और टैक्स से पहले ₹100 करोड़ (EBIT) कमाती है, और उसमें से ₹80 करोड़ कर्ज़ देने वालों को दे देती है. बाज़ार में ज़रा सी भी सुस्ती आए, तो उसकी बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ सकता है.
तीन साल बाद, उसका EBIT दोगुना होकर ₹200 करोड़ हो जाता है, जबकि ब्याज घटकर ₹20 करोड़ रह जाता है. कर्ज़ देने वालों को चुकाने के बाद जो बचता है, वो ₹20 करोड़ से बढ़कर ₹180 करोड़ हो गया, यानी अकेले मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा.
हमारी इस स्क्रीन में, इंटरेस्ट कवरेज का मतलब है, अदर इनकम को हटाकर निकाला गया EBIT (जिसमें कोई असाधारण फ़ायदा या नुकसान भी शामिल नहीं), भाग ब्याज का ख़र्च. ऐसा इसलिए, क्योंकि ट्रेजरी गेन और एक-बार वाली आमदनी यह नहीं बताती कि कंपनी का मुख्य कारोबार अपना कर्ज़ चुकाने में बेहतर हो रहा है या नहीं.
हमने बैंक और NBFC को इससे बाहर रखा, क्योंकि उनके लिए ब्याज कोई कर्ज़ की लागत नहीं, बल्कि कारोबार का ही हिस्सा होता है. और एक कंपनी को हटा दिया जिसका कवरेज पहले से ही बहुत ऊंचा था: 30 गुना से 60 गुना हो जाने का मतलब, एक गुना से पांच गुना पहुंचने के मुक़ाबले बहुत कम है.
5 कंपनियां जहां इंटरेस्ट कवरेज सबसे ज़्यादा सुधरा
इंटरेस्ट कवरेज में आई तेज़ बढ़त, बेहतर कामकाज से आ सकती है, कर्ज़ की घटी लागत से, या दोनों से.
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कंपनी
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FY23 इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (गुना) | FY26 इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (गुना) | 5 साल रेवेन्यू CAGR (%) | 5 साल PAT CAGR (%) | स्टॉक रेटिंग |
|---|---|---|---|---|---|
| Inox Green Energy | -0.01 | 2.44 | 10 | 21 | 2 |
| GE Vernova T&D | 0.83 | 106.69 | 12 | 86 | 3 |
| Force Motors | 4.35 | 432.02 | 35 | 66 | 3 |
| Chambal Fertilisers | 4.72 | 342.07 | 10 | 6 | 4 |
| Shilpa Medicare | 0.12 | 5.56 | 11 | 18 | 2 |
ध्यान दें: यह ख़रीदने लायक़ शेयरों की लिस्ट नहीं है. किसी रेशियो का सुधरना कई वजहों से हो सकता है. दिलचस्प सवाल यह नहीं कि वो कितना सुधरा, बल्कि यह कि क्यों सुधरा.
Inox Green: वो टर्नअराउंड, जो असल में नहीं हुआ था
FY23 में Inox Green का EBITDA क़रीब ₹57 करोड़ था, पर ₹65 करोड़ के डेप्रिसिएशन ने उसके EBIT को माइनस में धकेल दिया, वो भी ₹71 करोड़ का ब्याज ख़र्च गिनने से पहले ही. FY26 तक, डेप्रिसिएशन घटकर ₹2 करोड़ और ब्याज ₹9 करोड़ रह गया; EBIT ₹21 करोड़ के साथ पॉज़िटिव हुआ और कवरेज माइनस से बढ़कर दो गुना के थोड़ा ऊपर पहुंच गया.
यह कामकाज में आए किसी सुधार जैसा लगता है. पर ऐसा नहीं है.
रेवेन्यू सिर्फ़ ₹254 करोड़ से बढ़कर ₹281 करोड़ हुई, और डेप्रिसिएशन से पहले का ऑपरेटिंग मुनाफ़ा तो घट ही गया, ₹57 करोड़ से ₹23 करोड़, क्योंकि मार्जिन 23% से गिरकर 8% रह गए.
जो बदला, वो EBITDA और टैक्स से पहले के मुनाफ़े के बीच का ख़र्च था: कंपनी ने अपनापावर इवैक्युएशन इंफ़्रास्ट्रक्चर वाला कारोबार अलग कर दिया, जिससे क़रीब ₹1,000 करोड़ का ग्रॉस ब्लॉक और सालाना ₹50-55 करोड़ का डेप्रिसिएशन हट गया, और अब उसकी फ़ाइनेंस कॉस्ट भी नाम मात्र की रहने की उम्मीद है. दूसरी आमदनी भी उछल गई, ₹40 करोड़ से ₹144 करोड़; अगर उसे EBIT में शामिल कर लिया जाता, तो यह सुधार अपनी हक़ीक़त से कहीं ज़्यादा शानदार दिखता.
Inox Green का कवरेज सच में बेहतर हुआ है, पर वो एक हल्की हुई बैलेंस शीट दिखाता है, ज़्यादा मुनाफ़े वाला कारोबार नहीं. बचा हुआ कारोबार अपनी कमाई इतनी तेज़ी से बढ़ा पाएगा कि इस साफ़ हुए ढांचे का हक़ अदा कर सके या नहीं, यह वो सवाल है जिसका जवाब यह रेशियो नहीं दे सकता.
Force Motors: जहां दोनों तरफ़ सुधार हुआ
FY23 में Force ने ₹5,029 करोड़ की रेवेन्यू पर ₹313 करोड़ का EBITDA कमाया; ₹241 करोड़ के डेप्रिसिएशन के बाद, EBIT ₹72 करोड़ रह गया, जबकि ब्याज ₹68 करोड़ था, यानी बमुश्किल एक गुना कवरेज. FY26 तक, रेवेन्यू चढ़कर ₹9,057 करोड़ और ऑपरेटिंग मुनाफ़ा ₹1,483 करोड़ हो गया; डेप्रिसिएशन धीरे-धीरे बढ़कर ₹286 करोड़ हुआ, EBIT क़रीब ₹1,197 करोड़ पर पहुंचा, और ब्याज गिरकर सिर्फ़ ₹3 करोड़ रह गया.
इस मुक़ाम पर आकर यह मल्टीपल ख़ुद ही बेमानी हो जाता है; यह सैकड़ों में चला जाता है. जो बात मायने रखती है, वो यह कि ब्याज के तौर पर, मुनाफ़े पर कोई बड़ा दावा ही नहीं रह गया.
यह हिसाब-किताब का कोई खेल नहीं था: ऑपरेटिंग मार्जिन 6% से बढ़कर 16% हुआ, जिसमें बेहतर ऑपरेटिंग लीवरेज और घरेलू थोक बिक्री में 20% की बढ़त ने मदद की. उधार ₹955 करोड़ से घटकर शून्य हो गया, ऑपरेटिंग कैश फ़्लो ₹532 करोड़ से बढ़कर ₹1,297 करोड़ हुआ, और यहां पूरी कड़ी साफ़ है: ज़्यादा बिक्री ने मार्जिन बढ़ाए, मार्जिन ने EBIT बढ़ाया, और मज़बूत कैश फ़्लो ने वो कर्ज़ चुका दिया जो मुनाफ़ा खा रहा था.
पेच यह है कि यह फ़ायदा दोबारा नहीं मिल सकता. ब्याज पहले से ही लगभग शून्य है. अब सवाल बदल जाता है, "क्या Force अपना कर्ज़ चुका सकती है?" से "क्या वो वही मार्जिन और बढ़त बनाए रख सकती है, जिनसे उसने कर्ज़ मिटाया?"
Chambal Fertilisers: यहां काम डिनोमिनेटर ने किया
Chambal का डेप्रिसिएशन से पहले का ऑपरेटिंग मुनाफ़ा ₹1,822 करोड़ से बढ़कर ₹2,694 करोड़ हुआ. दूसरी आमदनी हटाकर देखें तो EBIT ₹1,514 करोड़ से बढ़कर ₹2,345 करोड़ हुआ, यानी 55% ऊपर. ठीक-ठाक है.
पर कवरेज का इतनी तेज़ी से उछलना इसकी वजह से नहीं हुआ. ब्याज ₹320 करोड़ से गिरकर ₹7 करोड़ रह गया, यानी क़रीब 98% की गिरावट, और इसी ने कवरेज को पांच गुना से नीचे से उठाकर कई सौ गुना पर पहुंचा दिया. एक इंडस्ट्री रिपोर्ट ने बताया कि Chambal ने मार्च 2026 तक अपना पूरा गडेपान-III वाला टर्म लोन पहले ही चुका दिया, जिसमें मज़बूत कैश और समय पर मिली सब्सिडी ने मदद की और दिसंबर 2025 तक उसके पास ₹1,439 करोड़ का शुद्ध कैश बचा हुआ था.
जो पाठक सिर्फ़ यह रेशियो देखेगा, वो मान बैठेगा कि कंपनी की कमाई कई दर्जन गुना बढ़ गई; जबकि वो सिर्फ़ आधी बढ़ी. यह असाधारण बदलाव कर्ज़ वाली तरफ़ से आया, और खाद कंपनियों के मामले में, जिनकी बड़ी सब्सिडी बाक़ी रहती है, कर्ज़ इसी तरह घट सकता है, बिना मुख्य कारोबार के उसी रफ़्तार से बढ़े. और ध्यान दें, FY25 में लगभग ख़त्म हो जाने के बाद, मार्च 2026 तक उधार फिर ₹1,068 करोड़ पर था, जो याद दिलाता है कि ₹7 करोड़ का यह इंटरेस्ट बिल हमेशा के लिए नहीं हो सकता.
आपके लिए इसका क्या मतलब है
इंटरेस्ट कवरेज को आमतौर पर कर्ज़ चुकाने की ताक़त नापने वाला पैमाना माना जाता है. पर इसे समय के साथ बदलते हुए देखें, तो यह कुछ ज़्यादा दिलचस्प बात खोलता है: यह बताता है कि कारोबार की कमाई का फ़ायदा अब किसे मिल रहा है. जैसे-जैसे EBIT बढ़ता है और कर्ज़ घटता है, हर नए रुपये का कम हिस्सा कर्ज़ देने वालों के पास जाता है, और ज़्यादा हिस्सा शेयरधारकों और कारोबार में दोबारा लगाने के लिए बचता है.
यह स्क्रीन आपको बताती है कि कहां कुछ बदला है. पर वो बदलाव दोबारा हो सकता है या नहीं, कारोबार सच में बेहतर हुआ है या नहीं, और उसकी क़ीमत में यह बात पहले से शामिल है या नहीं, यहीं स्क्रीनिंग ख़त्म होती है और निवेश शुरू होता है.
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